आज का दिन राम चरन पर बहुत भारी पड़ा था। रात गारत होती जा रही थी लेकिन राम चरन को नींद नहीं आ रही थी। एक अजीब सी बेचैनी थी – जिसका मर्म वह जान नहीं पा रहा था। बार-बार कालू की रेहड़ी के सामने…