स्वामी अनेकानंद भाग 30

स्वामी अनेकानंद भाग 30

बंगले के द्वार पर पड़े अखबार को बर्फी ने बे मन एक बेगार मानते हुए उठाया था। आनंद के जाने के बाद अब वहां कौन था जिसे अंग्रेजी का अखबार पढ़ना था। लेकिन अखबार लगा लिया था तो अब रोज आ रहा था। बर्फी ने अखबार को बंद करने का निर्णय ले लिया था। लेकिन जैसे ही उसकी निगाह अखबार...
स्वामी अनेकानंद भाग 30

स्वामी अनेकानंद भाग 29

बंबई शहर के ऊपर अचानक ही चुनावों का बुखार चढ़ गया था। चुनाव लड़ने के लिए सूरमाओं का चुनाव होने लगा था। नए पुरानों का नाम और काम सामने आने लगा था। पिछले पांच सालों में किसने क्या-क्या किया लोगों के बीच चर्चा चल पड़ी थी। किसे टिकिट मिलेगी और कौन किनारे लग जाएगा खुल कर...
स्वामी अनेकानंद भाग 30

स्वामी अनेकानंद भाग 28

आनंद अकेला होटल के कमरे की भव्यता को निहार रहा था – सराह रहा था। उसे अचानक एहसास हुआ था कि वो बंद कमरा कदम की चिड़िया का पिंजरा जैसा ही था। उसमें कदम की चिड़िया बंद रहती थी तो इसमें राम लाल की चिड़िया बंद थी। अब आनंद को बंबई के बाहर होते दंगो-पंगों से कुछ लेना...