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हम सब आज भी कांग्रेस के गुलाम हैं !

slaves

महान पुरुषों के पूर्वापर की चर्चा !

भोर का तारा- नरेन्द्र मोदी .

उपन्यास अंश :-

“पी एम् बनेंगे ….?” संजीव भट्ट बुदबुदाया था . “मई ब्लाडी ….फुट …!!” वह दहाड़ रहा था . “मेढकी ….भी नाल ..ठुकाएंगी ….?” उस ने व्यंगात्मक लहजे में स्वयं से कहा था . “देखता हूँ …जेल का रास्ता – तेरे लिए …! तलाशता हूँ …तेरे …लिए ….”

और संजीव भट्ट को रास्ता दिखाई दे गया था ! उसे उम्मीद थी कि अब की बार …वो अवश्य ही कामयाब हो जाएगा …? उस के दिमाग में …नियुक्त हुए – न्याय मित्र , राजू रामचंद्रन का चेहरा उभरा था ! उसे पता था कि कोशिश करने के बाद तो ……

“कोशिश करने के बाद तो आप की बात मानी जाएगी, चिप्पा साहब …?” संजीव भट्ट अब नासिर चिप्पा से चिपका बैठा था . नासिर चिप्पा भी जानता था कि संजीव भट्ट सोनिया का मूं लगाया भेडीया था .

“राजू रामाचंद्रन ..न्याय मित्र नियुक्त हुए हैं !” संजीव भट्ट ने बताया था . “आप का तो बहुत रिगार्ड करते हैं …? तनिक इशारा करें …कि …इसे लटकाएं ….?” संजीव भट्ट ने साफ़-साफ़ कहा था . “हम सब के होते-सोते …ये खुला घूम रहा है ….? और तो और …यह तो …पी एम् बनने की …घोषणा करने लगा है ….? सोचिए ….चिप्पा साहब ….”

नासिर चिप्पा का भारत से ले कर …अमेरिका तक रसूक था ! लोग उस की बात मानते थे . उस की बात में वज़न था …!!

“क्या कहूं ….?” चिप्पा साहब पूछ रहे थे .

“मैंने हलफनामा लगाया है ! मैंने कहा है कि …मोदी ने मेरे सामने …और सब के सामने ये कहा है कि …’हिन्दूओं को खुला छोड़ा जाए’ ताकि वो ….मुसलमानों से ….”

“चलो ! आप की बात रख लेते हैं,भट्ट साहब !” हंसते हुए चिप्पा बोले थे . “ये ….पी एम् बनने के लायक तो है नहीं …..पर “

संजीव भट्ट ने श्री नागेश से भी कहलवा दिया था . इस के बाद वह जानता था कि …राजू सहाब ..तीस्ता शीतलबाद की बात को दरकिनार न करेंगे ? सो वह सीधा शीतलबाद के दफ्तर गया था और … सारे-का-सारा मसौदा तैयार कर दिया था !

“मैं तो कब से तड़प रही हूँ कि …ये जेल जाए …?” तीस्ता शीतलबाद कहने लगीं थीं . “मैं तो आपके साथ हूँ,संजीव सहाब ! जो बनेगा – करूंगी ….” उन का वायदा था .

और…और हाँ ! शबनम हाशमी को न भूले थे , भट्ट साहब …? दमदार महिला थी और ….मोदी का तो नाम लेते ही कूदने लगती थी ! उन के साथ ‘संयत’ एन जी ओ के एक जौहर को भी साथ लगा दिया था . अब ये तीनों राजू रामाचंद्रन की जांन को आजाएंगे …भट्ट साहब जानते थे ! पत्रकार हिमांशु ठाकुर को …बता कर एक केस लिखने को कहा था …जिस में मोदी पर बदनाम करने वाले आरोप -प्रत्यारोप मढने का प्रयोजन था …? लिओ सरधाना तो संजीव भट्ट के गाढे मित्र थे …? उन्होंने तो जाते ही मोदी को गालियाँ पटकाना आरंभ कर दिया था …!

राजू रामाचंद्रन पर अब दबाब बढ़ने लगा था ….!!

“अरे, इत्ते लोग झूठ बोलेंगे ,क्या ….?” नासिर चिप्पा ने सीधा प्रश्न पूछा था , राजू रामा चंद्रन से . “कल को ये आदमी पी एम् बन गया तो ….?” उन्होंने कड़क स्वर में पूछा था . “लटका दो …इस भूत को, भाई सहाब …?” उन का आग्रह था .

“लेख पढ़ लो ….?” सरदाना का फोन था . “देखो ..! हिमांशु ठाकुर क्या कहते हैं …और क्या नहीं कहते …? अरे,सहाब ! ये आदमी बाहर घूम रहा है …आप के रहते हुए ….?”

न्याय-मित्र कुछ फैसला न कर पा रहे थे …?

“आप अपनी निष्पक्ष रिपोर्ट भेज दें कि ये आदमी …दोषी है ! इस ने मुसलमानों को बड़ी ही चतुराई से मरवाया ….और अब दूध का धुला बैठा है …?”शबनम हाशमी ने जोरदार शब्दों में कहा था .”देश उजड़ जाएगा , भाई जी ..?” उन्होंने चेतावनी भी दी थी .

“देखिए , सर ! मैंने तो अपनी ओर से सब लिखवा दिया है ….!” अब अंत में संजीव भट्ट ने …अपना मारक अस्त्र छोड़ा था .”मैंने शपथ-पत्र भी दिया है ?” बता रहे थे ,वह. “और ….और …सर …सच तो ये है …..कि सोनिया जी यह सब जानती हैं …? और मानती भी हैं …कि मोदी है -कसूरवार ! ‘गोधरा’ इसी का धरा ‘गोधन’ है …? और ये जो नर-संहार हुआ है …ये भी इसी की आँख के इशारे पर हुआ है ….? वरना तो …एक राज्य का मुख्य -मंत्री …..?’

“कोई और सबूत ….?” राजू रामाचंद्रन ने एक नई मांग सामने रख दी थी .

“मैं हूँ …ना ..ठोस सबूत ….?” सीना ठोक कर कहा था -संजीव भट्ट ने . “और फिर ….सोनियां जी …..पूरी-की-पूरी कांग्रेस पार्टी ….पूरा देश …यही तो कह रहे हैं कि ….ये दोषी है ….और झूठा ऐसा कि …..”

राजू रामाचंद्रन के जहाँ में पूरी कांग्रेस पार्टी का चित्र उभर आया था ! श्री संजीव भट्ट का बार-बार सोनियां गांधी का नाम लेना … भी एक इशारा था …उन के लिए …? उन का दिमाग इसी पक्ष पर आ कर ..अटक गया था …? उन्होंने एक मात्र संजीव भट्ट की गवाही को ही आधार मान कर …अपनी रिपोर्ट तैयार कर दी थी .

“अलग-अलग समूहों के बीच …शत्रुता फैलाने के मामले में …नरेन्द्र मोदी पर मुकद्दमा बनाया जा सकता है …? धारा १५३-ओ और धरा १५३ बी …तथा धारा १६६ आई पी सी …के तहत इस केस में …नरेन्द्र मोदी के खिलाफ …गवाह-सबूत मिलता है !” राजू रामाचंद्रन ने अपनी इस रिपोर्ट में अपना मत लिख कर एस आई टी को भेज दिया !

उस दिन संजीव भट्ट अपनी इस सामूहिक तिकड़म की कामयाबी पर खूब हंसा था . उस ने अकेले में अपनी इस कामयाबी का जश्न भी मनाया था …? उस ने माना था की इस भारत देश में …सब कुछ कर पाना संभव है …किसी को भी खरीद लेना संभव था …और यहाँ तक कि …सुप्रीम कोर्ट को भी …..

मुझे भनक लगी थी . मुझे चेतावनी भी मिली थी ! मुझे – जो शिफारिशें न्याय मित्र ने सुझाईं थीं – उन का ब्यौरा भी बताया गया था ! और ये संभव भी था कि …एस आई टी – राजू रामाचंद्रन की ही बात मानेंगे …? लेकिन वह तो सब न्यायविदों के बीच था …?

“क्या तैयारी करें ….?” मैंने अमित शाह से प्रश्न पूछा था . “अगर …..”

“मौत आने से पहले ही …चिता चिन लें ….?” अमित शाह ने चुटकी ली थी . “आने तो दो,रिपोर्ट को,भाई जी ….?” वह मुझे सुझा रहा था .

कांग्रेस पार्टी में जगह-जगह जश्न मनाए जा रहे थे ! संजीव भट्ट ने सब को सूचनाएं भेजीं थीं . बताया था कि …अब बचेगा नहीं ….? सो कॉल्ड …’पी एम्’ जेल में जाएगा ….!!

“अच्छी रिपोर्ट भेजी है,राजू ने !” गृह मंत्री ने सोनियां जी को भी सूचना भेज दी थी . “ये …आदमी …संजीव भट्ट …बहुत काम का है , मैडम !” उन का इशारा था .

“इस का ख़याल रखना ,भाई ….?”

“जी,मैडम ….!!”

हवा गरम थी . अखबारों में फिर से लेख आने लगे थे . फिर से पूरा माहौल गरम होने लगा था ….!!

तीस्ता शीतल बाद का वकील मिहिर देसाई था …और टाईम्स ऑफ़ इंडिया का …वरिष्ट सम्पादक – मनोज मिटता लगातार अब …संजीव भट्ट के संपर्क में थे . मनोज मिटता ही था जिस ने …संजीव भट्ट का झूठा शपथ -पत्र तैयार किया था …और सुप्रीम कोर्ट में दाखिल किया था . इस पत्रकार ने मोदी को शिकस्त देने के लिए पत्रकारिता की सारी गरिमा को ताक पर रख दिया था ….? इस शपथ-पत्र में यही लिखवाया था कि …संजीव भट्ट मुख्य मंत्री नरेन्द्र मोदी के आवास पर हुई बैठक में शामिल था …!!

मेरे विपक्षियों के खेमों में अब घी के दीपक जल रहे थे ….!!

“आप की पी एम् बनाने की घोषणा ने तो ..पूरे विश्व को …हिला कर रख दिया है, भाई जी ….?” अमित हंस रहा था . “मुझे भी यही उम्मीद थी कि …..”

“सारा जग बैरी हो जाएगा ….?” मैंने चिढ कर कहा था . मैं अप्रसन्न था . ना जाने क्यों आज मुझे अफ़सोस हो रहा था कि …जिन लोगों के लिए मैं अपनी जांन लड़ा रहा था …अब वही लोग मेरी आगवानी काटने में …जुटे थे …? जैसे मैं पी एम् बनते ही सब के हिस्से का …ले भागूंगा …? मैंने अमित को उल्हाना दिया था ! “उम्र गुजारदी …मैंने ….” मेरा गला रुंध गया था .

“आप की जितना मिला है,भाई जी ….और किसी को नहीं मिला ….?” अमित की आवाज़ बुलंद थी . “इतिहास है ….ये इतिहास है कि …जो प्यार जनता मोदी को दे रही है ….वो प्यार और किसी को भी नहीं मिला ….?” वह बता रहा था . “सियासत के दाव-पेंच तो चलेंगे ही ….?” उस ने स्पस्ट कहा था .

“कांग्रेस …….?” मैंने कहना चाहा था .

“कहीं नहीं पहुंचेगी, कांग्रेस …..?” अमित ने तो कांग्रेस का सफा ही फाड़ दिया था . “अब उल्लू नहीं बनेगे ….लोग …?” उस का एलान था .

एस आई टी की रिपोर्ट आ गई थी ! मैं सिहर उठा था ….!!

“ये ,लो !” अमित ही था . “दूध -का-दूध ….और पानी-का-पानी ….?” वह उछल रहा था . “सब साफ़-साफ़ लिखा है …!” वह कह रहा था .

“क्या लिखा है ….?” मैंने पूछा था .

“यही कि …संजीव भट्ट के ई -मेल … ,मोबाईल …और कंप्यूटर की जांच …से पता चला कि …संजीव भट्ट …तीस्ता शीतल बाद …टाईम्स ऑफ़ इण्डिया का एक वरिष्ठ पत्रकार …कांग्रेस के बड़े स्थानीय नेता ….पूरी कांग्रेस कमेटी …और कई और भी पत्रकार …और एन जी ओ कर्मी …लगातार एक-दूसरे से संपर्क में थे ….”

“ये कैसे हुआ ….?” में अब आश्चर्य चकित था . एक बार फिर मेरा प्यार अमित के लिए उमड़ आया था ! “तूने …….? ये सब ….तू-ने ….?” मैं बोल ही नहीं पा रहा था .

“अपना पक्ष रखेंगे नहीं …तो बचेंगे …कैसे ….?” अमित सहज था . “मुझे इन की कारगुजारी का एक-एक पल …याद है …दर्ज है ….रिकॉर्डिंग पर है …” वह मुझे सूचित कर रहा था . “और आगे भी तो देखिए कि एस आई टी …कहता क्या है ….?”

“क्या कहता है ….?”

“कहता है – संजीव भट्ट …और इन के कथित साथी …राजनैतिक दल के नेता …सुप्रीम कोर्ट और एस आई टी को …अपने लक्ष-साधन के लिए …एक फोरम के रूप में …इस का प्रयोग करना चाहते हैं ! संज्रीव भट्ट अपने निजी स्वार्थ के लिए …किसी भी हाल में …गुजरात राज्य के मुख्य मंत्री नरेन्द्र मोदी के खिलाफ …चार्ज शीट दाखिल कराना चाहते हैं !” अब अमित ने मुझे मुड कर देखा था .

“संजीव भट्ट ही क्यों ….कहो कि …पूरी कांग्रेस पार्टी …कठमुल्लावादी …सेक्युलर जमात …वामपंथी बुद्धिजीवी …एन जी ओ गिरोह …और समूची मीडिया …भी नरेन्द्र मोदी के खिलाफ …बस एक चार्ज -शीट चाहती है …..!” मैंने अमित के चहरे को पढ़ा था . “कितना अफ़सोस है, अमित …कि …हम सारा देश …हमारा समाज ….ना जाने क्यों …इस गुलामी के धरातल से ऊपर उठाना ही नहीं चाहता ….?” मेरी आवाज़ दरक आई थी . “हम सब आज भी …कांग्रेस के गुलाम हैं !!” मैंने एक फैसला जैसा सुना दिया था .

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श्रेष्ठ साहित्य के लिए – मेजर कृपाल वर्मा साहित्य !!