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मोदी पी एम् बन कर दिल्ली जा रहा था ?

संसद भवन

महान पुरुषों के पूर्वापर की चर्चा !

भोर का तारा -नरेन्द्र मोदी .

उपन्यास -अंश :-

“ऐसा क्या है , जो हम से नहीं हुआ ….? क्या है – जो हमने नहीं किया …? और वो क्या है ….जो हमें अब करना चाहिए ….?” आला कमान की आवाज़ में दर्प था . प्रश्न थे -सही,सटीक …और ये सच्चे प्रश्न थे ….? “आप लोग अनाडी नहीं हैं ….? आप लोग पार्टी की मांग जानते हैं …? आप लोग अगर चाहें तो ….?” आला कमान की निगाहें उठीं थीं ….और उन्होंने अपने समर्थकों के चहरे पढ़े थे . “वह कहता है ,’कांग्रेस मुक्त -गुजरात ‘ …..और कल को कहेगा ,’कांग्रेस मुक्त -भारत ?” एक चुप्पी कई पलों तक छाई रही थी . “आप क्या चाहते हैं ….?” उन्होंने उत्तर माँगा था .

“मोदी मुक्त -गुजरात !!” संजीव भट्ट की आवाज़ गूंजी थी . “स्वेता भट्ट को …आप टिकिट दें ! मोदी जहाँ से भी चुनाव लडेगा ….स्वेता वहीँ से लड़ेगी ? और मैं वायदा करता हूँ कि …मोदी चुनाव हारेगा ….!!” उस ने एलान किया था .

“टिकिट मिल जाएगी …!” उधर से भी एलान हुआ था . “और किस को क्या चाहिए ….?” उन का दूसरा प्रश्न था .

“आप ….मेरा मतलब कि ….आप ..चुनाव में स्वयं …मैदान में आएं …?” शक्ति सिंह गुहिल की मांग थी . “अगर मनमोहन जी ….और राहुल जी भी …चुनाव -प्रचार में भाग लें …तो हम शर्तिया …मोदी को गुजरात से भगाने में सफल होंगे ….?” उस ने भी एलान किया था .

“हो जाएगा ….!!” तुरंत ही उत्तर आया था . “और क्या होगा ….?” अब की बार हाई कमान की निगाहें तरुण तेजपाल …और उन की टीम के अनिरुद्ध बहल पर जा टिकीं थीं . एक उल्हाना था -उन निगाहों में …?

२००१में …बाजपाई सरकार को बदनाम करने के बाद …और २००४ में कांग्रेस की सरकार को बहाल करने के बाद …’तहलका’ ज्यादा कुछ न कर पाया था …? करता भी तो क्या ….? २००२ में ही तो इस मोदी को …मिटाने के लिए …’गोधरा’ का गोधन धरा था …? लेकिन …उस धधकते ..ज्वालामुखी के मुंह से बाहर कूद …और रचे लाक्षाग्रह को ..तोड़ कर …भागा ये बागी सरदार …मोदी …आज तक भी जिन्दा था …?

“शिव को जहर पी कर पचाते सुना था ….पर इस तरह …छोड़े राम-बाण को सीने पर ओट …अब दिल्ली को डराता ..ये अदना-सा मोदी ….पहली बार ही दिखाई दिया है …?” अनिरुद्ध कहता रहा था . “गुरु …! कुछ तो करें …. ?” वह बुदबुदा रहा था .

“कुछ करते हैं ….!” तरुण तेजपाल ने माथे का पसीना पौंछा था . “जासूसी ‘काण्ड’ …!!” शब्द उन के होठों से बाहर आए थे .

“करो ….! रोका किस ने है …? एक स्त्री की ….लाज का प्रश्न है …? सारे समुदाय आप के साथ हैं …? और जो …चाहें ….सो …..?” उन का इशारा था . “हमारे हित में …अभी तक कोई फैसला नहीं आया …?” आला कमान ने निगाहें घुमाईं थीं . उपस्थित आला कानूनविद …जिन्हें पार्टी ने उपकृत किया था , इनाम-इकरार दिए थे …और पद-प्रतिष्ठा दे कर निहाल किया था – तनिक तिलमिलाए थे …? उन्हें भी एहसास हुआ था कि …अभी तक ‘मोदी’ नाम की चिड़िया …किसी भी फंदे में न फंसी थी …और चहक रही थी – स्वतंत्र ….? “क्या ऐसा कोई कानून नहीं जो …..इस तरह के हत्यारों को सज़ा दे …? एक अदना-सा आदमी …आप सब को अंगूठा दिखा रहा है …? हम तो मानते थे …कि …क़ानून …..?”

“क़ानून क्या करे ….कोई सबूत ही नहीं मिलता ….?” आफ्ताव आलम बोले थे . “हर बार …कोई न कोई चूक हो जाती है …?” उन्होंने सर धुना था . “मैंने तो तीस्ता को फ्री कर दिया है …और ….”

“सब मिल कर घेरें ….इसे …तो ही काम चलेगा ….?” आला कमान ने आदेश दिए थे . “इस चुनाव में …दूध -का-दूध …और पानी -का-पानी ……” घोषणा थी – उन की .

अब बुद्धिजीवियों का और पत्रकारों का जमघट हाई कमान को घेरे खड़ा था !

“कहते हैं कि …बी जे पी की १३० सीटें आएंगी ….! और आप की …..?”

“अफवाहें फैलाने को किस ने कहा है, आप से ….?” आला कमान ने नाराज हो कर पूछा था . “आप लोग ही उल्टे प्रश्न पूछेंगे …तो पार्टी कैसे जीतेगी …?” उन का प्रश्न था .”हमने आप को क्या नहीं दिया ….कब नहीं दिया …..और आगे देने से भी तो हमने ना नहीं की है …? कुछ ढंग का लिखें ….? पार्टी के बारे ….” उन का आग्रह था . “और आपके लोग ….?” उन्होंने साथ बैठे जावेद अख्तर को घूरा था . “कुछ तो करो …?” हाई कमान का आग्रह था . “रोना-पीटना भी बंद कर दिया ….आप लोगों ने ….?” हाई कमान का उल्हाना था .

समूह में बैठे लोग जानते थे – कि किस-किस को उपाधियाँ मिलीं थीं …पुरूस्कार मिले थे ….और पदवियां हासिल हुईं थीं …? कांग्रेस पार्टी ने तो सब को निहाल किया हुआ था ! अब इन की बारी थी -पार्टी का कर्जा चुकाने की …?

“हम तो जी-जांन से लड़ेंगे ….पार्टी के लिए ….!” एक समवेत स्वर गूंजा था ……..और फिर हाई कमान की जय-जयकार कर चलता बना था .

लेकिन न जाने कैसे आती उस अकेली आशा -किरण को …मात्र मोदी की परछाईं ने ढांप दिया था …? कहीं से आ एक मोदी खौफ ..दिमाग में बैठ गया था …और इस का उपाय अभी तक न मिला था …?

मोदी के नाम की चर्चा जोरों से चल पड़ी थी ! न चाहते हुए भी हवा का रुख मुड़ता ही चला जा रहा था …? ‘मोदी’ ….’दिल्ली’ जैसी आवाजें थीं …जो हवा के भी कान फाड़े दे रहीं थीं ….? और कमाल ही था कि रचे चक्रव्यूह को ..फाड़ कर …’मोदी’ …एक अदना -सा आदमी ..आकार ग्रहण करता ही चला जा रहा था ….?

“कहते हैं – मोदी इज ए …क्रूड बोंब …?” अमित हंसा था . “कुछ का कहना है – गंवार है …देहाती है …? तो कुछ कहते हैं – गुजराती ….गज्जू भाई है ? गप्पें मारते हैं …गुजराती में ….और लोग खुश हो कर घर चले जाते हैं …? आता-जाता कुछ नहीं , भाई को ….?”

“बात क्या है …?” मैंने बड़े ही प्रेम से पूछा था .

“बात ये है …कि ….” अमित ने मुझे ऊपर से नीचे तक देखा था . “एक पी एम् को क्या होना चाहिए ….?”

“भला आदमी ….!” मैंने सहज स्वभाव में उत्तर दिया था .

“हा हा हा …..!!” अमित जोरों से हंसा था . “हो हो हो ….!!” वह हँसता ही जा रहा था .

ना जाने मैंने ऐसा क्या कह दिया था – मैं सोच में पड गया था !

“एक भला आदमी ….?” वह फिर से बोला था . “और अगर बुरा आदमी पी एम् बन गया तो ….?”

“बात क्या है,भाई ….?” मैंने तनिक नाराज होते हुए पूछा था .

“बात ये …कि …आज ही से …पी एम् बनने की तैयारी …का सूत्र-पात …!” उस ने बात को सिरे से पकड़ा था . “कल की सभा में …भाषण हिंदी में होगा ….?” उस ने बात स्पष्ट की थी . “फिर बंबई जा रहे हो – भाषण अंग्रेजी में होगा …?” उस ने अगली हिदायत भी दी थी . “क्यों की …भारत के पी एम् को ये दोनों ही भाषाएँ आनी चाहिए ….?” वह गंभीर था . “और जो भी …आज के बाद …आप के हाव-भाव ..बोल-चाल ….एक्शन-रिएक्शन होंगे ….एक भारत के पी एम् की तरह … होंगे …?” अमित की आवाज़ में आदेश थे .

“आज्ञा …शिरोधार्य है , अनुज ….!!” मैंने विनम्र होते हुए कहा था .

“कल की …सभा में …परोक्ष रूप से कह देना है …कि …’दिल्ली आ रहे हैं, हम ‘ !!”

“कह दूंगा …!” मैंने वायदा किया था .

“और हाँ ! दिल्ली में भी पार्टी में चर्चा चल पड़ी है …? कुछ लोगों को बुखार चढ़ गया है …तो कुछ लोगों की बांछें खिल गईं हैं …! ” अमित बता रहा था . “कोब्रा और गुलेल भी …हो लिए …? फैक दी …संजीव भट्ट की फ़ाइल …?” एक महत्व पूर्ण सूचना दी थी, अमित ने .

एक राहत की सांस लौटी थी ! मैंने अमित का आभार माना था . चरित्र हनन की छेडी कांग्रेस की मुहीम … घातक थी . मैं किसी भी तरह से महिलाओं के मुकाबले न आना चाहता था …?

“तीस लाख युवक प्रान्त में …बे-रोजगार घूम रहे हैं …? किसान भूखा मर रहा है …? मजदूर के लिए रोटी नहीं …? फिर गुजरात में विकास कहाँ हुआ …?” राहुल गाँधी जन-सभा में खड़े हो कर पूछ रहे थे .

युवा कांग्रेस ने पूरी सामर्थ झोंक दी थी ..! राहुल गाँधी का भाषण सुनने के लिए …युवकों को इकट्ठा किया गया था …! कांग्रेस का आरोप था कि मोदी ने इन युवकों को बहका लिया है …? तभी मोदी हर बार का चुनाव जीत जाता है …?

“अल्पेश जी …! आप जैसे ही तो ये युवक हैं ….जो ..बे-रोजगार हैं …? हार्दिक जी ! आप ही सोचिए कि …अगर गुजरात का युवक …बे-कार घूम रहा है …तो …मोदी जी ने विकास क्या किया …?” बात घूम-फिर कर वहीं आ गई थी . “राहुल गांधी ….? जिन्दा बाद ….!! राहुल तुम संघर्ष करो ….! हम तुम्हारे साथ हैं ….!!!” नारे गूंजते रहे थे .

“सीधी टक्कर …अब ..’गांधियों’ से है, भाई जी …?” अमित शाह बता रहे थे . “मोती लाल नेहरू से ले कर राजीव गाँधी तक …सब को लाईन में खड़ा कर दिया है – कांग्रेस ने …?” वो हंस रहे थे . “और है भी क्या , इन के पास …?” नरेन्द्र मोदी जी ने भी स्वीकारा था .

“गुजरात में जो भी विकास हुआ ….कांग्रेस पार्टी ने ही किया ….?” सोनिया जी बोलीं थीं . “बी जे पी ..तो कल की पार्टी है …? कांग्रेस ने देश को आज़ादी दी …! देश का विकास किया …!! नेहरू जी ने देश को औद्योगिक क्रांति दी …और ये सरदार सरोवर …कांग्रेस की ही देन है …? इंदिरा जी ने …देश को ……” तालियाँ बजने लगीं थीं . “सोनियां -गांधी – अमर रहें के स्वर गूं ज उठे थे . “बी जे पी ने क्या दिया देश को ….?” सोनियां गांधी पूछ रही थीं . “किसान भूखा है ….उस को कीमत नहीं मिलती ….मजदूर रोटी के लिए मुहताज है …..और …. “

और मनमोहन सिंह जी ने तो बी जे पी को सिरे से खारिज कर कहा था – विकास नहीं …ये इन का प्रपंच है …? कल को जब गुजरात में कांग्रेस की सरकार आएगी तो …पता चलेगा ….कि ये बी जे पी – बला क्या है ….?

लेकिन जब नरेन्द्र मोदी सभा को संबोधित करने खड़े हुए थे …तो …जनता का उठा -शोर ….जनता की मांगें ….जनता का जोश …इतना था कि …संभाले -न-संभल रहा था …?

“क्या कहूं , भाईयो और बहिनों …..?” मोदी जी बोल रहे थे . “जिस विकास के रास्ते पर हम चल पड़े हैं ….अब हम मुड कर नहीं देखना चाहते …?” उन्होंने कहा था . लोग चहके थे …बोले थे …नारे लगे थे …’फोर् वार्ड ‘ ….’फॉर वार्ड ‘ ….!! मोदी जी भी कह रहे थे – अब नहीं मुड़ेंगे …हम पीछे …? उन्होंने घोषणा जैसी की थी . लोग फिर से चहके थे – ‘दिल्ली’ ….’दिल्ली’ …..? की आवाजें तूफ़ान की तरह उठीं थीं . और मोदी जी कह रहे थे ,’मैं चाहता हूँ …आशीर्वाद …! अपने छह करोड़ गुजराती भाईयों का – आशीर्वाद …!!’ अब हाथ उठा कर लोगों का आव्हान किया था -मोदी जी ने ! फिर से शोर उठा था – ‘पी एम्’ ….’पी एम्’ ….’दिल्ली’ ….’दिल्ली’ ….? ‘चला जाऊंगा -दिल्ली , इसी सत्ताईस तारीख को …. !!’ मोदी जी ने विनोद के बतौर कहा था . “मैं अपने छह करोड गुजराती भाईयों से …नम्र -निवेदन करता हूँ कि …अगर मुझ से कोई गलती हुई हो तो ….जाने-अनजाने भी कोई गलती हुई हो ….तो मुझे क्षमा कर दें ….?” मोदी जी का इशारा था कि अब वो दिल्ली चले ही जांयगे …? और फिर से लोग उल्लास में उछल-उछल कर -‘पी एम्’ …’पी एम्’ का ..जयघोष कर रहे थे …!! “मैं आप की भावनाओं की क़द्र करता हूँ, भाईयो …और बहिनों …! मैं कोशिश करूंगा कि ….आप के सपने पूरे कर सकूं ….?” अब हाथ हिला-हिला कर मोदी जी …उन का आव्हान करती जनता का …आभार चुका रहे थे ….

लगा था – ये उन का …प्रचार-भाषण न हो कर …एक विदाई समारोह था …जहां …जनता का चहेता – मोदी ‘पी एम्’ बन कर …दिल्ली जा रहा था ….?

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श्रेष्ठ साहित्य के लिए – मेजर कृपाल वर्मा साहित्य !!