“लीव इट टू मी, मुनीर!” आसमान से शायद अल्लाह का आदेश आया था। “जिंदगी और मौत मैं देता हूँ – बलूच नहीं!”

मुनीर खिड़की के पार पसरे नीले आसमान को देखता ही रहा था – निरंतर।