by Major Krapal Verma | May 8, 2025 | रजिया
अचानक ही ब्लाडी बोस्टक सजने लगा था, और चहल-पहल बढ़ गई थी। बाजे, नगाड़े और अनेक-अनेक प्रकार के प्रयोजन होने लगे थे। हवा का रुख ही बदल गया था। माइक ने अनुमान लगाया था कि जालिम आने वाला था। और जब पत्रकार और अखबार नवीसों को आदेश मिले थे कि वो कल चार बजे तक शहर में बाहर न...
by Major Krapal Verma | Apr 30, 2025 | रजिया
बरनी लखनऊ से लौट आया था। स्काई लार्क में जैसे कोई बम विस्फोट हुआ हो – ऐसा लग रहा था। “द ब्लडी इंडियंस, दे आर नॉट ट्रस्ट वर्दी।” बरनी कहता फिर रहा था। वह अभी राहुल से नाराज था। “ये बिगाड़ेगा काम को। नहीं चलने देगा मिशन को।” बरनी ऊल-जलूल...
by Major Krapal Verma | Apr 26, 2025 | रजिया
सोफी ने पानी भरती मां सा को चुपके से, दबे पांव पास आ कर बाँहों में भर लिया था। मां सा को बमकते, चिल्लाते और ललकारते सभी नीमो की ढाणी के लोगों ने देखा था। सब ठठा कर हंस रहे थे। अचानक ही राहुल को सामने आया देख मां सा की समझ में खेल आ गया था। वह अपने शरारती बेटे को खूब...
by Major Krapal Verma | Apr 24, 2025 | रजिया
सुबह की फ्लाइट से माइक मास्काे पहुँचा था। सबसे पहला काम उसने किया था – अपना नया नाम राेज ग्रांट रखा लिया था। इस अभियान के लिए ये उसका नया अवतार था। पहली बार उसने मास्काे शहर काे देखा था। उसे याद हाे आया था कि कभी मास्काे साेवियत संघ की राजधानी थी। साेवियत संघ जब...
by Major Krapal Verma | Apr 20, 2025 | रजिया
“मजनूं महल वाॅज ए हैल।” लैरी ने अपना अनुभव बरनी काे बताया था। “मैं ताे पागल हाेने काे था सर।” उसने अपने दाेनाें हाथ हवा में फेंके थे। “ऐसा क्या था यार? मुझे ताे बताया था कि वाे ..” बरनी सनाका खा गया था। “बिगड़ गया काम?”...