राम चरन भाग अठहत्तर

राम चरन भाग अठहत्तर

चिराग ऑडीटोरियम मुनीर खान जलाल जैसे ही आगंतुकों से खचाखच भरा था। दुनिया के हर कोने से खलीफाओं के नुमाइंदे पधारे थे। उन सब का एक ही उद्देश्य था – जिहादी इस्लाम! उस अंतिम जिहाद की रूपरेखा तय होनी थी जिसके बाद दुनिया में इस्लाम के सिवा और कोई धर्म न बचेगा। अचानक...
राम चरन भाग अठहत्तर

राम चरन भाग सतहत्तर

शगुफ्ता सोलंकी के लिए मुनीर खान जलाल एक कटी पतंग था। वह उसके बारे में उससे ज्यादा जानती थी। वह जानती थी कि सलमा मर चुकी थी और सुंदरी उसकी पत्नी नहीं एक प्लॉय थी। उसे पूरा-पूरा अनुमान था कि इस मिशन के पूरे होते ही मुनीर सत्ता के वो सोपान चढ़ेगा जिसका कोई हिसाब नहीं था।...
राम चरन भाग अठहत्तर

राम चरन भाग छिहत्तर

रूमी, शगुफ्ता सोलंकी और मंजूर अहमद इन तीनों के बीच अकेला स्टूडेंट था मुनीर खान जलाल, जिसे इन तीनों ने मिल कर राम चरन बनाया था। “आप को भूलना पड़ेगा कि आप इतने सीनियर ऑफीसर हो और मैं एक मामूली ट्रेनर हूँ।” रूमी ने जा कहा था आज एडमिरल मुनीर खान जलाल को सुनाई...
राम चरन भाग अठहत्तर

राम चरन भाग पचहत्तर

दुबई हवाई अड्डे पर प्लेन से उतरा था राम चरन और एक इशारा पा कर ओट में खड़े उस चार्टर्ड प्लेन में आ बैठा था। तब उसने खिड़की पर चढ़ते मंजूर अहमद को देख लिया था। उसी के पीछे-पीछे शगुफ्ता सोलंकी भी चढ़ कर चली आई थी। उन दोनों ने एक साथ राम चरन को देखा था और हाथ मिलाए थे।...
राम चरन भाग अठहत्तर

राम चरन भाग चौहत्तर

“दुबई इज सेकेंड होम ऑफ अस इंडियंस!” राम चरन दुबई जा रहा था तो सुंदरी को उसके बारे में बता रहा था। “हर कोई छोटा हो या बड़ा हो, अमीर हो या गरीब हो और चाहे टुच्चा हो या लुच्चा हो दुबई भाग रहा है।” हंस रहा था राम चरन। “तुम मानोगी नहीं सुंदा...
राम चरन भाग अठहत्तर

राम चरन भाग तिहत्तर

ढोलू एनक्लेव के एक नंबर बंगले के सामने कार रुकी थी। कार के सामने जो व्यक्ति खड़ा था उसे देख कर पंडित कमल किशोर दंग रह गए थे। “प्रहलाद तुम ..?” पंडित कमल किशोर ने उस व्यक्ति को गहक कर बांहों में भर लिया था। “आज – यहां .. इतने दिनों बाद ..”...