सुंदरी कुंवर और इंद्राणी, कुंवर खम्मन सिंह ढोलू को चुनाव जीतने की योजना समझा रही थीं। राम चरन की सलाह पर जन्मेजय को बुलाया गया था, जो चुनाव की जिम्मेदारी संभालेगा। राम चरन, जन्मेजय से डरा हुआ था। कुंवर साहब ने किसान रैली आयोजित करने की योजना बनाई, जो किसानों को लाभान्वित करेगी।