by Major Krapal Verma | Feb 8, 2024 | राम चरण
“जन्मेजय को तो नहीं बताया?” कुंवर साहब का पहला प्रश्न था और पहला शक था। “नहीं!” इंद्राणी ने डरते-डरते कहा था। “क्या इसी लिए तुमने जन्मेजय को बुलाया था?” “हां!” “गुड!” कुंवर साहब को तनिक सा सहारा मिला था।...
by Major Krapal Verma | Feb 4, 2024 | राम चरण
रात के सन्नाटे में ढोलू सराय का किला सजग प्रहारी सा अटल खड़ा था। किले ने अनगिनत आक्रमणकारियों को आते जाते देखा था। युद्ध लड़े गए थे। जीते गए थे। हारे गए थे। लेकिन ढोलू वंश अभी तक सुरक्षित था। कुंवर साहब का देश का कृषि मंत्री बनना एक गौरवपूर्ण घटना थी। ढोलू वंश के महा...
by Major Krapal Verma | Feb 3, 2024 | राम चरण
नए भारत के निर्माण की हवा आज राष्ट्रपति भवन में आजादी से डोल फिर रही थी। चुनावों में अभूतपूर्व विजय हासिल करने के बाद आज सब नया-नया लग रहा था। लोग नए थे, इरादे नए थे, हवा नई थी और शपथ ग्रहण का आयोजन भी नया था। स्वयं कुंवर खम्मन सिंह ढोलू आज नए नूतन इरादों से लबालब भरे...
by Major Krapal Verma | Jan 23, 2024 | राम चरण
कुंवर खम्मन सिंह ढोलू ने महसूसा था कि आज हिंदू राष्ट्र का राजा छोटूमल ढोलू का सपना फिर से लौट कर देश के द्वार पर आ खड़ा हुआ था। “इट्स कम्यूनल!” नेहरू ने चीखते हुए राजा छोटूमल ढोलू को ललकारा था। “हिन्दू राष्ट्र से मतलब ..?” वह प्रश्न पूछ रहे थे।...
by Major Krapal Verma | Jan 12, 2024 | राम चरण
बिना राम चरन के कालू की जंग कठिन हो गई थी। ढोलू शिव का मेला भरा था। अपार भीड़ थी। ग्राहकों की लाइन ही न टूटती थी। बिना राम चरन के कालू ही सारा काम संभालता। हां, भोंदू भी साथ था लेकिन राम चरन की तो बात ही और थी। कालू ने महसूसा था कि अंजाने में उसने भी देख-देख कर ही राम...
by Major Krapal Verma | Jan 12, 2024 | राम चरण
इंद्राणी एक बारगी अकेली पड़ गई थी। कुंवर साहब पर चुनावी भूत सवार हो गया था। पहली बार ही था जब वो इस तरह अपनी सुधबुध भूल गए थे। लगा था जैसे राजा छोटूमल ढोलू की अपूर्ण अभिलाषा को तिरंगे की तरह हाथ में थामे वह भारत निर्माण पर निकल पड़े थे। उन्हें एहसास था कि आज ये घड़ी...