
मुंशी प्रेमचंद !!
महान पुरुषों के पूर्वापर की चर्चा !
जन्म – ३१ जुलाई १८८०
“क्या लिख लाया है , रे …! लेखक है या ….” ‘खोता’ कहते -कहते रुक गए थे , प्रकाशक . मैं पसीना -पसीना …..
सोचा था – प्रकाशक पढ़ेगा तो …’चुन्नी ‘ एक दलित कन्या के लिखे संवादों पर बिछ-बिछ जाएगा . …और मेरा ये उपन्यास ‘हीरों के देश मै ‘ सारे जगत में शोर मचा देगा !
“वनवारी को देखा है ?” प्रश्न आया है . “पांच सौ रूपए में फस्स क्लास उपन्यास लिख कर देता है . झुमकी वाला उपन्यास …पाठक प्रसन्न और हम ….
नई बात नहीं है , मित्रो ! बेचारे कलम के सिपाही – उपन्यास सम्राट मुंशी प्रेमचंद ने तो इस के आगे के पापड भी बेले थे ! और अगर वो अपनी हिम्मत पर प्रेस लगा कर अपना साहित्य प्रकाशित न कर पाते तो ….आज हिंदी-साहित्य जगत अनाथ होता ! कुल ५६ वर्ष की आयु में उन्होंने यह सब कर दिखाया ! किसी ‘कमाल’ से कम नहीं -मुंशी जी !!
उन के बाद और है कौन जिसे किसी हिंदी प्रकाशक ने बढाया हो ? उन्ही के साहित्य को मुफ्त में बेच-बेच कर …खूब मुनाफ़ा कमा रहे हैं .
मुंशी जी गरीबी से नहीं हारे …मुंशी जी हालातों से नहीं हारे …और मित्रो , हारूंगा मैं भी नहीं ! उन्ही की तरह मैं भी अपने साहित्य को प्रकाशित करूंगा और आप तक पंहुचा दूंगा – ज़रूर !
हाँ! सफलता की नकेल तो वक्त के हाथ होती है !!
आईये मुंशी जी को उन के जन्म दिन पर प्रणाम करें और उन की अनूठी उपलब्धि के लिए उन का आभार व्यक्त करें !!
धन्यवाद !!
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श्रेष्ठ साहित्य के लिए – मेजर कृपाल वर्मा साहित्य !!
