by Major Krapal Verma | Mar 6, 2024 | राम चरण
“लो आज तक का हिसाब” कालू ने जेब से नोट निकाल भोंदू को थमाए थे। “कल से मत आना!” उसने आदेश दिया था। “काम बंद कर रहे हैं।” भोंदू ने भौचक आंखों से कालू को देखा था। जी तोड़ काम के बदले पेट भर खाना मिलता था और महीने में छोटी मोटी पगार पा...
by Major Krapal Verma | Mar 5, 2024 | राम चरण
कालू सूनी-सूनी निगाहों से सामने पसरे खाली मैदान को एक टक देख रहा था। मद्दी चल रही थी। कोई गहमागहमी न थी। किसी तरह की मारा-मारी भी न थी। ग्राहकों का अकाल पड़ रहा था। भोंदू खाली बैठा ऊंघ रहा था। कालू ही था जिसकी आंखों में नींद नहीं चिंता डोल रही थी। कई बार सोचा था कि...
by Major Krapal Verma | Mar 4, 2024 | राम चरण
सुनहरी लेक कॉम्पलैक्स के आलीशान ऑफिस में राम चरन अकेला बैठा था। ऑफिस एक दम मॉडर्न बना था। व्यापार की हर सुख सुविधा का ध्यान रख कर ही ऑफिस तैयार हुआ था। ऑफिस के बोर्ड पर सुनहरी लेक कॉम्पलैक्स का नक्शा टंगा था। राम चरन को नजर उठाते ही सब कुछ दिखाई दे जाता था। बाहर...
by Major Krapal Verma | Mar 3, 2024 | राम चरण
आने वाले इतवार को सुनहरी लेक कॉम्पलैक्स के उद्घाटन होने की उद्घोषणा हुई थी। समारोह को संपन्न करने की जिम्मेदारी सुंदरी और राम चरन की थी। इंद्राणी ने चीफ गैस्ट होना था, तो कुंवर साहब की उपस्थिति अनिवार्य थी। बाकी सब तो फेमस और डाई हार्ड आने थे। मुख्यतया तो कैपिटलिस्ट,...
by Major Krapal Verma | Mar 2, 2024 | राम चरण
राम चरन अकेला था। सुंदरी सात सतियों की समाधि पर जल चढ़ाने चली गई थी। अचानक ही राम चरन सतियों के बारे में सोचने लगा था। सती होना, पतिव्रता होना और एक पुरुष के नाम पर ही जीवन जीना हिंदू स्त्रियों का आभूषण माना जाता था। सुंदरी भी एक हिंदू स्त्री थी। वह विधवा थी। फिर वह...