रात ढलने को थी। राम चरन अभी भी गर्भ गृह में बैठा था। पूरी ढूंढ खखोर के बाद उसे एक ही बात वाजिब लगी थी। संघमित्रा और कहीं नहीं – यू एस में थी। सुमेद भी शायद वही …