खानदान 107

खानदान 107

रमेश काफ़ी देर से घर आने लगा था.. सुनीता को डर के मारे बुरी तरह से चिन्ता हो जाया करती थी.. परिवार में और कोई भी साथ देने वाला नहीं था.. सभी मज़े लेने वाले दर्शक थे। इसी तरह के तमाशों के चलते एक बार रमेश पूरे दो दिन  बाद घर में दाख़िल हुआ.. सुनीता का ग़ुस्सा काबू...
समय निकल गया उड़ते-उड़ते

समय निकल गया उड़ते-उड़ते

कुछ तुमसे कहूँ कुछ तुम सुनोगी अब क्या कहूँ मैं तुम क्या सुनोगी बचपन निकल गया उड़ते-उड़ते जवानी तुम संग खेले खाए फ़िर वो निकल गई उड़ते-उड़ते ब्याह दिया माँ परदेस में मुझको तुम्हारा साथ छूट गया चलते-चलते गिने दिनों में छोड़ गईं तुम तुमसे माँ का रिश्ता ख़त्म हो गया...
मधुर मिलन कानू से

मधुर मिलन कानू से

तुमसे मिलके ऐसा लगा तुमसे मिलके अरमां हुए पूरे दिल के सचमुच बहुत ही प्यारा सा गीत है.. और जिस फ़िल्म का यह गीत है, यानी के परिंदा.. अपने ज़माने की मशहूर फ़िल्म हुआ करती थी। यह फ़िल्म हम भी अपने पतिदेव के साथ सिनेमा हॉल में देखने गए थे.. और हमें भी बेहद पसन्द आई थी। पर...
बाबुल की विदाई

बाबुल की विदाई

“ जी पिताजी! आप भी अपना ध्यान रखना!” “ मैं आपके लिये ईश्वर से प्रार्थना करूँगी!”। बस! इतनी सी बात करने पर ही मेरी आँखें आँसुओं से भर गईं थीं.. और पिताजी के आगे मै अपनी भावनाओं को रोक नहीं पाई थी। हालाँकि भाईसाहब के साथ पिताजी से मिलने जाते वक्त मैं अपने आप को समझाकर...
खानदान 107

खानदान 106

रमेश ने अपनी पैसों की ज़रूरत को पूरा करने के लिये.. दहेज में दी हुई, मुकेशजी की गाड़ी का सौदा कर दिया था.. गाड़ी बेचने से रमेश के पास अच्छे-ख़ासे पैसे आ गए थे। सीधी भोली सुनीता एक बार फ़िर से बेवकूफ़ बन गई थी। गाड़ी बेचने के लिये.. रमेश ने सुनीता से ही गाड़ी के...