पंडित कमल किशोर आ चुके थे। उन्होंने नाम करण की पूरी तैयारियां तय कर दी थीं। इंद्राणी ने राम चरन की आरती उतारी थी। सुंदरी ने राम चरन के चरन स्पर्श किए थे और राम चरन ने भी कुंवर साहब के पैर छू कर आशीर्वाद लिया था।