उस रात स्वामी पीतांबर दास और गुलनार सोए नहीं थे। उन्होंने सारे जहान को आज जागते देखा था – साथ-साथ। गुलनार चंद्रप्रभा में स्नान करके लौटी थी। भीगे गेसुओं को उसने कंधों पर सजाया हुआ था। सपाट…