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खानदान

indian wedding


घर में शादी का माहौल था, पूरा का पूरा घर रिश्तेदारों से भरा हुआ था।ऊपर नीचे पूरे घर में रिश्तेदार ही रिश्तेदार थे…मामा,नाना, चाची, ताई ,बुआ वगरैह-वगरैह। लगभग पिछले आठ-दस दिनों से शादी की रौनक लगी हुई थी,हर दिन घर किसी न किसी वैवाहिक कार्यक्रम से सरोबार हो उठता था। बाहर पहली बिल्डिंग में ही घर था, ऊपरी मंजिल का मकान था, पूरा का पूरा ब्लॉक लाइट से बेहतरीन ढंग से सजाया गया था। “किसकी शादी है,भई”… नीचे उतरते वक्त हमसे किसी ने पूछ लिया था। हमनें भी कह दिया था,”लड़की की शादी है”। हमारा कहना हुआ था..”लड़की वालों की तरफ से हैं ,हम”। रिश्तेदारों के हँसी मज़ाक और रोज़ रात को ढ़ोलक के साथ नाच गाना का नियम पिछले सात-आठ दिनों से चल रहा था। सगाई सिक्का सभी रीति रिवाज़ तो होने थे।
आज तो घर में सुबह से ही रौनक लगी हुई थी,मामा जो आ रहे थे, लड़की का भात लेकर। शाम होने पर उत्तर प्रदेश के लोक संगीतों से घर का माहौल बदल गया था।
“लो, मामाजी,मामीजी सब आ गए हैं, नीचे खड़े हैं”। उत्तर प्रदेश मथुरा जिले के रिवाज़ों के हिसाब से भात वाले दिन जो मामा होता है,उनका स्वागत घर की महिलाएँ पूरी थाली सजाकर अपने प्रदेश के लोक संगीत व ढ़ोलक के साथ करती हैं। बस!तो फ़िर उसी तरह से यहाँ भी लड़की की माताजी,मौसीजी व ताईजी और बुआजी ने बकायदा लोक गीत गाते हुए,थाली सजाकर बिल्डिंग से नीचे जाकर मामाजी व उनके पूरे परिवार का स्वागत करती हुई उन्हें ऊपर लेकर आईं थीं। मामाजी के गृह प्रवेश के साथ ही माहौल बदल चुका था..अब तो घर के स्वागत कक्ष में मेहमान घर में चारों तरफ बैठ गए थे,और बैठते भी क्यों न भात का कार्यक्रम जो शुरू होने वाला था।

मामाजी व उनके परिवार का स्वागत ज़ोर-शोर से शुरू हो गया था। चाय-नाश्ते के थोड़ी सी देर पश्चात ही घर की महिलाएँ घर के स्वागत कक्ष में बिछे कालीन पर ढ़ोलक के साथ सुन्दर वस्त्रों में सज -धज कर बैठ गईं थीं, व मधुर लोक संगीत से समा बाँध दिया था। लड़की के दोनों मामाजी भात का सामान लिए सभी मेहमानों के बीच खड़े हो गए थे। एक तरफ़ मधुर लोक संगीत और एक तरफ़ कार्यक्रम की शुरुआत हो चुकी थी। मामाजी एक-एक कर सभी रिश्तेदारों का नाम पुकारते जा रहे थे,और उन्हें अपनी लायी हुई भेंट देते चल रहे थे। कन्या या फिर यूँ कह लीजिए अपनी भानजी के लिए लाया हुआ भात मामाजी ने अपने बहन व जीजाजी के हाथ में सौंप दिया था। भात का कार्यक्रम लज़ीज़ भोजन के साथ सम्पन्न हुआ था।

अगले दिन शहर की नामी मेहंदी वाली को बुलवाया गया था। हैं,तो उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले के रहने वाला यह परिवार पर निजी बसेरा दिल्ली में ही किया है, इन्होंने अपना। सो, अगले दिन ही जैसा कि हमनें बताया कि नामी मेहँदी वाली इस परिवार ने दिल्ली के हनुमान मंदिर से बुलवाई थी। बकायदा लेकर आये थे, कन्या के चचेरे भाई मेहंदी वाली को बस में। दिल्ली के कनाट प्लेस एरिया में ही हनुमान मंदिर है, यहाँ की मेहंदी लगाने वाले शहर के बेहतरीन मेहंदी लगाने वालों में से हैं।
मामी, चाची कन्या की माताजी व अन्य घर की सारी रिश्तेदार महिलाओं ने खूब खुश होकर संगीत के साथ मेहंदी का कार्यक्रम सम्पन्न किया। बेहद खुबसूरत मेहंदी लगी थी, सभी के हाथों में..और रची भी एकदम गहरी लाल थी। पर दुल्हन की मेहंदी का तो भई जवाब न था..हाथों व पैरों की मेहंदी बहुत गहरी और गाढ़ी लाल रची थी, एकदम काली सी ही हो गई थी। सबने बिटिया की मेहंदी की बेहद तारीफ़ करी थी,और हमनें तो कन्या की बुआजी को कहते भी सुना था,”हमनें इतनी गाढ़ी लाल मेहंदी किसी की भी आज तक नहीं देखी। क्यों न हो भाग्यशाली जो है”।
मेहंदी ,भात सब हो चुका था… आज का ही तो ब्याह है। महीना तो यह गर्मियों का ही था,पर लड़की वालों ने व्यवस्था उसी हिसाब से करवाई थी। आज तो पूरे ही रिश्तेदार घर पर आ गए थे। मेहमानों और बारातियों के रुकने का इंतज़ाम किराए की पूरी तरह से व्यवस्थित कोठी में किया गया था। वहीं पर हलवाई लगा दिया था, जो घर व पूरे मेहमानों व बारातियों के लिए भोजन की वयवस्था कर रहा था।
बिटिया का ब्याह हरियाणा के परिवार में तय किया गया था। परिवार था तो हरियाणा का, पर यह लोग रहते इंदौर में थे,सो बारात भी इंदौर से ही आनी थी। लड़की के पिताजी ने बारातियों के दिल्ली आने से वापिस इंदौर जाने तक का रेल का पूरा इंतेज़ाम कर रखा था। बाराती समय से इंदौर से दिल्ली आ चुके थे।
बिटिया को भी शाम होते ही तैयार होने ब्यूटी पार्लर ले जाया गया था।
ब्याह का पूरा इंतेज़ाम बैंक्वेट हॉल में किया गया था। हम सब और सभी रिश्तेदार तैयार होकर समय से बैंक्वेट हॉल पहुँच गए थे…बारातियों का स्वागत जो करना था। हम सब हाथों में माला लिये बैंक्वेट हॉल के बाहर बारातियों के स्वागत के लिए तैयार खड़े थे। “वो देखो भई!आ गए बाराती नाचते गाते …घोड़ी पर सवार दूल्हे राजा तो एकदम फ़िल्म के हीरो जैसे लग रहे थे”। पूरे रीति-रिवाज़ों के साथ बाराती बैंक्वेट हॉल में अंदर लाये गए थे। शादी का समारोह बेहद धूम-धाम और बिना किसी अड़चन के संपन्न हुआ था।कन्या के पिताजी ने कन्या को ढ़ेर सारा सोना और दहेज दिया था।
ब्याह का समारोह बखूबी ढँग से सम्पन्न हुआ था…बिटिया रानी अपने नए देश माँ, बाबुल और अपने भाइयों व रिश्तेदारों के आशीर्वाद के साथ विदा हो गईं थीं।
To be continued…..