“मुझे वो पल – एक अनूठा पल, एक अनोखा पल आज भी याद है स्वामी जब मुझे विश्वास ही न हुआ था कि जो मेरी आंखों के सामने था – वो सच था! मैं तो .. मैं तो बौरा गई थी, पागल हो गई थी और अनवरत तुम्हारी आंखों मे…