स्वामी अनेकानंद भाग 48

स्वामी अनेकानंद भाग 48

अचानक ही विभूति मकीन को एक शक ने आ घेरा था। वह भारत आई थी किसी पहुंचे हुए तपस्वी की तलाश में जो हर प्रकार के रोग भोग ठीक करता था और बदले में कुछ न लेता था। एक ऐसे स्वामी की कल्पना उसके मन में आई थी जो हिमालय की कंदराओं में तप करके लौटा था और अब जन कल्याण के काम में...
स्वामी अनेकानंद भाग 48

स्वामी अनेकानंद भाग 47

प्रतिष्ठा लौटी थी बंबई तो सीता देवी उसे बांहों में भर कर खूब रोई थीं। बहुत देर तक रोती रही थीं। एक बेटा न होने का गम उन्हें खाए जा रहा था। वह जानती थीं कि बबलू के मुकाबले प्रतिष्ठा टिक न पाएगी। चुनावी दर्पण में उन्हें अपनी हार साफ-साफ दिख रही थी। “जाने दो...
स्वामी अनेकानंद भाग 48

स्वामी अनेकानंद भाग 46

बंबई के क्षितिज पर नारी शक्ति का नया-नया सूरज उग आया था। बबलू और पल्लवी ने नारी शक्ति अभियान को जान लड़ा कर चलाया था। उन्हें विश्वास था कि अगर नारी शक्ति अभियान जड़ें पकड़ गया तो पार्टी का कल्याण हो जाना था। नारी समाज का सही मायनों में आधा हिस्सा थी। अगर नारी समाज...