मुनीर खान जलाल का मन आज उड़ते हवाई जहाज के आगे-आगे उड़ रहा था। उसे उम्मीद थी – सोलहों आने उम्मीद थी कि उसका खलीफात में शामिल होना अब निश्चित था। ढोलू शिव क …