“अच्छा नहीं लगता राम चरन जी – आप रात को बाहर ही पड़े रहते हैं!” पंडित कमल किशोर ने सौहार्द जताया था। “अब तो आप ढोलू शिव के अनुचर हैं, भक्त हैं और सेवक भी हैं।” पंडित जी ने प्रसन्न होकर राम चरन के ग…