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ज़रूर -ज़रूर कोई विस्फोट होगा !

महान पुरुषों के पूर्वापर की चर्चा !

भोर का तारा -नरेन्द्र मोदी.

उपन्यास-अंश;_

हवाई पट्टी पर खड़े अमित को मैंने उतरने से पहले ही देख लिया था !

वह अकेला न था . उस के साथ उस के चुनिन्दा लोग,लीडर ,समाज-सेवी और जा-बाज़ …स्वयं सेवक मौजूद थे ! वह नेक और जुझारू इरादों से लबालब भरा था ! वह आज दो-दो हाथ करने आया था ! वह आए उस दैत्याकार भू-कंप से जूझने को तैयार खड़ा था ! एक शक्ति-पुंज-सा अमित उस दिन मुझे बहुत भला लगा था !

मैं भी स्वयं में धन्य हुआ लगा था ! मैंने जो भी अब तक अमित को सिखाया-पढ़ाया था …उस ने उसे मूर्त कर के दिखा दिया था ! अमित में एक आग थी – ठंडी एक आग थी -उस में ….जो मुझे देश -हित के लिए हितकर लगी थी ! यही कारण था कि मैं …अमित को ले कर बहुत आशावान था ….स्वस्थ था !

“भाई …जी ….!!” गर्रा कर रोया था,अमित . वह मेरी बांहों में समां गया था . मैंने भी उसे सीने से चिपका लिया था . “बर्बाद …हो…गया …,भाई जी ….सब ….!!” उस ने उल्हाना दिया था . “लोग …….” वह सुबक रहा था .

“फिर से बसा लेंगे…..सब ….,अ-मि !” मेरे भी होंठ काँप रहे थे . मैं भी उस के साथ रो पड़ा था . सबब भी रोने का ही था . “फिर से ….बनाएंगे ….सब ….!!” मैंने अमित की पीठ ठोकी थी . “तुम जैसा श्रष्ठा …जहाँ हो …वहां ….तो ….” मैं कुछ कहते-कहते रुक गया था .

मैंने जमा लोगों को भी देखा था . वो सब भी मुझ से मिलने-भेंटने के लिए …बे-ताब थे ! अपने भरत-मिलाप से लौट अब हम दोनों …अपने लोगों से मिले थे !

“चीफ मिनिस्टर की तो नींद ही नहीं खुली है …..?” मिलने आए लोगों में से एक बता रहा था .

“चोर है, ये आदमी ….! लूट कर खा गया ,गुजरात को ….! अब कहते हैं- बीमार है ….!!”

“हम तो स्वस्थ हैं, पंडित जी ….? चलो ! देखते हैं – क्या करना होगा ….?” मैंने तनिक गंभीर स्वर में कहा था . “वक्त शिकायतों का नहीं ….सेवाओं का है ! देखते हैं- लोगों को क्या चाहिए ….? देखते हैं ….कि …..”

“मैंने सब संजोलिया है,भाई जी !” अमित बीच में ही बोला था. “मैं आप का दिमाग जानता हूँ . मैंने उसी के अनुसार सब व्यवस्था बो डाली है ! आप चल कर देख लें ….”

और मैंने देखा था कि …अमित ने …वास्तव में ही उजड़े लोगों को बसाने की पूरी व्यवस्था कर डाली थी . पानी,भोजन ,दवा-दारू ….और आने-जाने की पूर्ण व्यवस्था …उस ने कर ली थी ! उस के स्वयं सेवक चारों ओर काम में लगे थे . उस के आदेश-निर्देश चारों ओर हवा में गूँज रहे थे !

अमित ने केम्प लगवाए थे . अमित ने सहायता केंद्र स्थापित करा दिए थे . उस ने संचार व्यवस्था को नया रूप दे दिया था . उस का गिरोह त्रसित और घायल लोगों को …भू-कंप के बे-रहम जबड़ों से निकाल -निकाल कर सुनिश्चित स्थानों पर ले जा रहा था .

लग रहा था – मानवीयता का अनूठा मेला …वहां लगा था . दुःख बांटे जा रहे थे . सुख प्रदान किए जा रहे थे . पीड़ा में साझा हो रहा था . प्यासे को पानी और भूखे को रोटी मिल रही थी . वहां डाक्टर थे. वहां सेवक थे . की व्यवस्था में फिर से जीने का इरादा था ! आशा थी. अनुराग था….और था -अपनत्व !!

लोग अकेले नहीं थे ! यह बात भी अमित ने सिद्ध कर दी थी !!

और मैं ….? अमित का आभारी था ….!!

चाय पीते-न-पीते …पूरे प्रदेश का नज़ारा …मेरी आँखों के सामने आ कर ठहर गया था !

सत्ता के लिए होते संघर्ष का वह वीभत्स द्रश्य मेरी आँखों के सामने कई पलों तक खड़ा रहा था ! पार्टी में अपनी धाक जमाने के बाद केशू भाई पटेल ने एक तरह से तो …. पूरे गुजरात को अपने नाम लिख लिया था ! चूंकि पटेलों का वर्चस्व था …और केशू भाई उन के अगुआ थे …अतः गुजरात एक तरह से …पटेलों के ही नाम लिख गया था !

शंकर सिंह बघेला अपनी पहुँच और पकड़ का ….जिक्र करते भी …तो उन्हें चुप करा दिया जाता ! महता की आवाज़ भी नीची ही रहती !!

“आप अपने आप को गुजरात का महाराजा मानते हैं ….?” मैंने यूं ही एक दिन केशू भाई के सामने मुंह खोला था . “अपने सिवा ….आप को ….”

“तो …..? तुम हो कौन,भाई……???” गरजे थे , केशू भाई . “दो टेक के आदमी हो,महाशय .” उन्होंने मुझे धमकाया था .

“और इसी दो टके के आदमी के बल पर पार्टी ने चुनाव जीता है ….?” मैंने उन्हें याद दिलाया था .

“बकते हो ….! तुम्हें घमंड हो गया है ….? मोदी…! मैं तुम्हारे दांत भी कील दूंगा ….” उन्होंने एलान कर दिया था .

और सच में ही उन्होंने मेरे लिए मुशीबतें खड़ी कर दीं थीं !!

एक साथ सारे पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की निगाहें …मेरी ओर घूम गईं थीं ! एक साथ मेरे अब तक के किए-धरे पर पानी फिर गया था ! एक साथ मैं ….एक गुनहगार-सा साबित हो गया था ! एक साथ ….एक पल में मैं नायक से खल-नायक बन गया था !

अमित का बताया एक-एक तथ्य मेरी समझ में समां गया था !!

“ये लोग ….न देश के हैं …न ही प्रदेश के !” अमित की राय थी . “न ये राजनेता हैं ….और न ही राजनीतिज्ञ हैं ! ये कोरे सठ हैं ! स्वार्थी हैं. पेट-भक्त हैं . सत्ता के भूखे भेडिए हैं . समाज में कोई मरे ….कोई जिए …इन की बला से ….! इन का अपना स्वार्थ ही …इन के लिए …सब कुछ है . ये अपने यारों-प्यारों को ही …सब कुछ सौंपना चाहते हैं ! परिवारवाद इन की नस-नस में …समाया हुआ है ! ये अपने से आगे …एक गज भी नहीं देखते हैं !” अमित उद्विग्न था. “इन्हें तो हटाना ही पड़ेगा,भाई जी …..?” उस का सुझाव था .

“वक्त को तो आने दो,अमित ….!” मैंने उसे शांत स्वभाव में बताया था . “हर कुत्ते के दिन आते हैं !” मैंने भी रोष जाहिर किया था .

“बघेला का षड़यंत्र चल रहा है ….!” अमित ने सूचना दी थी . “फिर पछाड़ेगा ….इसे …..?”

“चलने दो …..!!” मैंने बे-बाक ढंग में कहा था . “हमें …कभी भी इस तरह के षड़यंत्र नहीं रचने हैं , अमित ! हमें तो देश और प्रदेश दोनों के प्रति ….ईमानदार रह कर काम करना है ! न देश पराया है ….न प्रदेश अपना है ! ये सब सत्ता का सपना है,मित्र ! इस में पड़ कर कभी राह नहीं भूलेंगे …. बस इतना भर याद रखना ….!” मैं मुस्कराया था .

“चोर पीछे के दरवाज़े से घुस आया है,नेता जी !” केशू भाई पटेल को सूचना मिल गई थी . “आप के काटे का इलाज़ भी उस ने खोज लिया है !” केशू भाई के ख़ास आदमी – मीनू पटेल ने उन्हें सूचित किया था . “पूरे प्रदेश में उसी की जय-जयकार हो रही है !” उन के कानों तक आवाज़ पहुँच चुकी थी !

राजनीती का दंगल भी तो अजब-गज़ब होता है ….? सत्ता के सूत्र भी तो बहुत ही बारीक होते हैं ….? कब …कौन-सा पेंच ढीला हो जाए ….कसनेवाले को भी ज्ञात नहीं रहता ….? और अगर तनिक-सी भी निगाह घूम जाए …..तो ….? गज़ब ही हो जाता है ….!!

“इसे सूचना किस ने दी ….?” केशू भाई पूछ रहे थे .

“अमित शाह ने ….!” मीनू ने बताया था . “यही …अमित शाह तो इस का चहेता है ….? आप की नब्ज़ भी उस के हाथ है ?” मीनू ने स्पष्ट कहा था .

“लेकिन ….कैसे ….?” अब की बार चौंके थे ,गुजरात के मुख्य मंत्री . “मैंने तो पूरी सावधानी के साथ ….इसे ..प्रदेश से बाहर करा दिया था ….! फिर …..?”

“अमित शाह के यहाँ रहते …..मोदी का प्रदेश पर हक़ बना ही रहता है ! वह आज भी लोगों के मनों पर छाया हुआ है ! चुनावों में नहीं देखा था …..?”

“पण …वोट तो हमारे नाम पर गिरा था ….?” मुख्य मंत्री बोले थे .

“नहीं ….!” मीनू बता रहा था . “वोट भी मोदी के इशारों पर ही गिरा था ….! और वोट अमित शाह के स्वयं सेवकों के इशारों पर …गिरा था ! लोग …….”

“बकते हो,तुम ! !” बिगड़ गए थे, मुख्य मंत्री . “घूस …खा गए हो …..?” उन का प्रश्न था . “आज से मत आना ,तुम ….मीनू …..” वह क्रोधित थे .

और तख्ता पलट गया था -केशू भाई का …….!!

तन्हाई के एकांत में बैठा अमित रह-रह कर आते हवा के झोंकों से एक दुश्मन की तरह जूझ रहा था ! आज ये हवा क्यों सता रही थी-उसे …..?

“भीतर बैठे रहो ! बाहर नरेन्द्र मोदी का तख्ता पलट जाएगा ….!!” उसे चेतावनी मिली थी . ” हिन्दू-मुस्लिम डिवाइड ….और नरेन्द्र मोदी के दिए पुलिस को आदेश ….सब ले कर डूब जाएंगे,बंधू ! आज भी यही सिद्ध किया जा रहा है …कि …नरेन्द्र मोदी दोषी है ! उसी ने पुलिस को कहा था कि …हिन्दूओं को बदला लेने दिया जाय ….मुसलमानों को मारा जाए …प्रदेश को मुस्लिम-मुक्त बनाया जाए …..और ….”

“कौन है -ये …जो ….?” अमित ने बौखला कर पूछा था .

“शाहरुख ……!”

“कौन शाहरुख …..?”

“जस्टिस शाह आलम की बेटी ! स्वयं जस्टिस शाह आलम ….और उन का वही गिरोह ….तीस्ता ….और वो पूरा एन जी ओज का …गिरोह ………!!”

खतरा इतना बड़ा और भयंकर था कि ….अमित शाह को चक्कर आ गया था !

“कितनी गहरी जड़ें जमा लीं हैं ……इन एन जी ओज ने ….और जस्टिस आफ्ताव आलम ने ….? एक पढ़े-लिखे विद्वान् जज की हैसियत रखनेवाले इंसान …..इतना गिर कर सोचेंगे ….वह हैरान था ! वह हैरान था कि …हिन्दूओं के प्रति ….किस तरह एक सोची-समझी मुहीम चल रही थी …? शाहरुख जैसी मुसलमान महिलाओं को बहका कर ….इन षड़यंत्रकारीओं ने ….बम-गोलों की तरह तैयार कर लिया था ! !

ज़रूर-ज़रूर कोई-न-कोई बम-विस्फोट होना था ! ज़रूर ही नरेन्द्र भाई को ….’बाई हुक ….और ….बाई क्रुक ‘ ये लोग जेल में डाल देंगे …..और अगर एक बार वो जेल चले गए ….तो ….गया -सब !!

सब किया-कराया मिटटी में मिल जाएगा …..?

………………………….

श्रेष्ठ साहित्य के लिए – मेजर कृपाल वर्मा साहित्य !!