नाना आए

नानी आईं

मौसा आए

मौसी आईं

और मामा

संग माँ

तुम भी

आईं।

खोया ननिहाल

बना कर

बैठी थी

माँ!

खोया हुआ

चित्रण मैं

करती..

नानी की

तुम लाडो

थी..माँ

नाना की

तुम राजदुलारी

मौसी मामा

चिपकते तुम संग

बहन भाई

की तुम

बहन थीं

प्यारी

राजघराने सा

ननिहाल था

मेरा

जिस में

तुम थीं

राजकुमारी

आँधी आयी

तूफां आया

और खो गए

थे.. तुम

सब

कहाँ ढूंढूं

खोया ननिहाल

में अब

माँ

जिसमें मेरे

प्यारे थे

सब

दूर गगन

में नज़र

गयी थी

मेरी

अरे! नज़र

आए

मुझे सब

करते

टिम-टिम

तारे चमक

रहे सब

सारे रिश्ते

तारा बनकर

अब गगन

नया ननिहाल

बना माँ!

जिसमें हो

गए तारे

सब

दूर गगन

में चमककर

तुम ये

कहतीं

ये रहा

तुम्हारा

ननिहाल अब।

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