स्वामी अनेकानंद भाग 5

स्वामी अनेकानंद भाग 5

“आइए मेरे बाबू जी! आइए मेरे कदरदान .. मेहरबान ..” मैं एक अधेड़ उम्र का बच्चा चौराहे पर मजमा लगा रहा होता था। राम लाल बताने लगा था। उसे आज भी अपनी आंखों के सामने अंधकार घिरता लग रहा था। “वो मैं था आनंद बाबू। मैं राम लाल गुरु जी के जाने के बाद अनाथ हुआ...
स्वामी अनेकानंद भाग 5

स्वामी अनेकानंद भाग 4

आनंद अलसुबह जग कर बगीचे में टहलता-टहलता फूलों से शिकायत कर रहा था कि वो अपनी मुस्कुराहटें उसके साथ नहीं बांटते थे। “आइए आनंद बाबू।” अचानक राम लाल ने उसे पुकारा था। आनंद चौंका था। उसने निगाहें पसार कर देखा था। राम लाल लॉन में बैठा था। उसके लिए भी खाली...
स्वामी अनेकानंद भाग 5

स्वामी अनेकानंद भाग 3

गहरी नींद लेकर आनंद अलसुबह ही जग गया था। उसने महसूसा था कि इतनी गहरी नींद वो शायद ही आज तक सोया हो। क्यों था ऐसा? अचानक उसे उत्तर मिला था – एक चाय वाला। उसकी कोठी। उसकी आमदनी। भीतर का डर – भूखों मरने का भय और पूरी उम्र बेकार बनकर सड़कों पर घूमने की जहालत...
स्वामी अनेकानंद भाग 5

स्वामी अनेकानंद भाग 2

“गुरु। वो तो फिर आ गया।” कल्लू शोर मचा रहा था। “पांच रुपये मांगेगा!” कल्लू का डर था। “कदम तो साला खाली जेब आता है घर से । और मेरे पास पैसे हैं नहीं।” कल्लू की मुसीबत थी। “लड़ाई होगी गुरु।” कल्लू ने अंजाम बताया था।...
स्वामी अनेकानंद भाग 5

स्वामी अनेकानंद भाग 1

“नौकरी की तलाश है?” कल्लू ने उस झुकराते युवक से पूछ लिया है। उसे लगता है कि ये कोई बेकार भटकती आत्मा है। “कल इंटरव्यू है।” वह युवक बोला है। “कहते हैं कि .. नौकरी ..” “प्रश्न पूछ लो!” कल्लू ने तुरंत उसे तरीका सुझाया है।...