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महान पुरुषों के पूर्वापर की चर्चा .

भोर का तारा -नरेन्द्र मोदी !

उपन्यास -अंश :-

मेरी दृष्टि उठी थी और आसमान छू गई थी !!

अचानक ही ‘गुजरात’ के स्थान पर ‘दिल्ली’ आ कर मेरे दिमाग में बैठ गई थी . अब मैं गुजराती न रहा था . पूरे भारत का हो गया था . और हाँ! अचानक ही मुझे सिस्टर निवेदिता का कहा भी याद हो आया था . ‘विश्व -भ्रमण’ करना ,नरेन्द्र ! आदमी का दायिरा बड़ा होता है ! सोच सुलझता है !’ और मैं ये भी जानता था कि …दिल्ली – एक मासूम-सा लगने वाला शहर … वो बला है जहाँ …न जाने कितने शाशक,विचारक और विद्वान् आए …और चले गए ? उन के पद-चिन्ह दिल्ली आज भी लिए बैठी है ! और उन की वीर-गाथाएं भी …दिल्ली के खंडहरों के साथ-साथ बिखरी पड़ी हैं ! और अब मैं ….मैं एक अदना-सा नरेन्द्र मोदी …अपने दिल्ली जाने के विचार को पक्का कर बैठा था ….!!

छोटा काम न था ? मैं जानता था ! और जान का भी खतरा था -मैं मानता भी था !!

“सुपारी दे दी है ,आप के नाम की ,भाई जी !” अमित की आवाजें थीं . “किसी भी कीमत पर …अब कांग्रेस आप को ….?” अमित ने मुझे प्रश्नवाचक निगाहों से देखा था .

“मैं मौत से नहीं डरता ,अमित !” मैंने विहस कर कहा था .

“पर मैं डरता हूँ,भाई जी !” अमित की आवाज़ में एक सरोकार था . “इस लिए कि ….भारत अनाथ हो जाएगा ?” अमित भावुक था . “परमात्मा का दिया …ये एक फ़रिश्ता भी अगर उड़ गया ….तो देश को कांग्रेस सटक लेगी ?” उस ने स्पष्ट कहा था .

अमित की बात में दम तो था ? अब तक कांग्रेस की लूट सामने आने लगी थी !

कांग्रेस एक कांटे की तरह मेरे गले में आ कर फंस गई थी . कोई था – जो कह रहा था कि …’कांग्रेस’ एक महान उपलब्धि का नाम है . कांग्रेस मात्र एक पार्टी …या कि …संस्था ही नहीं … एक बहती जीवंत विचारधारा है ! इसे समझ कर चलो,नरेन्द्र !

बात सच थी. मैंने कांग्रेस को ले कर उस के इतिहास का अवलोकन किया था !

अंग्रेजों की ही बनाई थी -कांग्रेस पार्टी ! डाक्टर ह्युम इस के प्रणेता थे . उन का मनसूबा था कि कांग्रेस एक संस्था के रूप में भारतवासियों की सुख-सुविधाओं के लिए काम करे ! ये अपने अंग्रेज मालिकों से …उन के मातहत भारतवासियों के लिए ..चंद सहूलियतें मांगे …और कुछ वैसी ही रियायतें ले-ले कर …उन के गुलामों के दिल जीत ले ! ऐसा लगे कि …अंग्रेज मालिक जैसा तो …उदार उन का कोई अपना देवी-देवता भी न था …?

और यह कांग्रेस की पहली ही उपलब्धि थी ! पढ़े-लिखे भारतीय लोगों को ये विचार बहुत ही भा गया था ! सभी ने कांग्रेस का स्वागत किया था …और उस के मेम्बर भी बन गए थे . अब अंग्रेज मालिकों के साथ उन का अच्छा रसूक बन गया था !

बात बिगड़ी जब तिलक जैसे लोगों ने ….पूर्ण स्वराज माँगा …और सुभाष चन्द्र बोस जैसे सदस्यों ने बगावत कर दी ! विग्रह को रोकने गाँधी आगे आए …तो सुभाष देश ही छोड़ कर चले गए ….! फिर भी कांग्रेस ने अपने अंग्रेज मालिकों के लिए …निरंतर काम किया !

“कांग्रेस ब्रिटिश साम्राज्य की लड़ाई में …धन-जन से मदद करेगी …” ये एलान हुआ जब कि …जब कि देश वासी नहीं चाहते थे कि …वो इस लड़ाई की बला को अपने सर लें ! लेकिन हमारे ही पढ़े-लिखे लोग, जो अंग्रेजों की स्वामि-भक्ति के लिए मशहूर हो गए थे – आगे आए और …देश को युद्ध की भट्टी में झोंक दिया ? धन-जन की बेशुमार क्षति हुई …और अंग्रेज युद्ध जीत गए !

उन के लालच के बिठाए कबूतर भी युद्ध जीतने के फ़ौरन बाद की उड़ गए !

“कौन सी आज़ादी ….?” अंग्रेज अब गाँधी जी से पूछ रहे थे . “कब कहा था , हम ने ….?” उन का प्रश्न था . “अभी तुम लोग इस लायक नहीं …कि तुम्हें आज़ाद कर दिया जाए ….?” मांग का तोड़ हो गया था .

कांग्रेस खुश थी . उस के मालिक भी प्रसन्न थे . चालाकी से उन्होंने सब कुछ हासिल कर लिया था ! देश के लोग ठगे-से देखते ही रह गए ! जो उन के लिए लड़े थे -उन्हें मामूली -सी पेंशन दे दी ! कुछ को ..चंद तगमे और इनाम-इकरार दे कर चुप कर दिया !!

“कांटा तो निकल गया ….!!” सुभाष के मरने की खबर पा कांग्रेस ने चुपके से जश्न मनाया था . कांग्रेस के तो वरिष्ट नेता भी न चाहते थे कि …सुभाष लौटे …? सुभाष तो इन के लिए -कोढ़ में खाज थे …!!

और अब ये नरेन्द्र मोदी क्या था ….?” प्रश्न मैंने ही पूछा था .

मैं जोरों से हंस पड़ा था ! मैं हँसता ही रहा था ! मुझे लगा था कि अब की बार …शायद कांग्रेस को …मोदी को मारने का सौभाग्य प्राप्त न हो …? शायद कांग्रेस – जो बूढी हो चुकी थी …अब की बार विफल हो जाए …? लेकिन तभी मेरे मानस पटल पर …कांग्रेस की कामयाबियां एक-एक कर छाने लगीं थीं !

स्वतंत्रता मिलाने के बाद …कांग्रेस के सामने सब से बड़ा खतरा था – एक जुट हुआ -भारत !!

अंग्रेज जा रहे थे ! लेकिन वो जाना न चाहते थे ….? वो तो यहीं रहना चाहते थे ! वो तो सत्ता स्वयं चलाना चाहते थे ! वो न चाहते थे कि अपने बने-बनाए साम्राज्य को …कंगाल भारतीयों के हाथ सौंप …खाली हाथ लौटें …? तब …हाँ,तब कांग्रेस ने गोटें खेलीं थीं ! मुस्लिम लीग के पेट को फाड़ कर ……जिन्ना जैसे जिन को ला खड़ा किया था …कांग्रेस ने ! कहा था – इसे बनाएंगे स्वतंत्र भारत का प्रधान मंत्री …ताकि मुसलमान भाई प्रसन्न रहें ….और देश का भाईचारा भी बना रहे ….?

ये एक अचूक अस्त्र था – कांग्रेस का ….? जिन्ना,गाँधी और नेहरू – इन तीनों गोटों को कांग्रेस ने ब-खूबी खेला ! भनक लगते ही गाँधी बोले थे – तोड़ दो कांग्रेस को ! अब कांग्रेस का कोई अस्तित्व नहीं रहा ? लेकिन तभी नेहरू सामने आ खड़े हुए थे -कांग्रेस ने हमें आज़ादी दिलाई है – उन का कहना था …!

कांग्रेस नहीं टूटी …पर भारत टूट गया ….? भारत बिखर गया ….और यह सब किया -कांग्रेस ने ….! कितनी चतुराई से कांग्रेस ने काम लिया …? देश को बांटा ….हिन्दू-मुसलमानों को बांटा …अपने यारे-प्यारों को ही माल-मसौदा दिया …उद्योगपतियों को …ब्रिटेन बुलाया …व्यापार में उन्हें हिस्सेदारी दी …और कुछ को तो वहीँ बसा भी लिया ? बड़े-बड़े ओहदेदारों को भी …इंग्लेंड में बुला कर …स्थापित किया …और उन के बच्चों को नागरिकता दी ! और भारत के पूरे-के -पूरे हुनर , लियाकत और …हिम्मत को कौड़ियों के भाव खरीद लिया …?

कमाल ही था ….? एक आश्चर्य जैसा ही तो था …? इतना बड़ा नर-संहार होने के बाद भी ….बटवारे को …भारतीयों ने …जश्न की तरह मनाया था !!

“जिस दिन आज़ादी आएगी , मित्रो !” मुझे नेहरू जी के दिए बयान याद हो आए थे . “उस दिन …भगत सिंह की लाश हमारे और राज के बीच राखी होगी ….? और जलियाँ वाला बाग़ हमारे दिल-दिमागों में धधक रहा होगा ….?” कितना बड़ा एलान था ?

लेकिन हुआ क्या ….? चालाकी से अंग्रेजों ने कांग्रेस की मदद से …भारत को गुलाम ही बना कर रखा ! कॉमन वेल्थ का गठन कर …अंग्रेज शाशक ही बने रहे ! भारत का सोच-विमोच ….राय – मशविरा ….सब इंग्लेंड से ही चला …और कांग्रेस पूरे देश की मालिक स्थापित हो गई !!

“कांग्रेस ने भारत को आज़ादी दिलाई ….!” का प्रचार-प्रसार जोरों से होने लगा था ! “बिना खडग-बिना ढाल …के गाँधी जी …आज़ादी ले आए …!” लोग गाने-बजाने लगे थे . “कांग्रेस के इस गीत के लिए ….नेहरू -गाँधी जैसे ….बलिदानी वीर ….?”

“गलत …!!” मैं बीच में ही बोल पड़ा था . “सरासर गलत है ….ये प्रचार-प्रसार !” मैंने खुली और मुक्त आवाज़ में कहा था . “कांग्रेस की हार हुई थी …कांग्रेस ने शोक मनाया था …! अंग्रेजों के जाने का कांग्रेस ने …..”

“जीता कौन ….?” प्रश्न आ खड़ा हुआ था .

“जीता था -सुभाष चन्द्र बोस ….!” मैंने डंके की चोट कहा था . “भगत सिंह का नहीं ….आज़ादी के सौदे में …सुभाष चन्द्र बोस का शव बीच में रखा गया था !” मैं बताने लगा था . “मुझे दादा जी का बताया एक-एक शब्द याद था ! मैं जनता था कि सुभाष चन्द्र बोस …भारत की जनता के बहुत लाडले थे ….उन के नयनों के तारे थे ! और अगर वो लौट आते …स्वदेश …तो ….कांग्रेस का अंत तभी आ जाता ….”

कांग्रेस ने …अंग्रेजों के साथ मिल कर ….चालाकी से …सुभाष चन्द्र बोस को मार तो दिया ….लेकिन वो सुभाष बाबू के करतब …और कारनामों को … न मार पाए …और न ही सुभाष को भारत के जन-मानस के दिल-दिमाग से ही निकाल पाए ? और द्वितीय विश्व-युद्ध जीतने के बाद भी ….इस विश्व-विजेता को ….सुभाष चन्द्र बोस की लाश ने परस्त कर दिया ….!!

अंग्रेज और कांग्रेस युद्ध जीतने के बाद शरारत पर उतर आए थे !

आज़ादी के नाम पर भारतीय नेताओं को अंगूठा दिखा कर …ब्रिटिश साम्राज्य ने अब एक नई चाल खेली थी . वो चाहते थे कि सुभाष चन्द्र बोस की लाश और लश्कर को …इतने गहरे में गाढ़ दें ताकि …कभी भविष्य में …ना तो आज़ादी का प्रश्न उठे …और न ही सुभाष चन्द्र बोस की बनाई आज़ाद हिन्द फ़ौज -जैसा कोई बबाल खड़ा हो ?

“कोर्ट मार्शल ….!!” एलान हुए थे . “इन बागियों को …कैद में डालो …नज़रबंद करो …इन्हें ! इन को देश के साथ द्रोह करने की सज़ा मिलेगी ! ये सब राज के खिलाफ लड़े हैं ? इन्होने राज के साथ बगाबत की है ? पेंशन नहीं ….इन्हें तो फांसी तोड़ी जाएगी ! प्रमोशन …नहीं इन्हें तो जेलों में सडा -सडा कर मारा जाएगा ….ताकि भविष्य में भी सनद रहे कि …ब्रिटिश साम्राज्य के खिलाफ बगावत …करने का अंजाम क्या होता है ?” ये सनसनी खेज़ खबरें देश में सन्नाने लगीं थीं !

सुभाष चन्द्र बोस को तो ब्रिटिश साम्राज्य ने पहले से ही बागी घोषित कर दिया था ! अब आज़ाद हिन्द फ़ौज को ……?

लाल किला चुना था सारे आज़ाद हिन्द फ़ौज के सैनिकों को नज़रबंद करने के लिए ! इन सैनिकों के सारे हक़-हकूक रद्द कर दिए गए थे ! अब इन्हें गुनहगार घोषित कर सजाएं सुनानी थीं !

भूला भाई देसाई – जो ब्रिटिश राज के जाने-माने पब्लिक प्रोसिक्यूटर थे , को आदेश हुए थे कि …वो दिल्ली में लाल किले में नजरबन्द इन सैनिकों का कोर्ट मार्शल कराएं …और इन्हें सख्त -से-सख्त सजाएं दिलवाएं …..

ब्रिटिश राज फिर से भारतीयों को फांसी पर लटकाने के मनसूबे बनाने लगा था !

ये खबर देश में आग की लपटों की तरह फैली थी ! सुभाष बाबू को परमात्मा का भेजा पीर मानने वाले लोग क्रोधित हो उठे थे ! जो सैनिक भारत की आज़ादी के लिए लड़े थे ….उन पर आई मुसीबत को भांप ..अब पूरा देश ही ग़मज़दा था ! लोगों को तनिक भी संदेह न था कि …अब अंग्रेज इन लोगों को फांसी पर लटकाएंगे ….?

भारतीय सैनिक – जो ब्रिटिश साम्राज्य के लिए लड़े थे …और जिन्होंने अपनी जानों पर खेल कर युद्ध जीता था ….सकते में आ गए थे ! ये सैनिक जिन का कि कोर्ट मार्शल होना था – कोई और नहीं उन्ही के तो सहयोगी थे …? साथी …और मित्र ही तो थे ….? फैलती फांसी होने की अफवाहें इन्हें डराने लगीं थीं !!

एक लम्बे सोच के बाद इन सैनिकों को लगा था – कि ..ब्रिटिश साम्राज्य …चोरों की एक जमात से आगे …और कुछ न था ….? उन के साथ भी तो घोर अन्याय हुए थे …पक्षपात हुए थे ….और उन का भी तो शोषण हुआ था …? मालिक अंग्रेज थे – वो तो मात्र किराए के टट्टू ही थे …? असल में तो ब्रिटिश राज अपने ही सैनिकों को वरीयता देता था …और उन की तनख्वाहें और इज्ज़त-आबरू भारतीय सैनिकों के मुकाबले …कई गुना ज्यादा थी ….?

“मार डालते हैं , इन सालों को …..?” सेना में रोष भड़कने लगा था . “जोकों की तरह चिपक गए हैं ….? ये तो हमारा खून पी कर ही मानेंगे ….?” उन का विश्वास था .

सैनिकों की बगावत की भनक अंग्रेजों और कांग्रेस दोनों को लग चुकी थी ! लेकिन इस मोर्चे पर कांग्रेस अकेली और विवश खड़ी रह गई थी ! उस की पहुँच सैनिकों तक न थी ?

“देश-द्रोह का मुकद्दमा तो बनता ही नहीं , श्रीमान ?” भूला भाई देसाई भरी अदालत के सामने बोले थे . “ये सैनिक तो अपने देश की आज़ादी के लिए लड़े थे ….? इस पर देश-द्रोह बनता कहाँ है ….?” उन्होंने प्रश्न किया था .

“लेकिन ये ब्रिटिश राज के खिलाफ लड़े थे ….?”

“वो तो सारा देश ही लड़ा है …यही क्यों …..?” उत्तर था – भूला भाई देसाई का . “मई लार्ड ! अपनी आज़ादी के लिए लड़ना कोई अपराध नहीं होता …अन्याय नहीं होता …बल्कि पुण्य होता है …सराहनीय होता है !” उन्होंने भरी अदालत में बताया था . “ये सैनिक तो …भारत के वो लधेंते -लाल हैं …जिन्हें जनता ..सर-आँखों पर बिठाती है !” उन्होंने अदालत को गौर से देखा था . “अगर इन को सजाएं मिलीं तो …..मेरा अनुमान है ,श्रीमान …कि देश की जनता बे-काबू हो जाएगी …और उस स्थिति में ….”

“सैनिक विद्रोह पर उतर आए हैं ….!!” लार्ड माउंट बैटिन ने चर्चिल को बता दिया था .

रौगटे खड़े हो गए थे -ब्रिटिश साम्राज्य के !!

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श्रेष्ठ साहित्य के लिए – मेजर कृपाल वर्मा साहित्य !!

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