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दिल्ली -गुजरात की बिल्ली को नहीं पकड़ पाएगी ?

नरेन्द्र मोदी

महान पुरूषों के पूर्वापर की चर्चा !

भोर का तारा – नरेन्द्र मोदी .

उपन्यास -अंश :-

कानून शब्द सुनते ही हमें पुलिस की लाठी सर पर आती दिखाई दे जाती है !

फिर हम भागते हैं . किसी क़ानून-विद के पास जा कर …दम लेते हैं . ‘बचाओ,वकील सहाब ?’ हम गुहार लगाते हैं . ये उसी तरह है जिस तरह कि …एक रोगी डाक्टर के पास भागता है ? उसी तरह हर गुनहगार भी एक वकील के पास पहुंचता है . और उस के बाद ……..

“मरेगा,डाक्टर साहब ….?” ‘कह नहीं सकता ‘ डाक्टर का आम उत्तर होता है !

“बचेगा,वकील सहाब…?” ‘बता नहीं सकता ‘ वकील हाथ झाड कर कह देता है !

राजनीति के रोग से ग्रस्त और निर्णय-अनिर्णय के श्राप से बना अभियुक्त -आदमी तो समझ ही नहीं पाता कि …वह कहाँ जाए ….क्या करे ….? उस का तो केवल राम ही रखवाला होता है ! न कोई दोस्त …न कोई …दुश्मन ..न कोई यार और न कोई सौहार्द …उस का सहारा बनता है ? मात्र एक सौदेबाजी सामने आती है . ‘गिव एंड टेक’ का सीधा समीकरण सामने आता है . और अगर आप चूके …तो गए …..!

वह दिन मुझे याद है जब मैं गुजरात राज्य का मुख्य मंत्री बना था ! उस दिन से ले कर आज तक कांग्रेस पार्टी का रुख मेरी ओर वही है – जो एक दुश्मन के लिए होता है ! मुझे कांग्रेस ने ‘एनिमी ऑफ़ स्टेट’ जैसा कुछ बना कर …देश के सामने अपमानित होने के लिए फ़ेंक दिया है ! मेरे खिलाफ जो भी भला-बुरा है …कहा जाता है ! जो भी इल्जाम इन के पास हैं …सब मुझी पर लगा दिए जाते हैं और केंद्र के पास जितनी भी …आय-बालाएं हैं – सब मेरे पीछे लगा दी गईं हैं !

“पकड़ो – इसे …..!” फरमान जारी है . “जेल भेजो – इसे ….!!” आदेश हैं .

ये देखिए …! राज्य …मेरा मतलब ..कि गुजरात राज्य की गवर्नर श्रीमती कमला बैनीवाल के दिए आदेश …? इन्होने अवकाश प्राप्त – जस्टिस रमेश अम्रतलाल मेहता …यानी कि आर एस मेहता को …गुजरात राज्य का लोकायुक्त नियुक्त कर दिया है ! मैं गुजरात राज्य का मुख्य मंत्री हूँ …लेकिन मुझे पूछा तक नहीं गया …? मेरा एक ही अनुमान है कि केंद्र द्वारा ये मेरे गले में एक …ऐसा नाग-फांस डाला है …जो मुझे अब जीने न देगा ….और अंत में मार कर ही दम लेगा ….?

आप इन अवकाश प्राप्त जस्टिस रमेश अम्रतलाल मेहता को नहीं जानते …न ? लेकिन मेरे लिए तो ये नाम – उस व्यक्ति का नाम है जो – २००२ के गोधरा काण्ड से ले कर आज तक …मेरी दुम दबाता चला आ रहा है ? वर्ष २००२ में दंगों के बाद …इन्हीं श्री मेहता ने गुजरात सरकार के खिलाफ राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष से मिल कर …शिकायत की थी ….और …विभिन्न एन जी ओज के मंच से …अन्य बुद्धिजीवियों की तरह …इन्होने भी मुझे ही ….गोधरा नर-संहार के लिए जिम्मेदार ठहराया था ! और यहाँ तक बतादूँ कि …एन जी ओ ‘जन संघर्ष’ मंच ने ही जस्टिस मेहता का नाम …गुजरात दंगों की जांच के लिए …बने आयोग के अध्यक्ष पद के लिए …जस्टिस शाह के निकल जाने के बाद ….सुझाया था ! लेकिन वो आयोग जस्टिस नानावती को मिला था …और इसे नाम भी ‘जस्टिस नानावती आयोग’ ही मिला था .

और तो और ….सन २००७ में …एन जी ओ ‘आतंक विस्थापित हक़ रक्षक समिति’ ने जनता दरवार लगाया था ! इस जनता दरवार में ..इन्हीं जस्टिस मेहता ने …गुजरात सरकार को जी भर कर कोसा था …खूब ही लताड़ा था ….बदनाम भी किया था ….और बताया था कि दंगों में विस्थापितों के पुनर्वास का मोदी का दावा झूठा है ! ये आदमी ही झूठा है ….!!

अभी-अभी ..२०११ में …एन जी ओ ‘अनहद’ द्वारा आयोजित ‘जन सुनवाई ‘ में इन जस्टिस मेहता सहाब ने …फिर से कहा है कि …गुजराती मुसलमानों में …असुरक्षा की भावना …के न होने का राज्य सरकार का दावा …बे-बुनुयाद है ….झूठा है ! मुसलमानों में आज भी २००२ के ही समय की असुरक्षा मौजूद है ! वो डरे हुए हैं ….!!

गुजरात में २००६ में आई बाढ़ का ठीकरा भी इन्होने गुजरात की सरकार के सर पर ही फोड़ा था …? कहा गया था – बाँध में पानी अधिकाधिक बढ़ा दिया गया था – अतः बाढ़ आई ….?

हम क्या करें ….? सुप्रीम कोर्ट में हमने भी अपना पक्ष रख दिया है !

अहमदाबाद के एन जी ओ ‘नेशनल कौंसिल फॉर सिबिल लिबर्टी ‘ के वरिष्ठ वकील – सोली जे सोराबजी के ज़रिए सुप्रीम कोर्ट के समक्ष आरोप आता है कि ये जस्टिस मेहता …लोकायुक्त के रूप में निष्पक्षता के साथ अपना काम नहीं कर पाएंगे ! ये एक एन जी ओ – ‘सेंटर फॉर सोसल जस्टिस ‘ के ट्रस्टी भी हैं ? इस लिए गुजरात राज्य की याचिका वाजिब है !

लेकिन कोई माने तब ना …..?

गुजरात राज्य ने सुप्रीम कोर्ट में जज जस्टिस बी एस चौहान और जस्टिस ऍफ़ ऍफ़ इब्राहीम ..कलिफुल्ला की पीठ में गवर्नर कमला बैनीवाल के आदेश के विरुद्ध न्याय माँगा था . गुजरात सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता के के वेणुगोपाल ने दलीलें पेश कीं थीं . कहा था – गवर्नर ने ये फैसला अपनी मर्जी से लिया है ! राज्य के मुख्य मंत्री को तो पूछा तक नहीं गया ….? ये संविधान के अनुच्छेद १६३ में निहित गुजरात लोकायुक्त अधिनियम १९८६ की धारा -३ का उल्लंघन है ! इस में मुख्य मंत्री और उन के मंत्री-मंडल से परामर्श नहीं किया गया …?

खूब रोने-धोने के बाद भी हुआ वही जो दिल्ली दरबार को दरकार था ….?

सुप्रीम कोर्ट ने कहा – गुजरात की राज्यपाल कमला बैनीवाल ने लोकायुक्त के रूप में …जस्टिस मेहता की नियुक्ति गुजरात राज्य के मुख्य न्यायाधीश से परामर्श करने के बाद की थी . इस का प्रावधान संविधान में है !!

राजनीति के पंडित इस प्रसंग को …राज्यपाल कमला बैनीवाल के ज़रिए …कांग्रेस आलाकमान द्वारा …खेली गई चाल बता रहे थे ….और बता रहे थे कि …इस के बाद मुख्य मंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ….मुंह धो कर घर जाएंगे ….?

दिल्ली ने गुजरात राज्य की बिल्ली को पकड़ने के लिए ये नया जाल बुना था ….?

क़ानून का ये खेल बहुत बुरा होता है , श्रीमान !

बहुत निराश हुआ था , मैं ….! मुझे लगा था कि …कितना ही समर्थ क्यों न हो आदमी – पर इस अंधे क़ानून के काबू आ ही जाता है ? कुर्सियों पर बैठे जजों का एक अलग ही दींन -ईमान है ! उन्हें किसी की मौत या जिन्दगी दिखाई नहीं देती . उन्हें केवल क़ानून की धाराएं …और उन के अनुच्छेद ही याद रहते हैं ? जनता के मरने-जीने से उन का कोई सरोकार नहीं रह जाता …?

अमित आया था ! मैंने बरबस आँखों में आनेवाले आंसूओं को रोक लिया था . उस के हाथ में अखबार लगा था . मैं जानता था कि उस में क्या लिखा था ? लेकिन जो अमित के चहरे पर लिखा था – वह तो कुछ और ही था …?

“हार गए …..?” मैंने सीधा ही तीर छोड़ा था . आज मैं बहुत व्यथित था .

“कौन कहता है ….?” अमित ने गरज कर प्रति प्रश्न किया था .

“सुप्रीम कोर्ट ….?” मैंने भी उत्तर दिया था .

“लेकिन जस्टिस रमेश अम्रतलाल मेहता क्या कहते हैं – ये आप नहीं जानते ….?” अमित ने कुर्सी पर बैठते हुए कहा था . “ये पढ़िए ….? आप के लिए ही लाया हूँ ! मैं जानता था कि …आप ..शर-शैया पर लेटे होंगे ….और ….”

मैं अब अखबार पढ़ रहा था ! पढ़ता ही जा रहा था ! मोटे-मोटे अक्षरों में लिखा था – जस्टिस रमेश अमृतलाल मेहता का इनकार ! और आगे लिखा था – कि उन्होंने स्वयं ही गुजरात राज्य का लोकायुक्त नियुक्त होने से इनकार कर दिया है !!

मैं हैरान था ….! मैं परेशान भी था !! और अब मैं अमित शाह को …सराह रहा था – जो श्रेष्ठ था …….परमप्रिय था ….और पाजी भी था ….!!

“ये ,क्या किया रे …….?” मैंने गदगद हो आई आवाज़ में पूछा था . मेरा हिय उमग आया था . मेरा मन था कि मैं अमित का माथा चूम लूं ….?

“मैंने क्या किया ….?” वह बिफर-सा गया था . एक्टिंग कर रहा था – मैं जानता था . “म …म …मैंने तो ….?” उस ने मुझे शरारती निगाहों से घूरा था . “केवल …एक …बेहद मासूम-सा ….अपराध …..” बताने लगा था ,वह .

“क्या …..?” पर मैं तो अधीर था .

“मेहता के कान में चुपके से कहा था – ‘जानते हो अगला पी एम् कौन बनेगा ….?’ और फिर कहा था -‘मोदी ! नरेन्द्र मोदी देश का अगला पी एम् बनेगा, मेहता सहाब !!’ बस ! मैं उठ कर चला आया था .” अब हंसने लग रहा था -पाजी ?

“के…व…ल सूचना ….पाने से ही …..?” मैंने बात का विरोध किया था .

“आप यही तो नहीं समझते हैं, भाई जी ….?” अमित उमड़ आया था . “ये नाम ‘गांधी’ ….ही तो देश को खा गया ….? मेहता मेरी बात सुनते ही घबरा गया ….डर गया ….! ‘डर’ …नाम का डर …भी एक कारगर हथियार है, भाई जी ….? मेहता आप को जानता है ….मुझे भी जानता है ….? और अब ये भी जानता है कि ……..”

“कि ………?”

“कि …अब ये अखबार बोलेगा ….?’ अमित बताने लग रहा था . “ये अखबार अब पूरे देश में ढोल पीट-पीट कर मुनादी करेगा ….कि ….’दिल्ली – गुजरात की बिल्ली को नहीं पकड़ पाएगी …?’

क्यों कि …गुजरात में ..बब्बर शेर …आ बैठा है ….??????

हंस रहे थे – हम …..!!!

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श्रेष्ठ साहित्य के लिए -मेजर कृपाल वर्मा साहित्य !!