by Major Krapal Verma | May 8, 2024 | राम चरण
आज इतवार था। फिर भी राम चरन की नींद जल्दी खुल गई थी। सुंदरी ने तो ग्यारह बजे तक सोना था। भाभी जी की पूजा की जलती अगर बत्तियों की महक आ रही थी। राम चरन को याद था कि उसे आज राम लीला मैदान जाना था। क्रांति वीरों का हिंदू राष्ट्र स्थापित करने का उद्घोष होना था। पूरे...
by Major Krapal Verma | May 6, 2024 | राम चरण
“मिलिए! राम चरन!” पंडित कमल किशोर ने आचार्य प्रहलाद का परिचय कराया था। उन्हें अपना वायदा याद था। “और आप हैं – काशी संस्कृत विद्यापीठ के आचार्य प्रहलाद!” तनिक मुसकुराए थे पंडित कमल किशोर। “मेरे सहपाठी हैं।” उन्होंने स्पष्ट किया...
by Major Krapal Verma | May 5, 2024 | राम चरण
“सलमा की तरह सुंदरी भी तो सेकिंड हैंड है। महेंद्र की विधवा है। राहगीर राम चरन को पकड़ा था और शादी कर ली। एक बेटा शिव चरन बड़ा हो रहा है तो दूसरा श्याम चरन इज ऑन द वे। और तुम ..? राम चरन ढोलुओं का नौकर!” खाली-खाली निगाहों से खुले आसमान को देखा था –...