Posted on

चोर के पैर नहीं होते तो झूठ का सर नहीं होता ?

जासूसी

महान पुरुषों के पूर्वापर की चर्चा !

भोर का तारा -नरेन्द्र मोदी .

उपन्यास अंश :-

२०११ का समय चल रहा था ! गुजरात में सुलगे लाक्षाग्रह -२००२ के गोधरा काण्ड की आग बुझाने लगी थी . अब उस का कहीं धुआं भी उठता दिखाई न देता था ! कहा जा रहा था कि मोदी ने बड़ी ही उस्तादी के साथ …मुसलमानों को मनालिया था ! और न जाने कौन से लालच का लेप लगाया था कि …मोदी के खिलाफ कोई भी बोलने को तैयार न था …?

लेकिन दिल्ली में नए ज्वालामुखी धधक उठे थे !!

“मैंने पहले ही चेतावनी दी थी ,सर …कि इस अमित को आजन्म जेल में ही रखा जाए …?” संजीव भट्ट -आई पी एस की आवाज़ में रोष था. वो निराश थे . “गढ़े मुर्दे उखाड़ रहा है ….? बफोर्स को ले कर फिर से राजीव जी पर हमला हो रहा है ! कांग्रेस को बदनाम किया जा रहा है …ताकि …” उन का स्वर तनिक और ऊंचा हुआ था था ताकि …उस की पुकार को ज्यादा-से-ज्यादा जमा कांग्रेसी सुनें ?

भय और आतंक की हवा पर बैठा -अमित शाह …सब के सामने बार-बारी डोल गया था ! उस का विकल्प अभी तक कोई भी कांग्रेसी नहीं निकाल पाया था …?

“अब तो वह मैडम का नाम भी खुले आम ले रहा है,भाई जी …?” गुजरात के कांग्रेसी नेता -शक्ति सिंह गुहिल के स्वर भी तीखे थे . “इटली से जोड़ता है ….बफोर्स को ….और कहता है …कि …” वह ठहरा था . अब एक और नया डर आ कर सामने खड़ा हो गया था .

नरेन्द्र मोदी और अमित शाह ….दो गुजराती जैसे दिल्ली को दहलाए दे रहे थे ….?

“चुनाव आ रहे हैं , बारह के ….?” होम मिनिस्टर चिदम्बरम बोले थे . “कैसी तैयारियां चल रही हैं ….?” उन का प्रश्न था . “दफना दो ….अब की बार …..? न रहेगा बांस …ना बजेगी …बांसुरी ….?” उन्होंने तनिक मुस्कराने का प्रयास किया था .

“सर! इस अमित शाह ने एक नया ही शगूफा छोड़ा है ….!” शक्ति सिंह गुहिल ने एक और भी नया डर दिखाया था .

“क्या ….?” चिदाम्बरम चौंक गए थे .

“कहता है – कांग्रेस -मुक्त गुजरात ….?” शक्ति सिंह की आवाज़ ऊंची थी जिसे हर किसी ने सुना था .

एक चुप्पी छा गई थी ! संकट जैसा कुछ आरम्भ हो गया था ! वास्तव में यह तो पहली बार ही …कांग्रेस के इतिहास की … एक घटना थी जहाँ …एक अदना-सा आदमी …कांग्रेस मुक्त गुजरात की बात कर रहा था …? कांग्रेस -एक पार्टी जिस ने देश को आज़ादी दी …देश को क्या-क्या नहीं दिया ….आज सभी को मरणासन्न दिखाई दे रही थी …? रोमांच था …रौगटे खड़े थे ….कांग्रेसिओं के …जो उस के नाम पर पल रहे थे …शाशन कर रहे थे ….कमाई खा रहे थे ….और ….

“कल को ये कहेगा – कांग्रेस मुक्त भारत …..?” गरजे थे – नए नेता ,ओम धवन . “और कल को कहेगा – हटाओ सोनिया …लाओ …मोदी ….और ….”

“तुम कह तो रहे हो …..?” मैडम की आवाज़ में रोष था . “हू ….इज …दिस …इडियट ….?” उन का प्रश्न था . “ना कहें लोग ….तब कहें ….?” उन्होंने प्रतिरोध किया था . “अपने ही लोग मूर्ख हैं ….?” उन्होंने पार्टी के प्रभारी लोगों को कोसा था . “हम क्या नारा दे रहे हैं ….?” अब उन्होंने सीधा शक्ति सिंह गुहिल से प्रश्न किया था .

कोई उत्तर नहीं आया था . केवल चुप्पी ही लौटी थी ! जमा कांग्रेसी अब एक दूसरे का मुंह ताक रहे थे ! वास्तव में मैडम के सिवा और किसी को कुछ सोचने-विचारने की इजाज़त ….कहाँ थी ? ज्यादा-से -ज्यादा राहुल गाँधी ही थे जो अपनी राय व्यक्त कर सकते थे …? पुराने मंत्री तो केवल सुनते ही थे …मनन ही करते थे ….और …अमल भी बाद में करते थे ! बाकी सब तो केवल अनुसरण ही करते थे !!

“आप क्या सोचते हैं, बारह के चुनाव के बारे ….?” अब की बार मैडम ने अपनी निगाह गुजरात राज्य के सेक्रेटरी पर केन्द्रित कीं थीं .

“मैडम ! हम अब की बार महिलाओं को ज्यादा सीटें देंगे ! मोदी और अमित शाह की ये चाल है ….कि वो ….ज्यादा से ज्यादा महिलाओं को …टिकिट …” वह घबराए हुए थे .

“बेवकूफी …की भी हद होती है ….?” मैडम बौखला गईं थीं . “मैं ….मैं ….चुनाव …किसी भी कीमत पर …न हारूगी ….?” घोषणा की थी ,मैडम ने . “चाहे …जो हो …., करो ….!! जो भी बने करो ….लेकिन ….” अब उन्होंने जमा सभी कांग्रेसिओं को एक साथ घूरा था .

“एक मोदी ….अदना-सा मोदी ……खुला घूम रहा है …?” संजीव भट्ट कहना चाहते थे . “पूरी केंद्र सरकार जोर आज़मा चुकी है ….परस्त हो चुकी है ….? अब जीतेंगे ….ये …बारह के चुनाव ….गुजरात में ….? माई …फुट ….!!” उन्होंने जैसे मैडम की मांग पर लात मारी थी .

“हमने ‘कोल-गेट’ में …राजा और सम्बंधित लोगों को ..जेल भेजा है ….! इस का तो जनता में सही सन्देश गया है …!” गृह मंत्री चिदाम्बरम ने जमा लोगों को सरकार की की कार्यवाही का ज्ञान कराया था . “हमने कहा है कि …क़ानून …अपना काम करेगा …!!” वो फिर से हँसे थे .

लोग सब चुप थे ! लेकिन सब को एक साथ याद हो आया था कि …’कोल-गेट’ में सरकार की कितनी थुक्का -फजीहत हुई थी …? और आज भी जनता को याद था कि …देश की अपार संपत्ति का सौदा कर कांग्रेस की सरकार ने १.७५ लाख करोड़ का चूना लगाया था …और अपने सभी यारों-प्यारों को १९४ कोल-फील्ड्स बेच कर -खूब धन कमाया था !!

“मोदी की मीटिंग्स में …आज-कल यही चर्चा रहती है,भाई जी !” शक्ति सिंह गुहिल ने कहा था . “और तो कुछ है नहीं – हमारे खिलाफ ….? वो इन्हीं चर्चाओं में उलझा रहता है ? लेकिन हम …लोगों के साथ हैं …संपर्क में हैं ….!”

“लेकिन लोग …निराश हैं,सर !” संजीव भट्ट फिर से बोले थे . “कांग्रेस सरकार केंद्र में है ….पर मोदी खुला घूम रहा है ….?” उल्हाना दिया था -संजीव भट्ट ने .

“तो तुम भी कुछ करो,ना ….?” एक तीखा प्रश्न आया था – संजीव भट्ट की ओर . “तुम भी तो कुछ करो, मेरे भाई ….?”

“मैं तो जी-जान से लड़ा हूँ , सर !” संजीव भट्ट ने कहा था . “मेरे खिलाफ तो उस ने – माने कि गुजरात सरकार ने … और एक नई एफ़ आई आर लिखा दी है …? मेरे तो वो प्राणों का प्यासा है ….? मोदी मुझे तो मिटा कर ही रहेगा ….?” रोने-रोने को था – संजीव भट्ट . “अगर यहाँ से कुछ न हुआ तो …..मैं तो बर्बाद हो जाऊंगा ….?” उस ने स्पष्ट कहा था . “मैंने कांग्रेस के लिए …जां लड़ा दी ….और …अब …..?”

बात गंभीर थी. प्रश्न भी गंभीर थे ! बात बहती जा रही थी . और वक्त भी सरकता जा रहा था …? मोदी और अमित शाह के आंकड़े …सामने आ-आ कर कान्ग्रेसिओं को डराने लगे थे !

“‘मोदी’…..’मोदी’ ……!!” शक्ति सिंह गुहिल ने कहना आरंभ किया था . “पी एम् ‘…..’पी एम्’ ….!! का शोर सारे गुजरात में भरता जा रहा है ….भाई जी ?” उस ने एक और भी सूचना दी थी .

गंभीर सूचना थी ! आज तक का इतिहास था कि …इस तरह तो किसी भी राज्य के मुख्य मंत्री ने … जुर्रत न की थी कि वो ……दिल्ली को ललकारे …? यह पहला ही मौका था जब ….मोदी की ललकार सुन …दिल्ली दहला रही थी …?

“हेल्प …हिम …!” मैडम ने चिदंबरम को आदेश दिए थे . “डू …व्हाटेवर …इज पॉसिबल ….!” उन का इशारा था . “गेट हिम …आल …टू फाईट …दिस ..मीनेस – मोदी ….?” वह कहती ही जा रही थीं . “और हाँ ! मैंने भी मन बना लिया है ….कि …मैं भी गुजरात के चुनाव लडूंगी …..!” उन्होंने तनिक हंस कर कहा था . “और …आप मनमोहन जी ….?” उन का प्रश्न था .

लगा था कि …मैडम के पास कोई योजना थी …! तभी तो गुजरात के चुनावों की चुनौती भी उन्होंने ओट ली थी …और मोदी की हार होना भी तय हो गया था …?

“चुनावों से पहले ….मैं ….मोदी को जेल भिजवाना चाहता हूँ,मैडम ….?” अब की बार प्रदीप शर्मा बोले थे . “मैं भी चाहता हूँ …कि मोदी जितना जल्दी हो ….जेल जाए ….?” वह मांग कर रहा था .

“केस क्या है ….?” मैडम पूछ बैठीं थीं .

“वही ….स्नूप -गेट है ….?” शक्ति सिंह गुहिल ने संक्षेप में उत्तर दिया था .

“लेकिन ….वो तो ….?”

“वही तो ,मैडम !” प्रदीप शर्मा ने बीच में कहा था . “वही तो एक केस है ….जिस में …मोदी बच ही नहीं सकता ….? मैंने नए सबूत पेश किए हैं ! अब गुजरात सरकार कहती है – मैंने इन तथ्यों की चोरी की है ? मैंने हैक किया है ….उन के साईट को ….?”

“पब्लिक में जाएगा ….इस का ये ‘प्रेम -प्रसंग ‘ तो ……’मोदी’ की छवि खराब होगी ….!” शक्ति सिंह गुहिल भी शर्मा का साथ दे रहा था . “मैडम ! ये कहानी सच्ची है ! वो लड़की …मतलब कि मिस सोनी ….४८ घंटों तक …मुख्य मंत्री …निवास में …कर क्या रही थी ….?” उस का प्रश्न था .

“इंट्रेस्टिंग ….!!” मैडम हंसीं थीं . “वैरी ….इंट्रेस्टिंग …..?” उन का कहना था . “गो ए -हैड ….!!” उन्होंने कहा था . “बाकी सभी लोगों को भी साथ ले लो !” आदेश था ,मैडम का .

दिनों के बाद आज एक ख़ुशी की लहर कांग्रेसियों के मन प्राण को गुदगुदा रही थी ! नरेन्द्र मोदी का ४८ घंटों तक …एक अनिन्द्य सुंदरी …के साथ …मुख्य मंत्री भवन में …लोल-किलोल करना …किसी परी -कथा जैसा ही तो था …? एक साथ सब को जच गया था कि …अगर प्रदीप शर्मा कुछ नए तथ्य सामने ले आया ….तो …मोदी का चरित्र -हनन संभव है ?

“किसी मैनका के हाथों ही मरेगा ,ये …?” शक्ति सिंह गुहिल भी हंस रहे थे . “एक बार …अखबारों में …इस लड़की के साथ इस के फ़ोटो आ जाएं …तो फिर मैंने …जानीं ….???” उस ने छाती ठोकी थी . “इस की नैया …मैं डुबो दूंगा, सर !” वह गृह मंत्री को बता रहा था .

“मैं तहलका को बता देता हूँ …कि …जो भी बने ….सो करे ….? तुम्हारी मदद होगी ….हर कीमत पर होगी ….!” उन का वचन था .

देखते-देखते प्रदीप शर्मा की मदद के लिए ….२००२ से चलता आया …पूरा गिरोह उठ खड़ा हुआ था ! अब उन सब को जच गया था कि …इस लड़की के नाम पर ही …ये मोदी महात्मा – मरेगा !!

“ये …आसक्त तो है ….इस पर …!” गुजरात राज्य के तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष – अर्जुन मोढवादिया बताने लगे थे . “कहते हैं – फोन पर घंटों-घंटों बातें होती हैं …दोनों की …!” वह हंस रहे थे .

“सच तो यह है , भाई जी !”गुहिल ने भी दिलचस्पी लेते हुए कहा था . “ये …वस्तु …..ये सो काल्ड …”मिस सोनी’ ….या अब कहेंगे …’माधुरी’ …है ही इतनी खूबसूरत …….कि किसी भी ऋषि -मुनी का …ईमान डिगा दे ….?” वह जोरों से हँसे थे . “गलती नहीं है- मोदी जी की ….?”

“पर …ये माल तो आप का ही था , शर्मा जी ….?” अर्जुन ने चुटकी ली थी . “खूब दाना चुनते हैं,आप भी ….?” उन्होंने प्रदीप शर्मा की कमर पर एक धौल जमाई थी . “उस्ताद खूब हैं,आप ….?” अर्जुन ने उन की प्रशंसा की थी . “ले कर बैठ जाओगे , इसे …मुझे अब यकीन है !” वह खूब हँसे थे .

प्रदीप शर्मा प्रसन्न थे . वह समझ गए थे कि …नरेन्द्र मोदी को …घेरने के लिए कांग्रेस अँधेरे में भटक रही थी ! वह अभी भी ‘डिमांड’ में थे ? और मैडम ने भी तो उन की बात को मान लिया था …? यहाँ तक कि होम मिनिस्टर के हाव-भाव से तो लगा था कि … नरेन्द्र मोदी को घेरने में -अमेरिका …सऊदी अरब …और पाकिस्तान जैसे कई देश …इस में शामिल थे ….और कोशिश में जुटे हुए थे ….?

मोदी के दुश्मनों का काफिला बढ़ता ही जा रहा था …..????

और अब अमित शाह को पता चला था कि …प्रदीप शर्मा ने फिर से सुप्रीम कोर्ट में …याचिका लगाई है कि …नरेन्द्र मोदी की गुजरात सरकार ने उस पर भ्रष्टाचार का आरोप इस लिए लगाया था ….क्यों कि वह …एक लड़की से …मुख्य मंत्री नरेन्द्र मोदी की नज़दीकियों को जानते थे ….? इस बात की पुष्टि फिर से एक बार ‘गुलेल’ और ‘कोब्रा-पोस्ट’ ने की थी ! इसे ही आधार मान कर प्रदीप शर्मा के वकील ने अरविन्द केजरीवाल का सहारा लेते हुए …उस की पार्टी के नेता – प्रशांत भूषन द्वारा …सुप्रीम कोर्ट में फिर से याचिका लगा दी ! और इस में उस जासूसी कांड ‘स्नूप-गेट’ की जाँच कराने की …गुजारिश की …जिस में वह लड़की …..?

“लड़की ….?” अमित शाह तनिक झुंझलाए थे . “फिर वही ….लड़की …..????” उन्होंने असमंजस में हवा में हाथ फेंके थे . “ये ….बईमान ……प्रदीप शर्मा …..????” वो चुप थे .

हवा पर अब …लड़की का नाम …नखरा ….तेहा ….और तमीज …तैर आए थे !!!

और साथ में आ खड़ा हुआ था – प्रदीप शर्मा का चालाक चेहरा …? कितना बड़ा बईमान था ये …. आई ए एस – अधिकारी ….? कैसे मिट सकता था – भ्रष्टाचार ….? जब बाढ़ ..ही खेत खाए ….तो कौन बचाए ….???? हर आदमी ही बईमान है ….? किस-किस से लड़ोगे,नरेन्द्र ….? यह एक नंगा प्रश्न था – जो आज गुजरात राज्य के मुख्य मंत्री के सामने आ खड़ा हुआ था ….? और …ऊपर से …ये क़ानून….कोर्ट …वकील ….और व्यवस्था ….? झूट और सच -सब बराबर तुलता है – वह अब जान गए थे !

“आप निश्चिन्त रहें …..!!” अमित शाह संगठित हो कर बोले थे . “मैं संभाल लूँगा , इस बईमान को ….?” उन का चेहरा खिल गया था . “चोर के पैर नहीं होते -तो झूठ का सर नहीं होता ….?” वह बता रहे थे .

लेकिन देखना तो था ही ….कि अब की बार स्वांग क्या रचा था ….????

……………………………………………………

श्रेष्ठ साहित्य के लिए – मेजर कृपाल वर्मा साहित्य !!