by Rachna Siwach | Jan 6, 2019 | Uncategorized
इस बात में कोई भी शक नहीं है, कि हमारी स्नो वाइट कानू हमारे इलाके में जितने भी पालतू कुत्ते हैं, उनमें सबसे सुन्दर और देखने में भी बहुत प्यारी और सबसे न्यारी है। हम अपनी कानू को प्यार से कभी सिंड्रेला बुलाते हैं, तो कभी स्नो वाइट। जब कानू हमारे साथ बाहर घूमने के लिये...
by Rachna Siwach | Jan 5, 2019 | Uncategorized
रामलालजी की बात चलते-चलते दर्शनाजी के मुहँ से निकल गया था,” एक बार रमेश ने पापे की लिखी हुई चिट्ठी गड्डी में पकड़ ली थी, उसमें लिखिया था..” तभी रमेश का वहाँ आना हुआ था,” के बोले से!” उसनें अपनी माँ से पूछा था.. “ कुछ ना बापू के बारे में बतान लाग री हूँ.. जब तन्ने...
by Rachna Siwach | Jan 5, 2019 | Uncategorized
सुनीता प्रहलाद को लेकर ऊपर कमरे में चली गई थी। पर सुनीता को सासु-माँ का बर्ताव बहुत ही अजीब और घटिया लगा था, जो कि पहले दिन से ही लग रहा था। घी, राशन और कपड़े जो सुनीता लाई थी, वो सभी चीजें देखकर बजाय खुश होने के.. कि” देखो! बहु कितने अच्छे घर से है, और लोग भी कितने...
by Rachna Siwach | Jan 4, 2019 | Uncategorized
सुनीता प्रहलाद के साथ अब मायके में ही रह गई थी, प्रहलाद की परवरिश नानी-नाना की देख-रेख में शुरू हो गई थी। गर्मियों के दिन थे, और प्रहलाद का पीलिया अब पूरी तरह से ठीक हो गया था। अब प्रहलाद का रंग पीले से लाल सा पड़ गया था, क्योंकि शिशु का इन्फेक्शन ख़त्म हो अब शरीर...
by Rachna Siwach | Jan 2, 2019 | Uncategorized
दर्शनाजी प्रहलाद को गोद में लेकर” मेरा जीतू! हाय! मेरा जीतू कहकर रोने लगीं थीं”। “इसने मुझे गोद दे देना आज से ये मेरा बेटा हो गया..हाय! जीतू!”। दर्शनाजी के बार-बार जीतू पुकारते हुए रोने पर अनिताजी ने उन्हें चुप कराते हुए पूछ ही लिया था,” दीदी! अपने आप को संभालिये, चुप...