by Rachna Siwach | May 17, 2019 | Uncategorized
” अरे! अन्दर क्यों नहीं करा दिया था.. ये तो वो का वही है!” पिता के हंगामे पर प्रहलाद चिल्ला कर बोला था। सारी रात रमेश ने अपने कमरे में हिस्से और पैसे लेकर हंगामा जारी रखा था। इतना ज़बरदस्त हंगामा देख.. दोनों बच्चे परेशान हो कर घबरा गए थे.. और प्रहलाद ने...
by Rachna Siwach | May 17, 2019 | Uncategorized
जैसे ही रमेश के मुहँ से यह बात निकली थी.. कि रामलालजी को विनीत ने मार डाला.. दर्शनाजी एकदम चुप-चाप बैठीं रहीं थीं। बात रंजना से हटकर अब बटवारे पर आ गई थी.. रमेश पुलिस वालों के सामने अपनी पर आने ही वाला था.. कि एकबार फ़िर विनीत ने बात का रुख घुमा दिया था। बात...
by Rachna Siwach | May 16, 2019 | Uncategorized
” हम्म! यो..!! यो हमारे पेै पाई भी कोनी ले सकदा..!!” दर्शनाजी बड़बड़ाती घूम रहीं थीं.. सुनीता वहीं थी। ” कर लेन दे! माँ-बेटियाँ ने कोशिश कुछ भी कोनी दें हम!”। दर्शनाजी की बातों से साफ़-साफ़ ज़ाहिर हो रहा था.. कि रमेश को हिस्सा मिलना मुश्किल है।...
by Rachna Siwach | May 14, 2019 | Uncategorized
” पन्द्रह बीस हज़ार रुपियाँ का खर्चा सै! गड्डी ठीक हो जागी!”। रमेश यह राग की पंद्रह से बीस हज़ार तक में पोलो गाड़ी ठीक हो जाइयेगी.. दर्शनाजी और विनीत के आगे गाता फ़िर रहा था। पर इस गाड़ी के राग को अलापने का कोई भी फ़ायदा नज़र नहीं आ रहा था। विनीत इस बार...
by Rachna Siwach | May 14, 2019 | Uncategorized
वक्त का पहिया घूमता ही चला गया.. मैं बचपन से बडी हो गई.. और आज अपने जीवन से सीख लेते हुए.. एक मोड़ पर आ खड़ी हुई हूँ.. अकेली नहीं खड़ी हूँ.. मेरी परछाई यानी के अपने दो बच्चों के साथ हूँ। पीछे मुड़कर देखना अच्छा लगता है.. अपने परिवार में राजसी ठाठ में बचपन बिताया...