by Major Krapal Verma | Feb 3, 2026 | स्वामी अनेकानंद
सतत प्रयत्न करने के बाद भी मानस प्रतिष्ठा की बंबई लौटने की जिद को तोड़ नहीं पाया था। राधू रंगीला निठल्ला बैठा गूलर खा रहा था तो पूरा हुस्न परी फिल्म का क्रू मातम मना रहा था। चलता काम रुक गया था। राधू की रिद्म टूट रही थी। वह बेकल हुआ बैठा था। “अगर तुम बंबई चली...
by Major Krapal Verma | Feb 3, 2026 | स्वामी अनेकानंद
प्रतिष्ठा ने पहली बार अपनी मां सीता देवी को यों बिफर कर रोते सुना था। खून सूख गया था प्रतिष्ठा का। ऐसी कौन सी मजबूरी आन पड़ी थी और कौन कारण हो सकता था कि मां यों हिलकियां ले-ले कर रो पड़ी थीं। ऐसा क्या था कि बाबू जी का आभा मंडल उन्हें बचा न पा रहा था। वो कौन था जो...
by Major Krapal Verma | Feb 2, 2026 | स्वामी अनेकानंद
“क्यों न हम भी एक वूमन सैल खोल दें बबलू भैया?” धूमिल दूर की कौड़ी लाया था। “मैंने भी महसूस किया है कि क्यों न हम भी नारी शक्ति का पॉलिटिक्स में प्रयोग करें?” उसका प्रश्न था। बबलू धूमिल को बड़ी देर तक देखता रहा था। जो धूमिल कह रहा था उसमें बबलू...