कालू सूनी-सूनी निगाहों से सामने पसरे खाली मैदान को एक टक देख रहा था। मद्दी चल रही थी। कोई गहमागहमी न थी। किसी तरह की मारा-मारी भी न थी। ग्राहकों का अ …