नीमो की ढाणी लौट कर सोफी को बहुत अच्छा लगा था। उसे लगा था जैसे उसकी आत्मा हमेशा से ही इस नीमो की ढाणी में रह रही थी और अब उसका मन भी यहीं आ कर रच बस गया है …