by Major Krapal Verma | Feb 2, 2026 | स्वामी अनेकानंद
“क्यों न हम भी एक वूमन सैल खोल दें बबलू भैया?” धूमिल दूर की कौड़ी लाया था। “मैंने भी महसूस किया है कि क्यों न हम भी नारी शक्ति का पॉलिटिक्स में प्रयोग करें?” उसका प्रश्न था। बबलू धूमिल को बड़ी देर तक देखता रहा था। जो धूमिल कह रहा था उसमें बबलू...
by Major Krapal Verma | Feb 2, 2026 | स्वामी अनेकानंद
हिरन गोठी की बारह एकड़ जमीन का पट्टा जन कल्याण आश्रम के नाम लिख गया था। जमीन के बीचों बीच खडे होकर राम लाल ने उसके विस्तार को बड़े चाव से आंखों में समेट लिया था। जीवन का यह पहला पल था जब वह जमीन से जुड़ा था। किस तरह उसने अपनी पहली कमाई बर्फी के नाम लिख दी थी –...
by Major Krapal Verma | Dec 22, 2025 | स्वामी अनेकानंद
“मानस!” मग्गू ने कठिनाई से नाम ले कर अपने इकलौते बेटे को पुकारा था। घोर निराशा ने उसे चहुं ओर से घेर लिया था। फिर मग्गू को एहसास हुआ था कि मानस तो लंदन में था। वो तो अपनी फिल्म बना रहा था। उसे चुनावों से कोई लगाव न था। वह बीमार था – उसे तो इस बात की...