राम चरन भाग एक सौ पचास

राम चरन भाग एक सौ पचास

आठ दिसंबर सुबह की फ्लाइट पकड़ कर जब जन्मेजय काशी चला गया था तो राम चरन की जान में जान लौट आई थी। सुंदरी और भाभी जी श्याम चरन के बर्थडे डे की तैयारियों में नाक तक डूबी थीं। भाभी जी घर पर ही केक बना रही थीं। सुंदरी ने अपनी सारी दोस्तों को फोन पर सूचना दे बुला लिया था।...
राम चरन भाग एक सौ पचास

राम चरन भाग एक सौ उनचास

राम चरन घोड़े बेच कर सो रहा था। “क्या हुआ?” सुंदरी उसे झिंझोड़ कर जगा रही थी। “कित्ते बार कहा है कि ..” वह राम चरन के काम को कोस रही थी। “उठो-उठो! नौ बज गए।” राम चरन ने आंखें खोली थीं। सुंदरी सामने थी लेकिन उसे दिखाई न दे रही थी। वह...
राम चरन भाग एक सौ पचास

राम चरन भाग एक सौ अड़तालीस

हैदराबाद को देख राम चरन को लग रहा था जैसे दो विपरीत विचारधाराएं जन्म ले चुकी हैं और शहर में दोनों समानान्तर बह रही हैं। राष्ट्र प्रेम की पवित्र विचारधारा का प्रतीक सुमेद का क्रांति वीर संगठन सर उठाए पूरे हैदराबाद पर हावी होता जा रहा था। होने वाले सम्मेलन में पूरे भारत...
राम चरन भाग एक सौ पचास

राम चरन भाग एक सौ सैंतालीस

राम चरन आया था तो उन दोनों की अभिलाषाओं के चिराग रोशन हो उठे थे। “सॉरी सर, लेट हो गया।” राम चरन ने माफी मांगी थी। “वो काम ही इतना है कि ..” उसने अपनी व्यस्तता बखानी थी। “कबाब ठंडे हो गए हैं।” रोजी ने शिकायत की थी। वो तीनों जोरों से...
राम चरन भाग एक सौ पचास

राम चरन भाग एक सौ छियालीस

सात नम्बर बंगला आज गुलोगुलजार था। आई विल डू इट – अंग्रेजी गाने की धुन पूरे वॉल्यूम में बज रही थी। बड़े दिनों के बाद आज जनरल फ्रामरोज ने अपनी पुरानी मस्ती को पुकार लिया था। आज वह फिर से यंग एंड बबलिंग आर्मी ऑफीसर था और चीफ बन कर रिटायर होने का सपना उसके पास आ...