by Major Krapal Verma | Mar 14, 2026 | स्वामी अनेकानंद
सत रंगी के लिखे प्रेम गीत को पूरन लाल की बनाई धुन और भ्रमर की आवाज ने एक तूफान की तरह फिजा पर टांग दिया था। एकांत में बैठ राधू रंगीला ने इस प्रेम गीत को कई बार सुना था – बार-बार सुना था और गीत की लोकेशन सैट करने में उसे लंबा समय लगा था। अब इस प्रेम गीत को...
by Major Krapal Verma | Mar 13, 2026 | स्वामी अनेकानंद
कल्लू ने महसूस किया था कि वो आज कल जमीन पर नहीं कांटों की सेज पर सोता था। आनंद के जाने के बाद गुरु को जैसे रोग लग गया था। कब आएगा आनंद – आम प्रश्न था जो गुरु दिन में दो चार बार पूछ लेते थे। सच था। अगर आनंद न लौटा तो सवा सत्यानाश था। कब तक उल्लू बनाते लोगों को?...
by Major Krapal Verma | Mar 7, 2026 | स्वामी अनेकानंद
तोचीगढ़ से बंबई आ कर वो स्वामी अनेकानंद बना। लगा – उसका पुनर्जन्म हुआ। लेकिन आज वो फिर तोचीगढ़ लौट रहा था। लग रहा था जैसे वो अपने पूर्व जन्म से मिलने जा रहा था जहां अब उसकी बीमार मां उसके इंतजार में आखिरी सांसें गिन रही थीं। और उसका छोटा भाई बिल्लू उसके आने के...