स्वामी अनेकानंद भाग 28

स्वामी अनेकानंद भाग 28

आनंद अकेला होटल के कमरे की भव्यता को निहार रहा था – सराह रहा था। उसे अचानक एहसास हुआ था कि वो बंद कमरा कदम की चिड़िया का पिंजरा जैसा ही था। उसमें कदम की चिड़िया बंद रहती थी तो इसमें राम लाल की चिड़िया बंद थी। अब आनंद को बंबई के बाहर होते दंगो-पंगों से कुछ लेना...
स्वामी अनेकानंद भाग 28

स्वामी अनेकानंद भाग 26

मानस माधव इंटरनैशनल, पांच सितारा होटल लकदक रोशनी में नहाया खड़ा था। बैंड बाजा बज रहा था। प्रेस के लोग पहुंच गए थे। भीड़ जुड़ती जा रही थी। स्वामी अनेकानंद के आने का इंतजार था। तभी एक लंबी चौड़ी विदेशी कार आती दिखी थी। स्वामी जी आ रहे थे। कार धीमी रफ्तार पर चल रही थी।...
स्वामी अनेकानंद भाग 28

स्वामी अनेकानंद भाग 27

बर्फी उस समूची रात सो नहीं पाई थी। राम लाल और आनंद नहीं लौटे थे। लौटा था एक पैगाम – उड़ गया पंछी पिंजरा तोड़ के। राम लाल मर्द तो था पर उसका मन मीत न था। जेठवा के बाद उसे कोई मन मीत मिला ही नहीं। लाश रह गई थी वह जेठवा के मरने के बाद। जेठवा याद आते ही अचानक आनंद...