खानदान 105

खानदान 105

रामलाल विला में हर सदस्य का दिमाग़ अभी हिस्से को लेकर ही काम कर रहा था.. और घर का हरएक सदस्य जिसमें दर्शनाजी भी शामिल थीं.. रमेश को नियंत्रित करने के चक्कर में और कहीं अच्छी तरह से फ़साने के चककर में घूम रहा था.. ताकि एक हिस्सेदार हमेशा के लिये ख़त्म हो जाए.. और...
खानदान 105

खानदान 104

रमेश की कही हुई रंजना को लेकर बातें आगे विनीत, रमा और दर्शनाजी तक पहुँच रहीं थीं। इन लोगों को भी रमेश के ऐश आराम से बहुत दिक्कत आ रही थी। सुनीता को भी रमेश का रंजना के साथ यूँ घूमना-फिरना पसन्द नहीं आ रहा था.. जो कि उसे शुरू से ही नहीं आता था। अब तो सुनीता ने पूरे घर...
खानदान 105

खानदान 103

गाड़ी का क़िस्सा अभी यहीँ ख़त्म नहीं हुआ था.. अब इस गाड़ी के किस्से को घर में मुद्दा बना लिया गया था। “ मन्ने तो लागे से झूठ बोले से यो! बक़वास करे है! किते न दिये होंगें इसने साढ़े-चार लाख!”। दर्शनाजी और रमेश में अब थाने में दिये हुए, पैसों को लेकर मीटिंग शुरू हो गई...
खानदान 105

खानदान 102

“ तेरे बाप ने कमाए थे, क्या…???” रमेश को विनीत साढ़े-चार लाख सफ़ारी के देकर घर लेकर आ गया था,  अब क्योंकि रमेश के लिये पैसे फैक्ट्री से निकले थे.. तो घर में तो हंगामा होना ही था। रामलालजी तो दुनिया में अब रहे नहीं थे, बटवारा कोई भी वो करके नहीं गए थे.. इसलिये...
खानदान 105

खानदान 101

सुनीता और दर्शनाजी विनीत की दस-लाख वाली बात सुनकर अभी वहीं खड़े थे। “ अगर आपको मेरे गहनों की ज़रूरत पड़े तो मुझे बता देना!”। सुनीता ने दर्शनाजी से कहा था। “ एक बार विनीत ने घरां आ लेन दे! दखां! के बात बनी से!”। इंतेज़ार ख़त्म हो जाता है.. और विनीत घर आ जाता है। “ घणी...