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प्रकाश पर्व !

शब्दों को शुभकामनाओं के संदेशों में बाँध ,कन्धों पर मिठाईयों को लाद और हथेलियों पर अरमानों के दीपक जला मैं अभिलाषाओं के पंखों पर पैर जमा कर एक अमर इरादे को ले कर प्रस्थान करूंगा , मित्रो ! मेरा मन है …सच में मेरी पवित्र भावना है कि सर्व प्रथम मैं पाकिस्तान ही जाऊं ! चाहे जो हो मेरा पर मैं चला ही जाऊं और अपनी जुबान पर आई बात को कह कर ही लौटूं ! ‘शत्रुता शाशकों को शोभा नहीं देती ! शान्ति का शंख फूंको और प्रेम-प्रीत का मार्ग गहो !’ अब चलता हूँ . मुझे जापान भी तो जाना है ? फिर चीन जाऊंगा …रूस हो कर लौटूंगा तो यूरोप को प्रकाशित करता हुआ …अमरीका में आ कर दम लूँगा !