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ग़ज़ल – ऐ खुदा जहां में ये कैसी आतिश लगी है !

ऐ-खुदा जहां में ये कैसी आतिश लगी है,
मक़ाम हासिल की गज़ब ‘काविश‘ लगी है !

देख वो अंधी शौहरत दुब गया उसमे मैं,
फिर भी और ज्यादा की ‘कशिश‘ लगी है !

भूल बैठा इंसानियत के तौर तरीको को,
क्योकि मन में अपनों से ‘रंजिश‘ लगी है !

अब नहीं है मोहब्बत किसी की मोहब्बत
श्याद तभी दिलों में इक ‘लर्ज़िश‘ लगी है !

नफरतो ने बना लिया क्या उम्दा महल
बे-शुमार शरर की मेरी ‘नवाज़िश‘ लगी है !

ऐ-खुदा जहां में ये कैसी आतिश लगी है !
उर्दू शब्दों के अर्थ
आतिश = आग
काविश = ज़ोर
कशिश = आकर्षण
लार्जिश = कंपन
रंजिश = नाराज़गी
नवाज़िश = मेहरबानी
शरर = चिंगारी

– © Sanjeet Kushwaha