by Major Krapal Verma | Apr 1, 2024 | राम चरण
दुबई लौट कर राम चरन को लगा था जैसे वह जहन्नुम से भाग जन्नत में पहुंच गया था। एक खतरनाक सोच था – सब को तबाह कर खलीफात कायम करना। न जाने क्यों आज वह इस सोच को छूना तक न चाहता था। वह चाहता था कि अगर वो सुबह-सुबह का देखा स्वप्न सच हो जाए तो ..? कहते तो हैं कि सुबह...
by Major Krapal Verma | Mar 29, 2024 | राम चरण
सब कुछ वही था। द्वीप के चारों ओर समुंदर के विस्तार बिखरे थे। सघन वन से आच्छादित द्वीप दुलहन जैसा लग रहा था। सतरंगी रोशनी ने हर दिशा को सजा दिया था। आसमान पर आज नए सितारे चमक रहे थे। नया उल्लास था, नई उमंगें थीं और इस्लाम का परचम पूरे विश्व पर फहरा रहा था। मुनीर खान...
by Major Krapal Verma | Mar 27, 2024 | राम चरण
चिराग ऑडीटोरियम आगंतुकों से खचाखच भरा था। प्रशांत खामोशी थी। वही आवाज लौटी थी। “केवल और केवल कोरे कागज पर ही लिखी जा सकती है कोई इबारत! कच्ची उम्र में ही हम इन्हें अपने उसूल समझा सकते हैं। एक बार पच्चीस पार होने पर आदमी अच्छा बुरा पहचानने लगता है। उसके लिए अलग...