कुंवर साहब और इंद्राणी ने जन्मेजय को सुंदरी की शादी की सारी हदें समझा दी थीं। सुंदरी की शादी होने की सुगंध डब्बे में बंद रखनी थी – जन्मेजय को याद था। …