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कोब्रा पोस्ट और गुलेल !!

महान पुरुषों के पूर्वापर की चर्चा .

भोर का तारा -नरेन्द्र मोदी.

उपन्यास-अंश :-

सोनल जेल में अमित शाह से मिलाने आई थी . उस का चेहरा उड़ा हुआ था . वह सोच रही थी कि शायद अमित आधा रह गया होगा …? ‘जेल का जीवन जांन न ले-ले …तभी’ वह सोचे जा रही थी . अमित के राजनीति में आने के लिए …शायद वह भी कहीं जिम्मेदार थी ! वह भी तो चाहती रही थी ….कि ….

“हल्लो,डियर !” अमित शाह उस के सामने आ खड़ा हुआ था . वह मुस्करा रहा था .

सोनल ने निगाहें भर कर अमित को देखा था . उस का चेहरा गुलाबों-सा खिला था . उस की आँखों के सपने सजग थे . उस की धारदार आवाज़ में विजई होने के संकेत थे ! ‘वह अमित शायद कोई दूसरा अमित था ! यह काया-कल्प कैसा ?’ सोनल ने एक पल के लिए सोचा था .

“डर क्यों रही हो ….? मैं ही तो हूँ , तुम्हारा ….अमित ….!!” अमित ने सोनल का सोच तोडा था .

“हाँ,हाँ ! हो तो …अमित ही ….!! पर …अमित मैं तो सोचती रही थी ….कि …?”

“मैं भी तो यही सोचता रहा था ,सोना ….कि …जेल न जाने क्या बला होगी ….? सच कहूं तो ….जो मैं …मिनिस्टर की कुर्सी पर बैठ कर भी न सोच पाया ….न देख पाया …वह जेल में आ कर समझ आया ! ये जेल नहीं ,सोना ! एक पाठशाला है ! जो सबक और सवाल यहाँ हल होते हैं …वो तो बाहर हो ही नहीं सकते !” अमित बताता ही रहा था .

“जे …तो बहुत डर गया है …!” सोनल ने शिकायत की थी .

“तुम उस की माँ हो …! उसे संभालो ….और ….”

“अब संभाल दूँगी ….! आज तो मुझ में भी हिम्मत लौट आई है ,अमित ! सच कहती हूँ …कि मैं इतनी डर गई थी …कि .. हिम्मत जुटा कर ही …मिलाने आ सकी हूँ …”

“और ….अब ….?”

“मिलती रहूंगी ….”

“और …..?”

“लड़ती रहूंगी ….” सोनल हंस पड़ी थी .

“दैट्स …बैटर …! तुम हंसती हो ….तो ही …अच्छी लगती हो …..”

“अच्छा …….?”

“ओके….ओके …!!” अमित प्रसन्न था . “और ,हाँ ! अभी बेल लगाने की जल्दी न करना ….!” वह बताने लगा था . “कुछ मुद्दे हैं ….जो महत्वपूर्ण हैं ! उन्हें अभी उठने देते हैं ….आने देते हैं ! उस के बाद ही बेल लगाएंगे ….”

“मैं बता दूँगी !” सोनल अब सहज थी . “मैं तो कहने वाली थी कि ….सेहत का ख़याल रखना ….पर देख रही हूँ ….कि …”

“मैं मोटा हो गया हूँ ….?” अमित जोरों से हंसा था . “भीतर …जो एक डर था ….वह भीतर आ कर बाहर बह गया है ! सोना ! अब से मैं ….शायद भविष्य की लड़ाई …ठीक से लड़ पाऊंगा ? बहुत कुछ अधकचरा था …जो साफ़ हुआ है !” वह बताता रहा था .

सोनल को भी लगा था जैसे अमित ने एक जंग जीत ली थी !

सोनल से मिल कर अमित प्रसन्न था . वह अकेला तन्हाई में बैठा-बैठा जेल के जीवन का जायजा ले रहा था ! सब कुछ ठीक नहीं था . देश की न्याय-प्रक्रिया उसे दोषपूर्ण लगी थी . उसे लगा था कि …जेल में बंद लोगों के साथ …न्याय नहीं हो पा रहा था ! लम्बे-लम्बे …मुकद्दमे …सुनाई गलत सजाएं …और पुलिस और पहरेदारों का दुर्व्यवहार ….लोगों को स्वयं ही गुनाहगार बना रहा था ! सब कुछ ठीक-ठाक नहीं था – वहां !!

‘न्याय-प्रक्रिया का रूप-स्वरुप तो …एक दम ही पारदर्शी होना चाहिए …’ अमित सोच रहा था . ‘पर है तो …सब का सब अंधा …? आम आदमी की समझ न आने वाला क़ानून ….उन के ऊपर जुल्म ढा रहा है …’ अमित टीस आया था . ‘मिसिंग लिंक -कहाँ है ? क्या है – जो हो ….और जो न हो ….?’ वह सोचने लगा था .

“अंग्रेजों की तो दुहरी नीतियां थीं,अमित !” अचानक उसे अमला की आवाज़ सुनाई देने लगी थी . “एक थी – हम गुलामों को गुलाम बनाए रखने के लिए ….और दूसरी थी उन के अपने लिए – जहाँ वो ही श्रेष्ठ थे ….मालिक थे ….दोषमुक्त ….और सर्वे-सर्वा थे !” उस ने अमित की आँखों में देखा था . “और सच मानो,अमित ! यही खोट खा गया ,उन्हें !” दो टूक बात बोली थी, अमला ने . “अगर अंग्रेज हमारे साथ …गुलाम और मालिक का …भेद-भाव न बरत कर … मिल बैठते ….तो ….?”

“जेल सुधार …कानून में सुधार …नीतियों में सुधार …सुधार ….और भी सुधार ….” अमित सोचता ही जा रहा था ! ‘उन की दुहरी नीतियों के कारन ही ….समूचा भारत उन का दुश्मन बन गया था और अगर हमने भी ….इन नीतियो को न बदला तो …. ?” अमित ने एक खोट की काया पर उंगली धर दी थी !

“आज का अखबार पढ़ा है ?” अमला तन्हाई में चला आया था . “पोल खुलने लगी है ! गवाह सच बोलने पर उतारू हैं !” अमला ने सूचना दी थी . “है तो कमाल …?” उस ने हवा में हाथ फेंके थे . “जो गवाह कांग्रेस ने कर्नल कमला के केस में पेश किए थे – वो तो बहुत पक्के थे ! कांग्रेस का बनाया कोर्ट-केस भी टूटा कहाँ …? पर आज तो मैं हैरान हूँ ,अमित भाई …कि सच्चाई सामने आ रही है ….”

“आ कर रहेगी !” अमित ने मुस्करा कर उत्तर दिया था . “पापों का घड़ा शायद भर चुका है …अब ?”

“ठीक कहते हो , अमित ! भगवान् करे …कि इस कांग्रेस का अब अंत आ ही जाए !” अमला ने आसमान की ओर देखा था . “सच मानो ,बेटे ! इस कांग्रेस के किए …अपराध …अन्याय —और पक्षपात अंग्रेजों के किए जुल्मों से भी ज्यादा हैं !”

“बैठिए ….!” अमित शाह ने अमला को बहुत पास बिठा लिया था . “कोई व्यथा है ….आप के मन में ….?” उस ने पूछा था .

“हाँ..! एक बहुत बड़ी व्यथा है ! या कहें कि …कहानी है ! एक झूठ की कहानी जो हमारे परिवार के साथ घटी है !” अमला बता रहा था . “मेरे पिता -कर्नल कमला सिंह आज़ाद का जो अंत हुआ ….उस की जिम्मेदार कांग्रेस ही है , और कोई नहीं ! और साफ़-साफ़ कहूं …तो …पंडित नेहरू का सीधा हाथ था … उन के उस …..” रुका था -अमला . वह पिघलने लगा था ….रोने लगा था !

“हुआ क्या था …?” अमित ने आद्र आवाज़ में पूछा था .

“वो आज़ाद हिन्द फ़ौज के सैनिक थे . सुभाष चन्द्र बोस के चहेते थे – कर्नल कमला सिंह आज़ाद ! उन्होंने बर्मा में अंग्रेजी फौजों का मुकाबला किया था ! उन्होंने अंग्रेजों का साथ न दे कर …सुभाष बाबू का साथ दिया था ! उन्होंने आज़ादी के बाद कांग्रेस पार्टी ही ज्वाईन की थी . चुनाव लड़ा था . जीता था और जनता की आँखों के तारे बन गए थे – कर्नल कमला सिंह आज़ाद !” वह रुका था . उस ने अमित की आँखों में झाँका था . “उन का एक सपना था ! महान भारत बनाने का सपना !! वह चाहते थे कि …भारत एक ऐसा राष्ट्र बने …जिस की अपनी ही पहचान हो ….अपनी भाषा …अपना धर्म ….अपनी संस्कृति …..अपना इतिहास….और ……” वह चुप था .

“और …..?” अमित ने पूछा था .

“वो नेहरू के पास बैठते थे ….लेकिन नेहरू जी ……..?” अमला की जुवान अटक गई थी . वह कुछ कहना चाहता था . पर वह कह न पा रहा था .

“नेहरू जी …..?” अमित ने ही पूछ लिया था .

“बहुत बड़े बन चुके थे … ! अंग्रेजों के अनुयाई थे ! अंग्रेजों …के सेवक थे ….! अंग्रेजों के बनाए कानून और व्यवस्था के समर्थक थे ….! कुछ भी बदलने ….या सोचने के लिए तैयार न थे . उन की आपस में झडपें होने लगीं थीं ! बात पार्लियामेंट के बीच तक चल कर आ गई थी ! कर्नल कमला सिंह आज़ाद ने खुल कर नेहरू जी का विरोध करना आरंभ कर दिया था ! ‘तुम देश को डुबो दोगे, पंडित !’ उन्होंने सरेआम पार्लियामेंट में कहा था . और …..”

“और ….?”

“बस ! यहीं पर उन का अंत आ गया था !!”

“कैसे ….?”

“कर्नल सहाव के पास हथियारों का एक अच्छा-ख़ासा जखीरा था ! वो हथियारों के प्रेमी थे . तरह-तरह की राईफल,पितौल ….और कुछ ऑटोमैटिक हथियार उन के पास थे ! विश्व-युद्ध के दौरान उन का ये किया संकलन था ! सब हथियारों का इतिहास था …खरीद की पर्ची थी ….और लाइसंस भी था ! एक फाईल में सब दर्ज था . हर इतवार की सुबह वह …अपने हथियारों का मुलाहिजा करते थे ….सफाई करते थे ….और फिर रख देते थे !”

“फौजियों की तो आदत होती है ….?” हंसा था , अमित .

“हाँ ! लेकिन एक सुबह पुलिस ने आ कर उन से सब बरामद कर लिया ! उन्हें थाणे ले गए …और उन पर केस बना दिया ! जब कोर्ट में केस आया तो उन्होंने पुलिस से अपनी फाईल मांगी . पुलिस ने साफ़ मन कर दिया ….और एक गंम्भीर केस उन के खिलाफ तैयार हो गया ! वो भी सीधे ही पंडित जी के पास पहुँच गए थे !”

“फिर ….?”

“हम क़ानून को तो अपने हाथ में नहीं ले सकते , कर्नल सहाव ….?” पंडित जी ने कहा था . “और फिर तो जेल में ही मरे मेरे पिता जी – कर्नल कमला सिंह आज़ाद ! अब मैं भी यहाँ बंद हूँ ! अपने नहीं …पर उन के उस गुनाह के लिए …जो महान भारत बनाने का सपना वो संजो बैठे थे ! ये एक बीमारी है , अमित !” अमला ने कहा था और वह फूट-फूट कर रोता रहा था .

अमित की बेल एक बबाल बन गई थी !

“जेल से बाहर आते ही अमित सारे सबूत गुनाहों की तरह मिटा देगा !”अभियाजन पक्ष की पुरजोर दलील थी . “उसे जेल में ही रखा जाए …जब तक कि छान-बीन पूरी न हो जाए ….!” उन की मांग थी .

लेकिन छान-बीन कब तक पूरी होगी – इस का कोई तर्क न था ….?

मुझे लगा था जैसे मेरा और अमित का दुश्मन हो गया था – पूरा भारत !

मीडिया और अखबारों में रौंगटे खड़े करने वाली कहानियां तैर रही थीं !

और न जाने कहाँ से देश में नए-नए मीडिया संगठन खड़े हो गए थे …? कोब्रा पोस्ट और गिलोल चुन-चुन कर नफ़रत के तीर चला रहे थे ! इन के निशाने पर हम दो ही थे .इन की कहानियों का उद्देश्य -हिन्दू-मुसलमान मुद्दे को इतना उछालना था ….कि पूरा देश जल उठे ….और इस आग में हम दोनों भस्म हो जाएं …? इन की भाषा बहुत ही विषैली थी …इन का लक्ष भी सटीक था ….और शब्द-बाणों को भी चुन-चुन कर स्तैमाल किया जा रहा था ! बानगी के तौर पर एक टी वी के साक्षात्कार में गवाह कह रहा था – जी.जी हाँ ! जिस आदमी ने सईदा की हत्या की …उस आदमी के ललाट पर ‘ओउम ‘ लिखा था ! हम उस आदमी को पहचान लेंगे ….अगर वो सामने आए ….तो …?

ये आदमी उन २२ गवाहों में से एक था जिन्हें तीस्ता शीतलवाद और उस के सहयोगियों ने ‘पाठ पढ़ा कर’ हम दोनों के खिलाफ खड़ा किया था . इस टी वी साक्षात्कार का जन्म अरुंधती राय के ‘आउट लुक ‘ में लिखे उस लेख से हुआ था जिस में उन्होंने सईदा की मौत – कहें कि दर्दनाक मौत – का विस्तार से वर्णन किया था ! उन्होंने लिखा था कि …मेरी एक मित्र ने पिछली रात बडौदा से मुझे फोन किया था ! वह पंद्रह मिनिट तक फोन पर रोती ही रही थी . उस ने बताया था कि उस की एक मित्र सईदा को …हिन्दूओं की दंगाई भीड़ ने पकड़ लिया था . फिर बेहद ह्रदयविदारक तरीके से उसे मारा गया था !

“कौन से हथियार से हत्या की थी – उस आदमी ने ….?” टी वी एंकर ने प्रश्न पूछा था .

“त्रिशूल से …उस का पेट फाड़ा था ….उस आदमी ने ….!” गवाह बता रहा था . “एक ही हूल में उस आदमी ने …सईदा के पेट का मवाद बाहर ला दिया था !”

“तो क्या …सईदा गर्भवती थी ….?”

“जी ! जी,हाँ ! उस के पेट में सात माह का बच्चा था . वह बच्चा बाहर आ गया था !”

“फिर …..?”

“फिर …एक दूसरे दंगाई ने …उस बच्चे के शरीर में तलवार घोप दी थी .”

“ओह,हेल !” टी वी एंकर ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी थी . “हाउ ….सेड …?” वह कराह उठा था . “फिर क्या हुआ …..?” उस का अगला प्रश्न था .

“दंगाईयों की भीड़ ‘हर-हर महादेव के नारे लगा रही थी ….और बल्लम-भाले हवा में उछाल-उछाल कर …कूदत-फांदती रही थी ….” वह बताता जा रहा था .

“और मुसलमान ….मेरा मतलव कि …वो दंगा पीड़ित लोग …..?”

“डरे-सहमे घरों में बंद थे ….! मौत की घड़ियाँ गिन रहे थे !! और …..”

“और ….पुलिस ….?”

“नदारद थी ……!!” उस ने घटना का तोड़ बयान कर दिया था .

अब मेरे देश को यह समझते देर न लगी थी कि …मैं और अमित कलंकी थे ! समाज के और मुसलमानों के दुश्मन थे . हम हिन्दू उग्रवाद का एक जीता-जागता उदहारण थे ! हम इस बात का प्रमाण थे कि …गुजरात में ही नहीं ….अब पूरे भारत में …हमारे रहते हुए …मुसलमानों की खैर नहीं थी !

अरुंधती राय के लिखे इस लेख को ले कर …संसद में भी मामला उठ खड़ा हुआ था ! यहाँ तक बात पहुंचते -पहुंचते …अब यह भी साबित हो गया था कि …जिस गर्भवती महिला सईदा की हत्या की थी – उस के साथ सामूहिक बलात्कार भी किया गया था !

कभी तुर्कों के लिए इस तरह के जुल्मों की कहानियाँ चला करतीं थीं ….लेकिन आज अपने भारत में …हिन्दूओं के किए जुल्मों का …गुणगान हो रहा था …? हिन्दू – जो स्वभाव से ही भीरु है ….डरपोक है ….अहिंसावादी है ….धर्मपरायण है ….और पाप-पुण्य,कर्म-कुकर्म …तथा सही-गलत से भी भय खाता है …आज अचानक ही …इतना न्रशंस कैसे बन गया ….?

और मित्रो ! अब यह भी एक प्रमाण है कि …अरुंधती राय की लिखी ये कहानी …गलत थी …मिथ्या थी …और गढ़ी गई थी ! सईदा नाम की तो कोई औरत थी ही नहीं ….? और न इस का कोई प्रमाण था …कि वो गर्भवती थी …उस के साथ बलात्कार हुआ था …या कि उस की मौत हुई थी !!

लेकिन राष्ट्र की निगाहों में …नरेन्द्र और अमित का चरित्र हनन कर …यह सिद्ध किया जा रहा था कि …हम दोनों मानव नहीं ….दानव हैं ! हमारे इरादे नेक नहीं ….फेक हैं !

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श्रेष्ठ साहित्य के लिए – मेजर कृपाल वर्मा साहित्य !!