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कोई चायवाला नहीं -ये चोर है !

नरेन्द्र मोदी

महान पुरुषों के पूर्वापर की चर्चा !

भोर का तारा -नरेन्द्र मोदी .

उपन्यास -अंश :-

‘नमो’ का मंत्र पूरे देश में गूँज उठा था !

मीडिया,टी वी ,अखबार और पत्रिकाएँ -नरेन्द्र मोदी के नाम,काम …और सौहरत सम्मान का गुण न्गान कर रहे थे ! पूरे भारत को मैंने अब तक की …की ४३ रैलियों में संबोधित किया था . मैंने उन की सुनी थी और उन्हें अपना मत,पथ …और उद्देश्य कह-कह कर सुनाए-गाए थे ! मेरे उड़ान भरने का कुल समय ४१० घंटों का था ….और ये अबतक की एक मिसाल थी – जो मैंने कायम की थी !

लेकिन नहीं ….! नहीं था -मुझे अभी भी संतोष !

मेरी आँखें खुलीं थीं ! सूरज था कि …ठहर गया था …डूबना ही न चाहता था …? लेकिन उधर चाँद था …जो उदय होने के इंतज़ार में खड़ा -खड़ा सूख रहा था …? करें तो करें क्या -रात को तो दिन ने अंगूठा दिखा दिया था …? और शाम , हाँ,हाँ जीवन की शाम का तो अभी से ढल जाना असंभव ही था ?

कारण ,मित्रो …एक ही था …कि आज माने कि १६ मई २०१४ को चुनाव परिणामों की घोषणा होनी थी !

तो आईये ! आप भी आईये !! साथ-साथ चुनाव -परिणामों का जायजा लेते हैं और देखते हैं – कौन जीता ,कौन हारा …और किसे क्या मिला और क्या नहीं मिला …? हमारा ही नहीं मित्रो ! देश का …पूरे देश का दिल धडक रहा है …नब्ज़ दौड़ रही है …और आशा-निराशा का निराला खेल खेला जा रहा है …? मैं भी उत्साहित हूँ …कि अपनी की मेहनत ..का रंग-पानी देख लूं …सुन लूं …और समझ लूं …!!

कितना कुछ घट गया है …बीते दिनों में ….

“गुप्तचर एजेंसी की रिपोर्ट में तो यहाँ तक कहा गया है कि …नरेन्द्र मोदी को मारने के लिए समान विचारधारा वाले …राजनीतिज्ञों ,नौकर -शाहों …व् …भारतीय सुरक्षा अधिकारियों की मदद भी ली जा सकती है ?” अमित मुझे बता रहा था . “लश्करे-तैयबा तो आप पर नज़र टिकाए ….”

“देश छोड़ कर तो नहीं भागेंगे, अमित ….?” मैंने हंस कर कहा था , लेकिन अमित गंभीर था . “हम अपना प्रोग्राम नहीं बदलेंगे ….?” मैंने जोर दे कर कहा था . “होने दो …घमासान ….!!” मेरा स्वर तीखा था .

किसी भी कीमत पर अब कांग्रेस को चुनाव जीतना था . बी जे पी का चुनाव -प्रचार और …जन-मानस का रुझान जो कह रहा था – उन की समझ में आ रहा था और उन्हें हर मोर्चे पर निराशा ही मिल रही थी !

अमित अखबार देख रहा था और लम्बे समय तक देखता ही रहा था ! मुझे कुछ दाल में काला दिखाई दिया था तो पूछा था ?

“कुछ गंभीर …मामला ….?”

“सोनिया गाँधी की ‘किचिन-कैबिनेट’ का हमला है !” एक लंबी उच्छवास छोड़ते हुए अमित बोला था . “वही पुराना किस्सा …?” अमित ने निराश आँखों से मुझे घूरा था .

“है, क्या ….?” मैंने संयत स्वर में पूछा था .

“किसी भी तरह …’मोदी’ मरे ….? बदनाम हो …उस का नाम …? ताकि …हुई नाम की घोषणा को वापस लिया जा सके …?”

“लेकिन अब क्या नया गुल खिलाया है …?”

“वही ….! प्रशांत भूषन जी सुप्रीम कोर्ट से अर्ज कर रहे हैं कि एक बार …फिर से ‘कोब्रा-पोस्ट’ और ‘गिलोल’ की नई कहानी सुन लें …? इन का संज्ञान लेते हुए सी बी आई से …फिर से जांच कराई जाए …? उन के लिहाज़ से कुछ ऐसा नया है जिस के सामने आते ही ….मोदी …..?”

“चरित्रहीन सिद्ध हो जाएगा ….?” मैं कह कर हंस पड़ा था . “मैं चरित्रहीन हूँ ही नहीं …तो सिद्ध कैसे हो जाऊंगा, मैडम ….?” मैंने उपहास के तौर पर ही सोनिया जी को संबोधित किया था .

“लो,भाई जी ! हो गया ….काम …!!” अमित चहका था . शायद चुनाव -परिणाम आने लगे थे …? “गए.लालू जी ….! हार गए …नितीश जी …..!!” उस ने जय-घोष किया था .

“हे ,भगवान ! तू न्याय तो करता है …?” मैंने बड़े ही विनम्र स्वर में परमात्मा को धन्यवाद दिया था .

सच मानिए कि …७ अक्टूवर की वो घटना मैं जीवन भर नहीं भूल पाऊंगा …? पटना के गाँधी मैदान में बी जे पी की रैली होनी थी और बिहार सरकार को हर प्रकार की हर सूचना दी जा चुकी थी ! मैं जब पटना हवाई अड्डे पर उतरा था तो मुझे उम्मीद थी कि सी एम् नितीश जी ज़रूर ….ज़रूर ….

“सर, मोदी जी के लिए …बुलेट-प्रूफ …भेजनी है …?” प्रश्न था क्यों कि उन के आदेश नहीं थे .

“भेज दो …वो …पुरानी …! खप जाएगी ….? हा हा हा ….” आदेश थे . और लगा था कि …कुछ होना-जाना ज़रूर था .

उस पुरानी खटारा कार में बैठ कर मैं गाँधी मैदान की ओर निकला ही था कि …किसी बम-बिस्फोट की खबर थी … जो रेलवे स्टेशन पर हुआ था ! मेरा शक साबित हो गया था …? मैं जांन गया था कि आज मेरी जांन की खैर न थी ! लेकिन मैदान छोड़ कर भागना तो मेरी किताब में ही नहीं लिखा …? में …चलता ही रहा था और देख रहा था कि …जनता का जमावड़ा बे-जोड़ था ! पूरा गाँधी मैदान नाक तक भरा था …और भीड़ किसी भी तरह …मैदान में समा न पा रही थी !

लोग इतनी संख्या में मुझे सुनने आए थे – मैं गद -गद हो गया था !

लेकिन तभी …बम धमाका हुआ था …और दशों दिशाएं बोल पड़ीं थीं ! जनता के कान खड़े हो गए थे . मैं अभी मंच पर पहुंचा ही था कि …दूसरा धमाका हुआ …और पूरा मंच चरमरा कर …अस्त-व्यस्त हो गया ? मुझे लगा कि अगले ही पल मेरी मौत आ जाएगी और ….

“बचाओ , मोदी जी को ….?” भीड़ बजाए भागने के मुझे बचाने की गुहार लगा रही थी .

मुझे लोगों के एक कवच ने अपने भीतर भर सुरक्षित कर लिया था ! इस के बाद एक के बाद दूसरा बम फटा था …और जम कर धमाके हुए थे . लोगों को छोटी-मोटी चोटें आईं थीं …पर न तो कोई हिला था न कोई भागा था …? मैं था कि इस द्रश्य को एक अचरज की तरह देखता ही रहा था .

फिर सब शांत हो गया था …और लोग मुझे सुनने के लिए मैदान में आ बैठे थे . मैं बोला था ….मैं भावुक था …जनता का आभारी था …और …जनता …जैसे मेरी बहुत अपनी थी …मुझे सुनती ही रही थी …तालियाँ बजती ही रहीं थीं ….और अंत में एक इतिहास रच गया था – उस दिन !!

लालू जी और नितीस जी की निराशा का ठिकाना न था …?

अनुमान था कि ..जैसे ही बम-ब्लास्ट होंगे …जनता में भगदड़ मच जाएगी …और चूंकि …पाँच लाख से भी ज्यादा लोग …मुझे सुनने पहुंचे थे …अतः …भीड़ बिगड़ने के बाद तो …कुछ भी हो सकता था …? और तब …हाँ.हाँ …तब मुझ पर ह्यूमन-बम का हमल होना था …जिस की सुपारी ‘जींद’ को दी जा चुकी थी !

लेकिन जब भीड़ ने मुझे अपने भीतर भर लिया था …और एक भी आदमी नहीं भागा था ,,,तो …’जींद’ ने हमला नहीं किया था …?

पटना -बिहार में हुई इस हुंकार रैली की गूँज …पूरे भारत के आर-पार पहुँच गई थी …और एक निर्णय हवा पर झूल गया था …!!

“आतंकवाद का भी मुंह काला हो गया …आज …?” अमित शाह का प्रश्न था .

“जाको …राखे ..साईँ -या ….?” मैंने हंस कर अपना ही उत्तर दिया था .

लालू प्रसाद और नितीस जी के लिए आती ये खबर उस हुंकार रैली का जनता का दिया उत्तर थी ! इन्होने मुझे छोटा माना था …मेरा मज़ाक उड़ाया था …लेकिन जनता ने मुझे अपने सर पर उठा लिया था …अपने दिल में बसा लिया था …और आज मुझे …?

चलिए …आने देते हैं ….और परिणाम ….

मेरा नाम पी एम् के लिए आते ही गूगल पर ..१३२८७७ लोगों ने सर्च किया था …जो अब तक का विश्व का एक बड़ा कीर्तिमान है ! तो क्या आप भी मानते हैं कि …मोदी …आज जनता का चहेता …मोदी …मोर्चा मरेगा …और ‘कांग्रेस-मुक्त’ भारत का सपना पूरा करेगा …?

“आप का दुश्मन ‘कांग्रेस’ है ….और कोई नहीं ….!” अमित ने मुझे बताया था .

“तुम थे कहाँ …?” मैंने उसे उल्हाना दिया है . ” तुम …..”

“क्यों…? काम नहीं हुआ ….? क्या है – जो नहीं हुआ ….?” वह अब मुझे उल्टा झिंझोड़ रहा है . “वो हुआ है, भाई जी …जिसे पूरा विश्व आँखें पसारे देख रहा है ….? मूं की खाई है ,कांग्रेस ने ! पूरा दम लगा कर भी ….?”

“लेकिन …लेकिन ….वो एटम-बम्ब तो अभी चलेगा …? अमेरिका में बना ये …बम्ब ..हमें नस्त-नाबूद करने के लिए ही तो है ?”

“कौन-सा अटम-बम्ब ….?” अमित तनिक चौंक पड़ा है . उसे इस नई खोज की अभी तक कोई खबर नहीं है .

“राहुल गाँधी ….!!” मैंने जोर दे कर कहा है .

“प्-ग-ला …है …!” अमित ने हंस कर कहा है . “वो …तो …पागल है,भाई जी !!” वह फिर से हंसा है . “आप तो व्यर्थ में डरे बैठे हैं …?” उस ने मुझे चेताया है . “और अगर एटम-बम्ब फटता है …तो फटे ? डरता कौन है …?” अमित ने मुझे हौसला दिया है .

“हा हा हा …!!” मैं भी अब हंस पड़ा हूँ . “अरे,भाई ! न जाने क्यों ….मुझे आज-कल चींटी भी …हाथी दिखाई देने लगी है ….?”

“आप भारत को देखो,भाई जी ….?” अमित गंभीर है . “अब द्रष्टि को भारत पर केन्द्रित करो …!” उस की राय है

“बी जे पी के …अरुण जैटी’ली भी हार गए ….?” किसी ने चिल्ला कर कहा है .

मेरे तोते उड गए हैं ! अमित कहीं टथस्त है ! मुझे अपने ही लोगों का किया व्यवहार चौंट लेता है ? चालाक आदमी को जन-मानस पहचानता है -ये मेरी धारणा है ! मैं जो भी कर रहा हूँ …पार्टी के लिए है …देश के लिए है …लेकिन कुछ लोग केवल अपने लिए ही सब कुछ करना चाहते हैं …? और नतीज़ा …

“ये ,लो सर …? गए आप के …कपिल सिब्बल ….?” आवाजें आ रही हैं …

अब मना लेगा …मौके पर दिवाली …? ये आदमी भी जो है …वो है ही नहीं …? अब चाटेगा सोनिया की जूती …? न जाने क्यों मुझे गुलामों से नफ़रत है ….? अरे, परमात्मा का दिया सब कुछ्होने के बाद भी …तुम ….

“हार गए …खुर्शीद …?” एक और बड़ी खबर है . ये भी सोनिया जी के ख़ास हैं …और इटली में इन की भी ससुराल है …? इन्हें भी घमंड था …और हारना तो इन के लिए ….

“बाटला हाउस में …मुसलमान युवकों की मौत की खबर सुन कर सोनिया जी …तो रो ही पड़ीं थीं …?” ये इन्ही की उडाई अफवाह थी . मुसलमान के नाम पर ही ये खाते-कमाते हैं …और इन्होने भी अपनी सल्तनत कायम कर ली है ? अब आ कर हारे हैं …? बैठ कर अब देंगे मोदी को गलियां ……

“सुशील सिंदे भी हार गए …और ..सचिन पायलेट भी उड़ गए …?” गंभीर ख़बरें आने लगीं हैं . कांग्रेस के खेमें में खलबली मच गई है ! “लगता है – साफ़ हो जाएगी …कांग्रेस …?’ अमित चहका है .

खुश तो मैं भी खूब हूँ . कांग्रेस वालों ने खूब ही मार दी है -मुझ में …?

“सोनिया जी जीत गईं हैं ….!!” एक धमाका जैसा हुआ है …जैसे कोई बम फटा हो – ऐसा लगा है !

मैंने इस खबर का आदर किया है …उसी तरह …जिस तरह कि देश के लोगों ने …मत-दाताओं ने …और दिग्गज राजनेताओं ने हमेशा ही सोनिया जी को आदर दिया है ..सम्मान दिया है …? ये हमारे देश की सभ्यता है …ये हमारा बड्पपन है …कि हम नारी का सम्मान करते हैं …! लेकिन आप अगर सोनिया जी का चुनाव-प्रचार देखें …तो ..

“बी जे पी वो पार्टी है …जो गंजे को …कंघा बेच देती है …ताकि …वो अपने गंजे सर को खुजा ले …?” सोनिया जी विराम देती हैं . लेकिन लोग उन की इस मज़ाक पर हँसे नहीं थे …? “ये पार्टी – बी जे पी …गंजों को हैअर -कट दिलाती है …?” उन्होंने फिर से संवाद बोला था . लेकिन इस बार भी कोई नहीं हंसा था ? वास्तव में तो लोग असम्प्रक्त थे …उन की बात सुन ही न रहे थे . लेकिन वो वहां उपस्थित थे …!!

ये था …उदहारण जहाँ जनता के साथ उन का कोई संपर्क था ही नहीं ..? उन को जो लिख कर दिया जाता था – वो उसे ही पढ़ देतीं थीं …!

“मैं कहती हूँ कि …अगर बी जे पी चुनाव जीती …तो …नर-संहार होगा …? हज़ारों-हज़ार लोग …मरेंगे …और ….” वो कह रहीं थीं पर खुद भी इस बात का अर्थ न जानतीं थीं . और जिस ने ये भाषण लिखा था – वह भी तो हंस रहा था …?

फिर भी सोनिया जी की जीत हुई है …? ये भारत की संस्कृति की जीत हुई है . मित्रो …!!

“सर ! जसवंत सिंह जी भी ….हुए …पूरे …?” अमित जोरों से हंसा है .

मुझे अच्छा तो नहीं लगा …पर श्री जसवंत सिंह जी का हाल यही होना था – मैं जानता था …? कुछ लोगों के खून में गद्दारी …चली आ रही होती है ? मुझे दादा जी याद आ गए – हमारे तो राजे-रजवाड़े भी ..अंग्रेजों की डयोड़ीयो ..पर जा खड़े हुए हैं …? आज़ाद भारत में अब गुलामों के लिए जगह नहीं मिलेगी – मेरा ये मानना है !

“राहुल जी जीत गए .,सर …?” एक मुनादी जैसी हुई है . लोग खूब हँसे हैं . सब जानते हैं कि राहुल जी क्यों और कैसे जीते हैं …?

और जानता तो मैं भी हूँ ,मित्रो ! मैं तो इस की तलाश में ..कि अमेठी में ऐसा है क्या जो गाँधी परिवार को बार-बार वोट देता है …जिता कर भेजता है …और ….?

“हमने गोद में खिलाया है , राहुल को ….? हमार बचवा …पी एम् बनेगा …? दादा –पर दादा …का ..आशीर्वाद है ! ये लोग तो …?” अब तो आप भी समझ गए होंगे कि किस चतुराई से गाँधी परिवार ने वंश-बेल को बोया है …? इस की जड़ें बहुत गहरी हैं ! वक्त ही उखाड़ पाएगा – शायद …? लेकिन ये वंश-वाद अगर फैला तो …जहर का काम करेगा …? प्रजातंत्र के लिए विष है -ये ….वंश -वाद …?

चलो ! राहुल जीते हैं —बधाईयाँ ….!!

लेकिन इस के साथ ही मैं चाहूँगा कि आप कांग्रेस का प्रचार -प्रसार भी देखें –

“मेरे लिए तो मोदी का आना ..एक खतरे का आना जैसा है …!” ये कांग्रेस के ग्रामीण विकास के मिनिस्टर श्री जयराम रमेश मीडिया से कह रहे हैं . ” क्योंकि …न तो ये आदमी हमारे श्री रवीन्द्रनाथ ठाकुर के भारत का है …न महात्मा गाँधी के भारत का है …न पंडित जवाहर लाल नेहरू के भारत का है …और न ही ये सरदार पटेल के भारत का है …? क्योंकि इस आदमी की विचार-धारा ने …उत्तर-प्रदेश और बिहार में जिस तरह से ..आग लगाई है – वह किसी हादसे से कम नहीं है …?” उन को मुझ पर रोष है . वो फिर कहते हैं ,” ये कोई चायवाला नहीं है ….? ये तो कोरा ठग है …चोर है …! चाय पर चर्चा कर-कर इस ने चाय का जायका ही बिगाड़ दिया …? मैं अब चाय नहीं पीता ….?”

और हमारा मीडिया भी उन्हीं बातों को बताता है – जो असंगत हैं …असंभव है ,,,?

“जीत गई बे जे पी भाई जी ….!!”शोर उठ खड़ा हुआ है . जश्न मन रहे हैं . जय-जयकार होने लगी है …!!

“क्या मैं विजयी हो गया हूँ ….?” मैंने अपने आप से पूछा है .

“तुम नहीं,नरेन्द्र ! भारत विजई हुआ है ..!” दादा जी बोले हैं . “ये देश का भाग्योदय है,बेटे …!!” आवाज़ गुरु जी की है !”

और में ….नत-मस्तक हूँ ……….!!

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श्रेष्ठ साहित्य के लिए – मेजर कृपाल वर्मा साहित्य !!