राम चरन भाग एक सौ बयालीस

राम चरन भाग एक सौ बयालीस

“कुंवर साहब चाहते हैं कि जवानों की तरह किसानों को भी हम वो सुविधाएं दें जो ..” राम चरन ने रुक कर जनरल फ्रामरोज के चेहरे को पढ़ा था। “छह महीने के बाद चुनाव हैं।” राम चरन ने सूचना दी थी। “चुनावों से पहले ..!” राम चरन तनिक सा मुसकुराया...
राम चरन भाग एक सौ बयालीस

राम चरन भाग एक सौ इकतालीस

राम चरन पागल हो गया था। वह अपनी सुध बुध भूल गया था। उसे केवल और केवल याद था – काशी। वो देख रहा था – पर्ण कुटीर में अकेली बैठी संघमित्रा। जो उसके आने का इंतजार कर रही थी। वो संघमित्रा जो एक प्रेमिका की तरह से पुकार रही थी। एक लंबी थकाने वाली, पगलाने वाली...
राम चरन भाग एक सौ बयालीस

राम चरन भाग एक सौ चालीस

एस एस कोड पहुंच गया था। ठीक छह माह बाद जिहाद की जंग का ऐलान होना था। एक साथ पूरी दुनिया में धमाका होना था। आइडिया था कि कोई भी देश किसी की मदद करने के लिए ठाली न छोड़ा जाए। हर आदमी की चौखट पर एक ही समय में जंग रुप जाए। हर कोई अपनी-अपनी जंग लड़े और मारा जाए। “जीत...
राम चरन भाग एक सौ बयालीस

राम चरन भाग एक सौ उनतालीस

“आप के पसंदीदा चॉकलेट भेजे थे, मिल गए न?” जुनैद का अमेरिका से फोन था। “मिल गए!” राम चरन ने उत्तर दिया था। वह जानता था कि भेजे हथियारों की पुष्टि कर रहा था जुनैद। “थैंक्स एनीवे।” राम चरन की आवाज में दंभ था, दर्प था, उल्लास था और था...
राम चरन भाग एक सौ बयालीस

राम चरन भाग एक सौ अड़तीस

अपने एकांत में प्रसन्न बैठे राम चरन को अचानक निजाम हैदराबाद की सत्ता, शासन और साहस याद हो आए थे। “इनसे मिलिए जनाब।” सज्जाद मियां ने राम चरन का परिचय कराया था। “आप हैं प्रकाश पंडित।” उसने उस धुले मंजे से आदमी से मिलाया था जो कि विद्वान लग रहा...