by Major Krapal Verma | Oct 26, 2025 | स्वामी अनेकानंद
“नउआ और कउआ – दाेनाें ही साले हरामी हाेते हैं।” नशे में धुत मग्गू कल्लू के कारखाने में आम ताैर पर कहता था ताे पूरी जमात ठहाके मार कर हंसती थी। कल्लू पर छाेड़ा ये तीर ठिकाने ताे लगता लेकिन कल्लू सबके साथ मिल कर ठहाके लगाता रहता। कल्लू भी मानता था कि...
by Major Krapal Verma | Oct 24, 2025 | स्वामी अनेकानंद
मच्छी टोला पहुंचा था कल्लू तो सबसे पहले उसका मिलन मुन्नी से हुआ था। मुन्नी उसकी प्रेमिका थी। बेहद प्यार करता था वो मुन्नी से। शाम ढलते अंधेरा घिर आता था तब आती थी मुन्नी चुपके-चुपके। वो उसे बांहों में भरता और कलेजे से लगा लेता। न जाने कब तक वो दोनों .. “अरे...
by Major Krapal Verma | Oct 23, 2025 | स्वामी अनेकानंद
आनंद कदम के साथ चला गया था। कल्लू चिड़िया के पास बैठा ऊंघ रहा था। चाय की मांग जाेर पकड़ रही थी। राम लाल बेदम हुआ जा रहा था। लेकिन आज वाे बर्फी के चेहरे काे भूल न पा रहा था। बर्फी ने आज आनंद काे पहली बार देखा था। आनंद ने भी बर्फी काे देखा था। दाेनाें की नजराें काे...
by Major Krapal Verma | Oct 21, 2025 | स्वामी अनेकानंद
आनंद आज स्वयं चल कर आया था। राम लाल आदतन आकर अपनी कुर्सी पर बैठा था। चाय आ गई थी। लेकिन दोनों के बीच आज चुप्पी आ बैठी थी। आनंद ने कई बार राम लाल को पढ़ने का प्रयत्न किया था। लेकिन वह चुप ही बना रहा था। “मुझे संन्यासी बन कर क्या मिलेगा?” आनंद ने ही चुप्पी...
by Major Krapal Verma | Oct 19, 2025 | स्वामी अनेकानंद
राम लाल के कानों में बर्फी की आवाज घनघना रही थी। “सुनो। इसे निकालो यहां से। मेरे बच्चे बिगड़ेंगे।” के स्थान पर अब राम लाल सुन रहा था, “सुनो। तुम निकलो यहां से। मेरे बच्चे नहीं चाहते कि तुम ..” राम लाल के पसीने छूट गए थे। जिस स्वर्ग संसार के...