रनेश घर आने के साथ ही पसीना-पसीना हो गया था। टेंशन में आकर सुनीता के आगे बोल उठा था..
” अरे! किसी काले से आदमी के साथ मोटरसाइकिल पर भाग गई! मैं देखता ही रह गया.. पता करना पड़ेगा कौन था, साला..!!”।
रमेश रंजना को लेकर बोला था। और यह भी बोला..
” भाग कर जाइयेगी कहाँ..!!”।
” कौन था! तेरे साथ वो काला सा आदमी! हाँ..!! वही न जिसे मैने तेरे साथ फ़ोन पर पकड़ा था!”।
” आपको क्या करना है! कोई भी हो..!!”
रंजना ने जवाब में रमेश से कहा था।
रमेश रंजना का जवाब सुन ग़ुस्से में तम-तमा उठा था। और लगातार रंजना और उस आदमी का पीछा किया था
.. पर रमेश उस आदमी का कोई भी सुराख नहीं ढूंढ़ पाया था।
न जाने क्यों अब रंजना रमेश से मिलने के लिये इनकार करने लगी थी.. इस बात को लेकर रमेश ज़रूरत से ज़्यादा परेशान हो गया था। सुनीता भी रंजना को लेकर रमेश के इस रवैए से हैरान थी.. कि आख़िर हुआ तो हुआ क्या.. भई! रमेश ने रात और दिन रंजना की सेवा में कोई भी कमी नहीं छोड़ी है.. माँ-बेटों ने लड़की की जमकर सेवा करी.. और कमाल ही हो गया.. किसी और के साथ घूम रही है।
अब तो रमेश और रंजना का फोन पर ही जमकर झगड़ा शुरू हो गया था।
” वो मुझे थाने बुला रही है!”।
रमेश सुनीता से रंजना को लेकर बोला था।
” आप थाने मत जाना! नहीं तो वहीं बैठा लेंगें!”।
सुनीता ने रमेश को मदद देते हुए, और परवाह करते हुए.. कहा था। वैसे देखा जाए तो इसकी कोई ज़रूरत ही नहीं थी.. रमेश ने इस रंजना को लेकर नाक में दम कर दिया था.. वो सब इतनी आसानी से कैसे भूल गई. अरे! एकबार तो थाने में ताजपोशी होकर लड़की का भूत उतारना ही था। खैर! छोड़ो लड़की ख़ुद भी कम नहीं पड़ेगी!
” देखो! एक लड़की मेरे सामने बैठी है! और उसनें आपके हस्बैंड के ख़िलाफ़ कंप्लेंट लिखवा रखी है!”।
हसबैंड और थाने का तो जैसे पुराना रिश्ता हो गया था। असली मज़ा तो अब आएगा! जुड़े रहें खानदान के साथ।