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मैं अपने आसमान अलग से ले कर चलता हूँ !

ब्यूटीफुल वुमन

महान पुरुषों के पूर्वापर की चर्चा !

भोर का तारा- नरेन्द्र मोदी .

उपन्यास -अंश :-

“आई ए एस अधिकारी प्रदीप शर्मा का दुखड़ा …?” मैंने अखबार ‘राष्ट्र ध्वज’ का मुख प्रष्ट पढ़ा था – तो चौंक पड़ा था ! मैं ताड़ गया था कि ज़रूर ये प्रदीप शर्मा की कोई नई चाल थी …कोई अनूठी साजिश होगी …और इस के पीछे कौन-कौन होगा …ये भी मैं जानता था . अब तो सब के सब अखाड़े में उतर आए थे …? ‘मोदी जी के प्रेम-रोग के शिकार …!!’ अगला हैडिंग था . मेरा माथा घूम गया था !

ये तीर तो सीधा ही कलेजे पर आ कर लगा था …..????

“माधुरी के साथ हुई पहली ही मुलाकात में …मोदी जी इश्क के भंवर में …कुछ इस तरह घूमे कि …सारी सुध-बुध ही भूल गए …? ये मुलाक़ात २००४ में ‘हिल-व्यू’ गार्डन में हुई थी ! जैसे ही मैंने मोदी जी को माधुरी से मिलाया था …वो चकित द्रष्टि से उसे देखते ही रहे थे ! और फिर बोले थे ,’सुंदर ! बहुत सुंदर !!’ मैंने तब सोचा था कि ..शायद मोदी जी माधुरी के किए कलात्मक कार्य की प्रशंसा कर रहे थे …? लेकिन वो तो …..माधुरी के हुस्न पर रीझ गए थे ….? माधुरी को साथ लिए-लिए बगीचे में निकल गए थे ….और मैं वहीँ खड़ा रह गया था ……

कितना अच्छा ‘प्रेम-प्रसंग’ गढ़ा था – मैं सोचता ही रहा था ….?????

“फिर तो मिदी जी ने माधुरी पर पहरे बिठा दिए …? ६२ दिनों तक तो …अमित शाह और गुजरात पुलिस …द्वारा इन की जासूसी कराई ? और फिर …? हाँ.हाँ ! और फिर ….मैं जानता हूँ कि माधुरी को …मुख्य-मंत्री आवास पर छोड़ कर मैं …४८ घंटों तक ये भी न जांन पाया था कि ..वो थी कहाँ ….?”

“चूंकि …तुम उस की इज्जत लूट लेना चाहते थे …..इस लिए ….उसे …..” अचानक ही संवाद मेरे होठों पर आ धरा था . “चूंकि …तुमने उस शरीफ लड़की को ….ब्लैक -मेल करने का स्वांग रच लिया था …? और तुम चाहते थे – प्रदीप कि …मैं …तुम्हारे जाल में फंस कर …तुम्हारे सारे गुनाह मांफ कर दूं ….और हमेशा-हमेशा के लिए तुम्हारे हाथों का खिलौना बन जाऊं …?” मैं कहता ही जा रहा था . “और …और अब भी तो तुम …वही पासे फैक रहे हो …?”

अखबार का अगला प्रसंग उसी विषय पर आ टिका था !!

“एक ईमानदार …होनहार …और चरित्रवान …आई ए एस ऑफिसर का …दुर्भाग्य तो देखिए ….? कि …मोदी जी ने उसे कितने झूठे मामलों में फंसा दिया है ….? मोदी जी को डर था कि कहीं …ये प्रदीप शर्मा …उन के ‘प्रेम-प्रसंग ‘ का ..पर्दाफाश न कर दे …? कहीं ये -प्रदीप शर्मा …उन्हें अपनी सर्व-प्रिय माधुरी से जुदा न कर दे …? कहीं ये पदीप शर्मा …उन्हें ……”

ये आनेवाली आफत का सूत्रपात था – मैंने जान लिया था ….????

हाँ ! एक बात से मुझे गहरा संतोष था ! ‘माधुरी’ …या फिर कहें – मिस सोनी …..वो लड़की जिसे अब फिर से …मेरे विरोधी उजागर कर मेरे गले में फांसी डाल देना चाहते थे – सुरक्षित थी ! उस की शादी हो गई थी . वह अपने पति के साथ अहमदाबाद में …रह रही थी . प्रदीप शर्मा की पहुँच से परे थी ….और इन प्रपंच रचनेवाले खेमों से भी खबरदार थी ! उस के पिता -सोनी सहाब , मेरे ही परिचित थे और मैंने ही उन के आग्रह पर ‘माधुरी’ को …इस शातिर प्रदीप शर्मा के चंगुल से निकाल दिया था !!

अगर मैं इतना कठोर कदम न उठाता तो ….शायद ये ‘माधुरी’ काण्ड ….अब तक …अकेले ही …मेरी जांन ले लेता ….???????

“किस अफ़सोस में बैठे हैं ….?” आते ही अमित ने स्थिति भांप कर मुझे पूछा था .

“पढ़ लो …!” मैंने उसे हाथ में लगा अखबार थमा दिया था .

“पढलिया है !” वह मुस्कराया था . “मुझे बहुत पहले ही पता चल गया था ….?”

“तो …..?” मैंने प्रश्नवाचक निगाहों से अमित को घूरा था .

“तो .. ये देखिए ! सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि …ये ‘माधुरी ‘ वाला प्रसंग …याचिका से हटाएं ! इस का तो कोई औचित्य ही नहीं बनता ….?
अमित ने सूचित किया था !

“हे,भगवान् !” मैंने अपने दोनों हाथ जोड़ हवा में …तान दिए थे . “न्याय करना , मेरे परमात्मा ….?” मैंने प्रार्थना की थी . “अमित …!” मैंने उस के दोनों हाथ अपने हाथों में भर लिए थे . “तुम …न ..हो … तो मैं नंगा खड़ा मिलूँ ….?” मैं कहे जा रहा था .

“अगला …काम ….अगला …सोच …अगली बात ….?” अमित किसी इरादे से आया था .

“क्या होगा ….?” मैंने उसी से पूछा था .

“पूरा तंत्र ….कांग्रेस …और बुद्धिजीवी ….एक मत हैं कि …मोदी को परास्त करने के लिए …यही एक रास्ता है …?”

“कौन-सा रास्ता ….?”

“चरित्र हनन का रास्ता …!” हंस कर कहा था , अमित ने . “किसी तरह ….कैसे ही जनता को यह बताया जाए …भरोसा दिलाया जाए कि उन का लाडला मोदी …एक सड़क छाप था ….और एक ऐसा घटिया इंसान था …जो एक लड़की के चक्कर में था ….और उस को पाने के लिए …प्रदीप शर्मा जैसे वफादार आई ए एस ऑफिसर का …कैरिएर …चौपट कर दिया था …?”

गंभीर समस्या थी ! मैं घबराने लगा था . इस उम्र के मजधार में …मैं अगर लड़की के प्रसंग से जुड़ा तो ….बे-भाव बिक जाऊंगा …? मैं जानता था कि ……

“आगे और क्या है ….?”

“यही कि …अब फिर से इसी याचिका को …जोर-शोर से …दायर किया जाएगा ….”

“कैसे ….?”

“हमारा मीडिया भी तो है ….? ‘कोब्रा -पोस्ट’ और ‘गुलेल’ ने ताल ठोक कर कहा है कि …वो इस तरह की मीडिया ‘ट्रिक्स’ …या कहें ‘डर्टी — ट्रिक्स ‘ पेश करेंगे …जो सिद्ध करेंगी …बिना किसी नाम के …कि …’मोदी इश्क में पागल हुआ घूम रहा है!’ ….! गली-गली और शहर-शहर …’माधुरी’ के गीत गाता फिर रहा है ‘ ! और ….”

“और …..?”

“फांसी चढाओ, मोदी को ….? सुप्रीम कोर्ट में गुहार लगेगी !!” अमित ने मुझे रुक कर देखा था . “और हम कहेंगे कि …ये प्रदीप शर्मा कोई ‘होली-काऊ ‘ नहीं है ? एक रंगा गीदड़ है,ये ! ये प्रमाण हैं इस की बईमानी के …? ये जेल की हवा भी खा चुके हैं …? इन पर ये छह अपराधिक मामले भी दर्ज हैं ? सरकारी जमीन आवंटित करने से ले कर …इन्होने आपराधिक मामलों में भी सिरकत की है …? और ये जो इन का बयान है कि …’मोदी जी ने मुझ से आग्रह किया था …फोन पर …कि मैं …अपने बड़े भाई कुलदीप शर्मा से कह कर …मुसलामानों की मदद करने को न कहूं …’ ये बात बे-बुनियाद है …? इसे हम सिद्ध कर चुके हैं !! हमने कुलदीप शर्मा आई पी एस का कच्चा चिट्ठा भी खोल दिया है ! इन की झूठी गवाहियों की लिस्ट भी लगा दी है ….!!”

“ये सब …ये लोग क्यों कर रहे हैं,अमित ….?”

“क्यों कि ये …हर मोर्चे पर मार खा गए हैं ….? कांग्रेस निराश है ! उस के नेता अब कोई भी घटिया चाल चलने पर उतारू हैं ….और अब कुछ भी अनुचित ….या गैर मुनासिब कर सकते हैं …?”

“तो …..?”

“लीड …!!” अमित के स्वर बुलंद थे . “लेट’स टेक …द लीड …?” वह मुस्कराया था . “इन्हें वहां ले जा कर मारते हैं …जहाँ …पानी तक न मिले ….?”

“कहाँ ….?”

“चुनाव …! चुनावों की तैयारी करते हैं ! १२ के चुनावों में …?”

“कांग्रेस मुक्त -गुजरात ….?” मैंने पूछा था .

“हाँ…!!” अमित शाह हंस गया था .

कांग्रेस नेताओं के बयान जारी होने लगे थे . सब ‘माधुरी ‘ काण्ड खुलने की एक-दूसरे को बधाई दे रहे थे . सारे सुपारी-पत्रकार अब पूरे जोशो-खरोश के साथ …मोदी के चरित्र हनन को ले कर …सक्रिय हो गए थे ! उन्हें ये परवाह तक नहीं थी कि वो …एक विवाहित स्त्री …की निजता पर प्रहार कर रहे थे …और ..उसे बदनाम कर रहे थे …? उन्हें तो एक ही चिंता खाए जा रही थी कि …कहीं मोदी देश का प्रधान मंत्री न मनोनीत हो जाए …? जनता कहीं ये न मान ले कि मोदी …..”

“अरे,भाई …? कहो न …इन भारतीय जनता पार्टी के …वरिष्ट लोगों से कि …ऐसा अपराध ना करें ….?” एक अनाम मांग खड़ी हुई थी . “एक आदमी ….जो किसी लड़की के इश्क में पागल हो …..कैसे बनेगा देश का पी एम् …? बाहर तो वैसे भी खूब बदनामी हो रही है ….?” विमल जी ने बयान दिया था .

हवा के पंख उग आए लगे थे ! मैं महसूस रहा था कि …मुझे ले कर अब एक नया सवेरा हो रहा था …? ‘व्हाई नांट ए …ब्राह्मण …फैस ….?’ भारतीय जनता पार्टी को कहा जा रहा था . ‘ओ बी सी है – ये मोदी तो ….?’ लोग इशारा करने लगे थे . ‘अरे, किसी …विद्वान् ब्राह्मण को …बनाओ,पी एम् …?’ लोगों की राय आने लगी थी .

मोदी का डर था – जो कांग्रेस को खाए जा रहा था …..????

कांग्रेस पार्टी की तमाम उम्मीदों पर पानी फेरते हुए …भा जा पा के वरिष्ठ नेता – व् राज्य सभा में विपक्ष के नेता – अरुण जैटली ने कहा – कि कांग्रेस अपने उस पुराने ही खेल पर …फिर लौट आई है …जिस में किसी असंतुष्ट पुलिस अधिकारी या …किसी प्रशाशनिक अधिकारी के ज़रिए नरेन्द्र मोदी पर …अल्लम-खाल्लं आरोप लगाए जाते हैं …? जेटली ने आगे कहा कि …विवादित आई पी एस अधिकारी – संजीव भट्ट का उपयोग …कर के भी जब कांग्रेस कामयाब नहीं हो पाई …तो अब विवादित आई पी एस अधिकारी – प्रदीप शर्मा का उपयोग …कर के भी वह कामयाब नहीं होगी ….?”

वास्तव में लोगों को हैरानी थी कि …आज़ाद भारत की राजनीति में …नरेन्द्र मोदी ही एक अकेला ..महामानव है …जिसे इतना अधिक बदनाम किया गया है …? और मैं भी महसूसता हूँ कि मेरे खिलाफ …संदेह …और ..नफरत पैदा करने में …पूरी राजनीतिक जमात …मीडिया हाउस ….तथाकथित -बुद्धिजीवी …मानवाधिकार वादी …व् एन जी ओ गिरोह …एवम कई विदेशी संगठन …व् देश शामिल हैं …!!

पूरे ११ वर्षों से लगातार …मेरे खिलाफ कांग्रेस के साथ उन की नौकरशाही …पत्रकार …वांमपंथी विचारक …और असंतुष्ट अधिकारी …तन-मन से जुटे हैं …और यहाँ तक कि उन्होंने …’गोधरा’ में राम-भक्तों को जलाने से ले कर …लश्कर की आतंकी …इशरत जहांन को …’संत’ बनाने तक के सफ़र में …एक साजिशों का बारीक जाल बुन डाला है …?

“लेकिन,मित्रो ! मैं अपने आसमान अलग से ले कर चलता हूँ ! मुझे मेघों से छाया की उम्मीद होती है …मानवों से नहीं ! न जाने क्यों मेरी जिन्दगी में …एक अजब-गज़ब दोहरापन है ? मुझे मेरा ‘स्व’ हमेशा ही सचेत करता रहता है ! जैसे कि …मैं कहूं कि …मैंने जब ‘माधुरी’ को देखा था …तो मेरे साथ गुरु जी आ खड़े हुए थे ! उन की ‘चित्रा’ का प्रसंग ….भी मुझे याद अ गया था …..?

मानवीय मन की सब से बड़ी कमजोरी – एक सुंदर स्त्री है !!

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श्रेष्ठ साहित्य के लिए – मेजर कृपाल वर्मा साहित्य !!