चिराग ऑडीटोरियम आगंतुकों से खचाखच भरा था। प्रशांत खामोशी थी। वही आवाज लौटी थी। “केवल और केवल कोरे कागज पर ही लिखी जा सकती है कोई इबारत! कच्ची उम्र मे …