राम चरन भाग बहत्तर

राम चरन भाग बहत्तर

बरसात के मौसम में जब मेहरौली भीग कर खड़ी हो जाती है तो मोर नाच-नाच कर उसका उत्साह दोगुना कर देते हैं। दर्शकों की बहुरंगी भीड़ को बैठने तक की जगह नहीं मिलती। स्टूडेंट से लेकर जाने-माने स्कौलर तक यहां हाजिरी लगाते हैं। सुंदरी का मन बहलाने के लिए राम चरन उसे ले कर इस मन...
राम चरन भाग बहत्तर

राम चरन भाग इकहत्तर

“प्रणाम पंडित जी!” राम चरन ने पंडित कमल किशोर के पैर छू कर प्रणाम किया था। पंडित कमल किशोर ने आंख उठा कर राम चरन को गौर से देखा था। कितना भला मानुष था – राम चरन, पंडित जी सोचते रहे थे। वो राम चरन के किए उपकार भूले न थे। और जो बंगला राम चरन ने उन्हें...
राम चरन भाग बहत्तर

राम चरन भाग सत्तर

“नहीं! श्याम चरन नहीं सुंदा!” राम चरन के स्वर बड़े ही कोमल थे। “बेटे का नाम रक्खेंगे शिव चरन!” वह मुसकुराया था। “ढोलू शिव की कृपा है जो हमें पुत्र रत्न प्राप्त हो रहा है।” वह गंभीर था। “शिव का सुमन शिव को अर्पित करते...
राम चरन भाग बहत्तर

राम चरन भाग उनहत्तर

“इन्हीं की कृपा से हम सी एम की कुर्सी पर बैठे हैं राजा साहब!” यू पी के चीफ मिनिस्टर प्रभाकर पारस विहंस कर बता रहे थे। “लियाकत मियां बड़े ही मिलनसार मनुष्य हैं!” उन्होंने लियाकत मियां को स्नेह सिक्त निगाहों से देखा था। “ये हमारी समता...
राम चरन भाग बहत्तर

राम चरन भाग अड़सठ

राम चरन लियाकत मियां के साथ उनकी बग्गी में बैठ लखनऊ शहर की सैर पर निकला था। आज पहला मौका था जब राम चरन अपनी खोजी निगाहें पसार स्वयं ही देख लेना चाहता था कि यहां इस्लाम के उत्कर्ष की क्या संभावना थी? लखनऊ शहर उत्तर प्रदेश की राजधानी था और कभी इस्लामी सभ्यता का प्रतीक...
राम चरन भाग बहत्तर

राम चरन भाग सड़सठ

लखनऊ ट्यूरिस्ट होटल के तिमंजिले की छत पर टहलते राम चरन ने निगाहें भर-भर कर शहर की अनुपम छटा को बड़े प्यार से देखा था। और तभी न जाने कैसे उसे देश के बंटवारे का बजता बिगुल सुनाई दिया था। हिन्दू मुसलमान साथ-साथ नहीं रह सकते यह तथ्य हवा पर उजागर हो चुका था। अंग्रेजी...