by Rachna Siwach | Sep 26, 2018 | Uncategorized
“अरे!यह क्या?लाल मुहँ और पूँछ भी लाल, कहाँ रंग फैला कर आई हो?आप कितनी गन्दी लग रही हो…दांती हो..तलो दूर हटो कपडे भी खराब कर दोगी”। बच्चों ने कहा था…”मम्मी देख तो बाहर निकलकर लाल कलर तो हमने कहीं रखा ही नही है, जो ये फैलाएगी।”बाहर...
by Rachna Siwach | Sep 24, 2018 | Uncategorized
बेड के किनारे यूँ छोटी सी जगह में घुस जाना,फँस-फँस कर चलना कानू की आदत सी हो गयी थी।मुझे कभी समझ में न आता था , कि कानू कैसे बेड के किनारे कोने में घुस जाती है,और फँस-फँस कर चलती है…बिल्कुल कोने में घुसकर घंटो मुहँ डालकर क्या इन्क्वारी करती रहती है। “बाहर...
by Rachna Siwach | Sep 21, 2018 | Uncategorized
“आ ताओ नीते खेलने तलेंगे” मैने कहा था कानू को…बड़ी हो गई थी कानू। बारिशों के बहुत सुहाने दिन थे..भोपाल में बारिशों के चार महीने बहुत ही सुहाने होते हैं। लगातार तीन-तीन दिन बारिश होती रहती है , यहाँ पर…कानू ऐसे मौसम में छत्त पर सारे दिन खेलने की...
by Rachna Siwach | Sep 17, 2018 | Uncategorized
बड़ी होने लगी हैं, कद भी थोड़ा ऊँचा हो गया हैं क़ानू का। सर्दियों का मासूम शुरू ही गया हैं… छत्त पर तितलियाँ आने लगी हैं फूलों का रस पीने सर्दियों के मौसम छत्त गुलाब ओर गेंदो के फूलों से भर जाती हैं…. बहुत सुंदर दृश्य होता हैं हल्की पीली धूप रूपी छत्त के नीचे...
by Rachna Siwach | Sep 9, 2018 | Uncategorized
घर में नया मेहमान आ ही गया था, हम चार से पांच सदस्य हो गए थे। सबसे पहले उठकर इस छोटी गुड़िया को टोकरी से बाहर निकलना और फिर वापस टोकरी में बंद करना रूटीन हो गया था । अभी छोटी ही तो थी बोलना भी नही सीखी थी…. पर हाँ, शैतान पूरी थी। गोल-गोल सफेद ऊन का गोला, अब धीरे...