एक शुभ जैसी संभावना बन वंशी बाबू का अमरीश विला में आगमन हुआ था। अमरीश जी, सरोज सेठानी, अविकार और अंजली हर्षोल्लास से भर उठे थे। आश्रम छोड़ कर आने में जो अपार कष्ट हुआ था – उसे उन्होंने मौन…