स्वामी अनेकानंद भाग 57

स्वामी अनेकानंद भाग 57

तोचीगढ़ में आकर तांगा रुका था तो आनंद खबरदार हो गया था। सबसे पहले आनंद को चिंता हुई थी कि उसने जो बेशकीमती जूते पहने थे, तांगे से उतर कर जमीन पर पड़ते ही मैले हो जाएंगे। गांव के लोग तांगे के आस पास इकट्ठे हो गए थे। सभी ने मन में मान लिया था कि वो कोई अजनबी नहीं बंबई...
स्वामी अनेकानंद भाग 57

स्वामी अनेकानंद भाग 56

सत रंगी के लिखे प्रेम गीत को पूरन लाल की बनाई धुन और भ्रमर की आवाज ने एक तूफान की तरह फिजा पर टांग दिया था। एकांत में बैठ राधू रंगीला ने इस प्रेम गीत को कई बार सुना था – बार-बार सुना था और गीत की लोकेशन सैट करने में उसे लंबा समय लगा था। अब इस प्रेम गीत को...
स्वामी अनेकानंद भाग 57

स्वामी अनेकानंद भाग 55

कल्लू ने महसूस किया था कि वो आज कल जमीन पर नहीं कांटों की सेज पर सोता था। आनंद के जाने के बाद गुरु को जैसे रोग लग गया था। कब आएगा आनंद – आम प्रश्न था जो गुरु दिन में दो चार बार पूछ लेते थे। सच था। अगर आनंद न लौटा तो सवा सत्यानाश था। कब तक उल्लू बनाते लोगों को?...
स्वामी अनेकानंद भाग 57

स्वामी अनेकानंद भाग 54

तोचीगढ़ से बंबई आ कर वो स्वामी अनेकानंद बना। लगा – उसका पुनर्जन्म हुआ। लेकिन आज वो फिर तोचीगढ़ लौट रहा था। लग रहा था जैसे वो अपने पूर्व जन्म से मिलने जा रहा था जहां अब उसकी बीमार मां उसके इंतजार में आखिरी सांसें गिन रही थीं। और उसका छोटा भाई बिल्लू उसके आने के...
स्वामी अनेकानंद भाग 57

स्वामी अनेकानंद भाग 53

राधू रंगीला ने दलदल के आस पास तीन और नकली दलदल बनवाए थे। तीनों के ऊपर कैमरे लगे थे। तीनों के ऊपर अलग-अलग काम होना था। काम की समझ केवल राधू रंगीला को ही थी। प्रतिष्ठा और मानस को तैयार किया गया था। उनके बॉडी डबल भी तैयार हुए थे। दलदलों को शूटिंग से पहले रोशन किया गया...