by Rachna Siwach | Feb 12, 2019 | Uncategorized
रमेश और सुनीता प्रहलाद और नेहा संग सब इंदौर वापिस आ गए थे.. माँ-बापू ने सुनीता को हमेशा की तरह से काफ़ी सारी विदा देकर रमेश के साथ इंदौर भेज दिया था.. दर्शनाजी भी संग ही आईं थीं। “ भरत का सुन दी ही मेरी चीख निकली थी, मैंने सोचा था.. आप नहीं रहोगे”। रेल में साथ-साथ...
by Rachna Siwach | Feb 8, 2019 | Uncategorized
मुकेशजी और अन्य घर के सदस्य भरत को पास के ही श्मशानघाट लेकर गए थे.. भरत को जलाया नहीं दफनाया गया था.. क्योंकि वह अभी नन्हा शिशु था। घर में माहौल दुःखद था, जो होना ही था। घर के बड़े सुपुत्र होने का सुनीलजी ने बखूबी फ़र्ज़ अदा करते हुए.. उसी दिन रात को किसी को भी भूखा...
by Rachna Siwach | Feb 8, 2019 | Uncategorized
बार-बार कुछ पलों के लिये नीला होना भरत का.. केवल सुनीता ने ही देखा था। इसके बावजूद भरत का पेट भी फूल रहा था। सुनीता के कमरे में लगातार अस्पताल की नर्स राउंड लगाया करती तो थीं.. पर उनको भरत को लेकर यह बात किसी ने भी न बताई थी। बच्चे का पेट भी फुला हुआ था। दोनों बच्चों...
by Rachna Siwach | Feb 6, 2019 | Uncategorized
बबलू सुनीता को लेने एक बार फ़िर इंदौर आ गया था। ससुराल वालों का फ़र्ज़ अब मायके में पूरा होने जा रहा था.. कमाल की बात तो यह थी.. कि किसी ने भी फूटे मुहँ यह न बोला था,” अरे! नहीं! नहीं!.. प्रहलाद की ज़िम्मेदारी कर तो दी उन्होनें, अब ऐसे बार-बार अच्छा नहीं लगता है। इस...
by Rachna Siwach | Feb 6, 2019 | Uncategorized
रमेश की घटिया बक़वास सुनने के बाद अब बिना ही कुछ बोले सुनीता घबराई हुई सी ऊपर आ गई थी। सुनीता ने ऊपर कमरे में आते वक्त दर्शनाजी के चेहरे पर खिली हुई मुस्कुराहट देखी थी..जैसे कि कोई मोर्चा फतह कर लिया हो.. उनकी आँखों में जीत की खुशी थी। रमेश ने इतनी बदतमीज़ी और घटिया...